"जिंदगी के अंजुमन में अदाओं का उत्सव" - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शुक्रवार, 24 मार्च 2017

"जिंदगी के अंजुमन में अदाओं का उत्सव"

बॉलीवुड की मशहूर कास्ट्यूम डिज़ाइनर हैं लीना दारू जिन्होंने गुजरे जमाने की अभिनेत्री आशा पारेख के साथ अपना कैरियर प्रारंभ किया था, लेकिन बाद के दिनों में उन्होंने रेखा की भी कई बड़ी फिल्मों में उनके लिए कास्ट्यूम डिज़ाइन किये। लीना दारू से रेखा की पसंद के बारे में बात की 'पिक्चर प्लस' संपादक संजीव श्रीवास्तव ने 

जन्मदिन : 10 अक्टूबर

संजीव श्रीवास्तव - रेखा जी से आपकी पहली मुलाकात कब हुई?

लीना दारू - देखिये, रेखा जी से पहले मैं आशा पारेख जी के साथ काफी काम कर चुकी थी। सन् 1962 में मैंने जेजे स्कूल ऑफ आर्ट मुंबई से फाइन आर्ट का पांच साल का कोर्स पूरा किया था। मैं उस वक्त डांस भी करती थी-फोक और क्लासिकल दोनों। 1963 में साउथ अफ्रीका टूर से वापस आई तो स्टेज पर मुंबई में ही आशा पारेख और उनकी मां से मुलाकात हुई थी। उस वक्त वे लोग एक बैले की तैयारी रही थीं। वहीं मुझे सेट डिजाइन करने का काम मिला था। लेकिन फिर कहा गया कि आप कास्ट्यूम डिजाइन भी क्यों नहीं करतीं? उसके बाद आशा जी के साथ उस कार्यक्रम से जुड़ी सारी कास्ट्यूम डिजाइन की। इसके बाद तो आशा जी के साथ 1964 से लेकर उनकी आखिरी फिल्म तक मैंने काम किया। लेकिन जब मेरी शादी हुई तब मेरे पति ने मुझे चुनौती दी कि तुमने तो केवल आशा जी के साथ काम किया है, दूसरी आर्टिस्टों के साथ भी काम करके दिखाओ तो मानूंगा। फिर उसके बाद हेमा जी की कई फिल्में मसलन, राजा जानी, कुदरत, क्रांति, किनारा में उनके लिए कास्ट्यूम डिजाइन किये। फिर परवीन बॉबी और जीनत अमान के भी कास्ट्यूम डिजाइन किये। यादों की बारात फिल्म में जीनत अमान ने जो ड्रेस पहनी था, वही आज प्लाजो के नाम से चलन में है। यहां तक कि नीतू सिंह के कपड़े भी मैंने डिजाइन किये। और नीतू सिंह के घर जाने के दौरान ही हमारा रेखा जी से परिचय हुआ। हमलोग एक लिफ्ट में मिले थे। यह साल 1980 रहा होगा। रेखा जी के साथ हमारी पहली फिल्म राम बलराम थी। फिर खूबसूरत फिल्म की। इस फिल्म में रेखा जी का गेटअप काफी मशहूर हुआ था।

ड्रेस डिजाइनर लीना दारू के साथ रेखा
संजीव श्रीवास्तव - तो इस तरह इन फिल्मों के बाद रेखा जी के साथ आप संबंध और भी घनिष्ठ हो गया।
लीना दारू - हां, कह सकते हैं। खूबसूरत फिल्म की सफलता ने हमारे संबंध को और भी घनिष्ठ बना दिया। रेखा इस फिल्म से और भी पोपुलर हो गईं। इसके बाद हमने उनकी फिल्म उमराव जान, उत्सव, सिलसिला, खून भरी मांग जैसी फिल्में की। उससे पहले सुहाग और मि. नटवरलाल में भी उनके कुछ कास्ट्यूम डिजाइन किये थे। इस तरह रेखा की करीब पच्चीस फिल्मों में मैंने उनके कास्ट्यूम डिजाइन की है। रेखा जी के साथ आखिरी फिल्म शेषनाग थी। हालांकि किसी वजह से यह काम रुक गया था।


संजीव श्रीवास्तव - इतनी बड़ी-बड़ी अभिनेत्रियों के साथ आपने काम किया है, आप को उन सबकी अलग-अलग पसंद का भी खूब अंदाजा हुआ होगा?

