मेरा बेटा भी हप्पू को देखकर खूब हंसता है - योगेश त्रिपाठी - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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गुरुवार, 13 अक्तूबर 2016

मेरा बेटा भी हप्पू को देखकर खूब हंसता है - योगेश त्रिपाठी

डायलॉग प्लस
  
एंड टीवी के लोकप्रिय शो भाबी जी घर पर हैं अंगूरी भाभी के बोलने के अनोखे अंदाज को लेकर चर्चित है ही, लेकिन इस धारावाहिक के अन्य किरदार भी कम नहीं हैं। शो का एक ऐसा ही किरदार है दारोगा हप्पू सिंह का, जिसके स्क्रीन पर आते ही पुलिस वाले की एक अलग छवि दिमाग में बनने लगती है। उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे के अध्यापक परिवार से आने वाले हप्पू सिंह यानी योगेश त्रिपाठी से मनीष कु॰ जैसल  की बातचीत




       आपकी टीवी की जिंदगी कहां से शुरू होती है?
मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के पास राठ कस्बे से आता हूं। परिवार में भईया-भाभी, दो बहनें पापा टीचिंग में हैं। घर पर हमेशा पढ़ाई-लिखाई का माहौल रहा इसी वजह से मैंने भी बीएससी मैथ तक की पढ़ाई पूरी कर ली। लेकिन मेरी दिली इच्छा थी कि मैं थियेटर करूं। मैंने लखनऊ से थियेटर सीखा इसके बार राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से 3-4 कार्यशालाएं पूरी की। मैंने साल 2000 से 2004 के बीच अपने आपको पूरी तरह थियेटर के प्रति समर्पित किया और फिर मुंबई के लिए निकला। साल 2005 में मुंबई आ गया। दो साल का स्ट्रगल करने के बाद क्लोरमिंट का एड मिला। वहीं से मुझे लोगों ने अपना सम्मान दिया। इसके बाद मैंने करीब 57 एड फिल्मों मे काम किया।

              पहला टीवी ब्रेक कब मिला ?  
क्लोरमिंट के एड से मुझे पहचान मिलने के बाद मुझे सब टीवी के शो एफआईआर के निर्देशक शशांक बाली ने मुझे मजाकिया डॉ का रोल दिया और मेरी सीरियल की कहानी वही से शुरू हो गयी। उन्होंने मुझसे 6 साल में करीब 600 एपिसोड करवाए। जिनमे मैंने 300 से ज्यादा किरदारों को निभाया।

                भाभी जी के घर पर कैसे आना हुआ?
सीरियल एफआईआर के निर्माता और निर्देशक का ही भाभी जी घर पर हैं शो हैं। उन्होंने मुझसे इस शो के लिए दारोगा के किरदार में 4-5 एपिसोड की बात कही थी। पर दर्शकों ने इतना प्यार दिया कि इस सीरियल के लेखक मनोज संतोषी को मेरे किरदार को हर एपिसोड में लिखना पड़ता है। सही मायनों में देखे तो मुझे इस घर में मनोज संतोषी ने ही जिंदा रखा है। भाभी जी जैसे ऑब्जेक्ट के बीच में दारोगा का सफल होना लेखक और निर्देशन पर ही निर्भर करता है।

      पुरानी और नई भाभी जी से संबंध कैसे हैं?
हमारी पूरी यूनिट में सभी का सभी से अच्छा संबंध है पर पुरानी अंगूरी जी का शो छोड़ कर जाना हम लोगों के लिए भी दुखद है। मैंने उनके साथ लापतागंज, चिडि़याघर जिसे सीरियल में काम किया है। उनका शो छोड़ कर जाना उनकी निजी राय हो सकती है पर मुझे शो के किसी सदस्य से मनमुटाव जैसी कोई स्थिति का पता नहीं है।  



     फिल्मों की तरफ जाने का कोई प्लान?
मैँ चाहता हूं कि मेरी एक्टिंग किसी एक किरदार तक सीमित न रहे। मैँ किसी एक किरदार में अपने आप को समेटना नहीं चाहता। मैं हमेशा से अलग-अलग किरदार करने की कोशिश में लगातार अभिनय पर ध्यान भी देता रहता हूं। इसी का नतीजा है कि मुझे एक फिल्म दिलफिरे मिली। जिसकी शूटिंग आगरा में पूरी हुई। इस साल अंत तक यह फिल्म रिलीज होगी।

      आपकी फैमिली में माहौल अब कैसा रहता है?
पिता जी अब खुश हैं। जब मैं अपने घर राठ जाता हूं तो वहां के निवासी मुझे काफी पसंद करते हैं। अब घर का माहौल ठीक है, लोग मुझे पसंद करने लगे हैं जिसकी वजह से मैं और भी अच्छा करने को प्रेरित होता हूं। मेरा छोटा बेटा, जिसने अभी स्कूल जाना शुरू किया है, वह भी हप्पू सिंह को यू ट्यूब पर देख देख कर खुश होता रहता है। 
(पिक्चर प्लस के जुलाई-अगस्त, 2016 से साभार)

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