बारिश के मौसम में उदास है पानी - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

शनिवार, 8 अक्तूबर 2016

बारिश के मौसम में उदास है पानी

सावन और सिनेमा  
          
सिनेमा में सावन या बरसात अब एक नॉस्टेल्जिया से कम नहीं है। वरिष्ठ फिल्म पत्रकार श्याम माथुर बता रहे हैं सिल्वर स्क्रीन पर तब बारिश के दृश्यों की क्या अहमियत थी। दर्शकों का उन दृश्यों से कितना जुड़ाव था। लेकिन अब...? सिनेमा तो जैसे बिन सावन हो गया...

                                               

ये बारिश गुनगुनाती थी इसी छत की मुंडेरों पर
ये घर की खिड़कियों के कांच पर उंगली से लिख जाती थी संदेशे
बिलखती रहती है बैठी हुई अब बंद रोशनदानों के पीछे
दुपहरें ऐसी लगती हैं बिना मुहरों के खाली खाने रखे हैं
न कोई खेलने वाला है बाजी और न कोई चाल चलता है
ना दिन होता है अब ना रात होती है
सभी कुछ रुक गया है
वो क्या मौसम का झोंका था
जो इस दीवार पर लटकी हुई तस्वीर तिरछी कर गया है

शायर-गीतकार गुलजार की इस नज्म में आपको उन आंखों का दर्द नजर आएगा जो बारिश के इंतजार में सूख गई हैं। फिल्मों के संदर्भ में देखें तो यह दर्द अब उन सिने प्रेमियों की आंखों में भी है,जो फिल्मी पर्दे पर बारिश की बूंदों की टिपटिप सुनने को तरस गए हैं। बारिश का मौसम हो और मन रूमानी ना हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है। रूमानियत के इसी माहौल में अनेक ऐसी फिल्में रची गई हैं, जिनमें बारिश एक अहम किरदार की मानिंद पर्दे पर दस्तक देती नजर आती है। भले ही हीरोइन के बदन के उभार दर्शाने की मंशा हो या नायक और नायिका के बीच प्यार के अंकुर फूटने का मौसम हो - फिल्म निर्देशकों ने बारिश का बड़ी चतुराई से इस्तेमाल किया है। फिल्मी गीतकारों ने भी बारिश के मौसम को लेकर अनेक भावप्रवण गीत रचे हैं। रिमझिम बूंदों और सावन की फुहार से जुड़े फिल्मी गानों की रूमानियत को हर वो इंसान समझ सकता है, जो जज्बाती है, जिसने लफ्जों की रंगीनी को पहचाना है और जिसने पानी की बूंदों के आनंद को अपने भीतर उतारा हो। लेकिन अब आसमान सूखा है और पानी उदास। क्योंकि रफ्ता-रफ्ता फिल्मों से बारिश विदा हो गई और पर्दा सूना हो गया। आइटम नंबर की लोकप्रियता और पार्टी गीतों के प्रति बढ़ते रुझान के कारण अब फिल्मों में नजर नहीं आते रिमझिम के ऐसे दिलकश तराने, जिन्हें बार-बार सुनने को मन करता था।
हालांकि हाल के दौर में वर्षा गीतों का चलन कुछ कम हुआ है, लेकिन हिंदी सिनेमा ने एक दौर वह भी देखा है, जब हर दूसरी या तीसरी फिल्म में सावन की घटा उमड़-घुमडक़र आती थी और बरखा बहार लाती थी। बारिश में भीगते हुए नायक-नायिका पर गाना फिल्माने की परंपरा वर्षों पुरानी है। पचास और साठ के दशक के बीच आई फिल्मों में कई शानदार वर्षा गीत रचे गए। इसमें मादकता भी है और ये भावप्रवण भी हैं। असल जिंदगी में कोई भी फिल्मी अंदाज में भीगते हुए गाना गाते आपको नजर नहीं आएगा, लेकिन परदे पर कलाकारों को ऐसा करते देख सभी को अच्छा लगता है।
राज कपूर की फिल्म बरसातसे वर्षा गीतों का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह मणिरत्नम की फिल्म गुरुतक जारी रहा। राज कपूर ने अपनी फिल्मों में इस तरह के कई गीत फिल्माए। इस कड़ी में 1955 में आई फिल्म श्री 420’ का सॉफ्ट रूमानी गीत प्यार हुआ इकरार हुआ है प्यार से फिर क्यों डरता है दिलसर्वश्रेष्ठ गीत माना जाता है। मन्ना डे और लता मंगेशकर के गाए इस गीत ने लाखों दिलों में हलचल मचा दी थी। कई वर्ष बीत जाने के बावजूद इस गीत का महत्त्व कम नहीं हुआ है और न ही इसकी टक्कर का कोई गीत आया। कुछ संगीत प्रेमी मधुबाला और किशोर कुमार पर फिल्माए गए चलती का नाम गाड़ीके गीत एक लडक़ी भीगी-भागी सीको सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। नायक-नायिका एक-दूसरे को स्पर्श भी नहीं करते हैं और माहौल में मादकता भर जाती है। वी. शांताराम की कालजयी फिल्म दो आंखें बारह हाथका भरत व्यास का लिखा और बसंत देसाई का संगीतबद्व उमड़ घुमड़ घिर आई रे घटाएक सिचुएशन आधारित बारिश गीत है, जिसमें नायक जेलर के साथ सुधरने के लिए भेजे गए कैदी जमीन के एक बंजर टुकड़े को खेती योग्य बनाने में जुटे हैं और बारिश होने पर वे इस गीत को गाकर उल्लास मनाते हैं। यहां बारिश को कैदियों के अन्दर हुए बदलाव के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
जहां तक भाव प्रवणता की बात है तो फिल्म परख का गीत ओ सजना बरखा बहार आई, रस की फुहार आई, आंखियों में प्यार लाईको श्रेष्ठ रचना मान सकते हैं। फिल्म अनजानामें राजेंद्र कुमार और बबीता पर फिल्माया रिमझिम के गीत सावन गाएको सुन कर श्रोता आज भी रोमांचित हो उठते हैं। बारिश के मौसम में कवि ह्दय अक्सर रोमांस के लिए मचल उठता है। फिल्म मंजिलके लिए लिखे योगेश के गीत रिमझिम गिरे सावनकी भी यही खूबी है कि यह कवियों के मन को ही नहीं, बल्कि आम लोगों को भी रोमांटिक बना देता है। मुंबई की बारिश में आर.डी. बर्मन के दिलकश संगीत  पर  रिमझिम गिरे सावनगाते हुए अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी उछल कूद करते नजर आते हैं और बैकड्रॉप में मरीन ड्राइव का शानदार दृश्य दिखाई देता है। परदे पर नवविवाहित राजेश खन्ना और जीनत अमान बॉलीवुड की प्रायोजित बारिश में छत पर फिल्म अजनबीके गीत भीगी भीगी रातों मेंके लिए भीगे थे, जिसे शक्ति सामंत ने फिल्माया था। बाद में इसी साल यानी 1974 में जीनत अमान हाय हाय ये मजबूरी’ (रोटी कपड़ा और मकान) के साथ छत पर भीगीं और मनोज कुमार का ध्यान अपनी ओर खींचा। गुलजार की फिल्म नमकीनमें उजाड़ और अकेली शबाना आजमी का गीत फिर से अइयो बदरा बिदेसीगुलजार के यादगार गीतों में से एक है।
आर. डी. बर्मन के सभी गानों में उल्लेखनीय है ‘1942: ए लव स्टोरीका वर्षा गीत- रिमझिम रिमझिम। इस गीत में अनिल कपूर और नवविवाहित मनीषा कोइराला के प्यार को विंटेज स्टाइल और ताजा बूंदों की धुन के साथ दिखाया गया है। अनिल और मनीषा की जोड़ी ने परदे पर प्यार का वो समा बांधा कि जज्बाती लोग तो भावनाओं में बहते ही हैं,कठोर दिल वाले भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते हैं। इधर सुधीर मिश्रा की फिल्म चमेलीका वर्षा गीत बहता है मन कहींभी दर्शकों और संगीत प्रेमियों पर अच्छा प्रभाव छोड़ता है। चमेलीमें सुनहरे दिल वाली तवायफ यानी करीना कपूर के लिए यह गीत इरशाद कामिल ने लिखा और इसका संगीत दिया संदेश शांडिल्य ने। बहता है मन कहींअपनी शूटिंग और मानसून के प्रणय के कारण इन गीतों में शुमार है। राहुल बोस इस गीत में अपनी अनजान-सी मौजूदगी के कारण याद रहेंगे।
इसी तरह, गहरी खाइयों और काले बादलों के बीच ऐश्वर्या राय पर फिल्माए गए गुरुके बरसो रे मेघागीत को भी लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। खास बात यह भी है कि इस गीत में आपको बारिश कहीं से भी बनावटी नजर नहीं आती है। पूरी तरह कुदरती बारिश में फिल्माए गए गुलजार के लिखे और ए.आर. रहमान के संगीतबद्ध इस गीत की ताल पर ऐश्वर्या भी डूबकर थिरकती हैं। इस गीत का फिल्मांकन भी काफी खूबसूरत था।
                  

कुछ फिल्म निर्माताओं ने वर्षा-गीतों को देह प्रदर्शन का फार्मूला बना लिया। गीली और पारदर्शी साड़ी में लिपटी नायिका को परदे पर पेश करने का उन्हें एक बहाना मिल गया। एक दौर तो ऐसा आया था, जब हर वितरक अपने निर्माता से पूछता था कि फिल्म में वर्षा का कोई गीत है या नहीं। फिल्म नमक हलालका आज रपट जाएंऔर मोहराका टिप टिप बरसा पानीऐसे गीतों में शामिल हैं, जिनमें बारिश की बूंदों का उपयोग नायिका को भिगोने के लिए किया गया। आज रपट जाएंमें अमिताभ बच्चन और स्मिता पाटिल का एक अलग ही रूप हमने देखा। इस गीत में स्मिता पाटिल के साथ अमिताभ मानसून का वाइल्ड टेस्टलेते दिखाई दिए। वैसे बरसात का मौसम रिमझिम के तराने लेकर भी आता है। काला बाजारका गीत रिमझिम के तराने लेके आई बरसातआज भी लोगों को याद है। विजय आनंद की फिल्म गाइडमें पूरा गांव वर्षा का इंतजार कर रहा है। इस फिल्म के वर्षों बाद आशुतोष गोवारीकर ने लगानमें वह जादू पैदा किया, जिसमें पूरा गांव बारिश का जश्न मनाता है। फिल्म दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगेमें काजोल पर फिल्माए गए मेरे ख्वाबों में जो आएऔर दिल तो पागल हैमें घोड़े जैसी चालजैसे गीतों के लफ्जों का बारिश से कोई सरोकार नहीं है, फिर भी इन गीतों में बारिश का उपयोग मस्ती भरा मूड बताने के लिए किया गया है। 
कुछ ऐसी भी फिल्में हैं, जिनके टाइटल में बरसात शब्द का इस्तेमाल किया गया है। बरसातशीर्षक से दो फिल्में बनी हैं। इनमें से 1949 में प्रदर्शित फिल्म के नायक थे राज कपूर तो 1995 में आई बरसातके नायक थे बाबी देओल। इसी तरह 1960 में रिलीज हुई भारत भूषण-मधुबाला की फिल्म बरसात की रात’, तो 1981 में शक्ति सामंत भी लेकर आए बरसात की एक रात। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और राखी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं।
                               
                रिमझिम के कुछ यादगार तराने
* सावन के बादलो (रतन)
* बरसात में हमसे मिले तुम सजन (बरसात)
* प्यार हुआ, इकरार हुआ (श्री 420)
* इक लडक़ी भीगी-भागी-सी (चलती का नाम गाड़ी)
* ओ सजना बरखा बहार आई (परख)
* रिमझिम के तराने लेकर आई बरसात (काला बाजार)
* जिंदगीभर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात (बरसात की रात)
* काली घटा छाए मेरा जिया तरसाये (सुजाता)
* उमड़ घुमड़ घिर आई रे घटा (दो आंखें बारह हाथ)
* छाई बरखा बहार पड़े अंगना फुहार (चिराग)
* सावन की रातों में (प्रेमपत्र)
* बदरा छाये कि झूले पड़ गए (आया सावन झूम के)
* रिमझिम के गीत सावन गाए (अनजाना)
* पानी रे पानी तेरा रंग कैसा (शोर)
* रूप तेरा मस्ताना (आराधना)
* हाय हाय ये मजबूरी (रोटी कपड़ा और मकान)
* कुछ कहता है ये सावन/ मेरा गांव मेरा देश
* रिमझिम गिरे सावन (मंजिल)
* ये मौसम भीगा भीगा हवा भी ताजा ताजा है (धरती)
* जलता है जिया मेरा भीगी भीगी रातों में (जख्मी)
* आज रपट जाएँ (नमक हलाल)
* काटे नहीं कटते (मि. इण्डिया)
* अब के बरस यूँ बरस (आग और शोला)
* मेघा रे मेघा रे (प्यासा सावन)
* लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है (चाँदनी)
* रिमझिम-रिमझिम (1942 -ए लव स्टोरी)
* टिप-टिप बरसा पानी (मोहरा)
* बादल क्यों गरजता है (बेताब)
* घोड़े जैसी चाल (दिल तो पागल है)
* आंखों से तूने ये क्या कह दिया/ गुलाम
* घनन-घनन घन घिर आए बदरा (लगान)
* बहता है मन कहीं (चमेली)
* बूंदों से बातें (तक्षक)
* साँसों को साँसों से (हम तुम)
* देखो ना (फना)
* बरसो रे मेघा (गुरु)

पिक्चर प्लस जुलाई-अगस्त 2016 में प्रकाशित


3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुंदर बरसात के गीतों का संग्रह की प्रस्तुति
    चलचित्र रतन का गीत आज भी बुझी राख में शोला है एक एक शब्द >>>
    बरसात की रात ,चलती का नाम गाड़ी.श्री ४२० ,दो ऑंखें बारह हाथ
    अब ऐसे गीत कहाँ ना रहे वह गीतकार, ना गायक

    उत्तर देंहटाएं
  2. फिल्म चमेली थोड़ी सी अनंत बालानी की भी थी !

    उत्तर देंहटाएं

Post Bottom Ad