लीना दारू - हां, पसंद तो वाकई सबकी अलग-अलग होती थी। लेकिन मैं सबको सबसे पहले यही कहती थी कि भी, पहले कैरेक्टर को पकड़ो। मुझे पहले कैरेक्टर के हिसाब से डिजाइन करने दो उसके बाद उसमें अपनी पसंद शामिल करना। रेखा जी एक फिल्म में टीचर बनी थीं तो उसके मुताबिक ही ड्रेस बनाई थी। उसी तरह एक फिल्म में रेखा और मौसमी चटर्जी थीं तो दोनों के लिए साड़ी पहनने का अंदाज तैयार किया था। यह सब कैरेक्टर की मांग के मुताबिक हुआ था।

संजीव श्रीवास्तव - आप एक्ट्रेस की च्वाइस होती थीं या डायक्टर्स-प्रोड्यूसर्स की च्वाइस होती थीं?

लीना दारू - दोनों की च्वाइस कह सकते हैं। चूंकि, हमारा काम इतना हो चुका था, हमारे काम की इतनी तारीफ हो चुकी थी कि लोग हमसे ही काम कराना चाहते थे। लोग कहते थे कि भई, तुम्हारे तैयार किये हुए कपड़े वाले गाने तो खूब हिट होते हैं।

संजीव श्रीवास्तव - रेखा जी के बाद की पीढ़ी की किन-किन अभिनेत्रियों के साथ आपने काम किया है?   

लीना दारू - रेखा के अलावा शबाना आजमी की मिर्च मसाला में, सौदागर में मनीषा कोइराला के लिए, तेजाब फिल्म का गीत...एक...दो तीन पर माधुरी दीक्षित के लिए मैंने ड्रेस बनाई थी। लम्हे फिल्म के लिए मुझे बेस्ट कास्ट्यूम डिजाइनर का नेशनल अवॉर्ड मिला था वहीं चांदनी में श्रीदेवी की ड्रेस बनाई थी। सभी खूब पोपुलर हुए थे।

संजीव श्रीवास्तव - आज की जेनेरेशन की ड्रेस डिजाइनिंग के बारे में क्या कहना चाहेंगी?

लीना दारू - हमारे समय ना मोबाइल था, ना कंप्यूटर था, ना ही उतना टीवी का चलन था मतलब कि हमलोग कहीं से देखकर नहीं सीखते थे। हमलोग खुद ही रिसर्च करते थे। क्रिएट करते थे। आज की पीढ़ी ब्रांडेड कपड़ों के रेडीमेड माल को थोड़ा बहुत इधर उधर करके काम कर लेते हैं। हमलोग कांटीन्यूटी का खूब ख्याल रखते थे। लेकिन आज वैसा नहीं रह गया। दो बदन में हमने पहली बार डांस के लिए स्किन कलर की साड़ी तैयार की थी। यह खूब हिट हुआ था। यानी हमलोग बहुत मीटिंग्स करके क्रिएटिविटी पर जोर देते थे। आज के डिजाइनरों के पास आर्ट और विजन की कमी है। हमलोग नेचर से कलर लेते थे। नेचर देखकर अंदर से प्रेरणा आती थी। लेकिन आज नकल ज्यादा हो रही है।
      
संजीव श्रीवास्तव - रेखा जी के साथ ड्रेस के काम को लेकर किस तरह की डिस्कसन होती थी?

लीना दारू - मैं हमेशा पहले पेपर पर पेंसिल से रेखांकन करती थी। उसके बाद ही ड्रेस बनाती थी। उत्सव के फोटो सेशन के वक्त उन्होंने काफी तारीफ की थी। हेमा जी भी बहुत तारीफ करती थीं। माधुरी दीक्षित ने भी कहा था आपने तो एक दो तीन जैसा गाना हिट करा कर मुझे स्थापित कर दिया।   

'उत्सव' की रेखा
संजीव श्रीवास्तव - रेखा जी के साथ आज भी मुलाकात होती रहती है?
लीना दारू - हां, कभी कभार कोई प्रोग्राम में उनसे मुलाकात हो जाती है।

संजीव श्रीवास्तव - कभी किसी बड़ी हिरोइनों की तरफ से आपको आगे किसी तरह का सहयोग मिलता रहा?
लीना दारू - आगे चलकर तो नहीं हां, जब काम करती रही तब तो सबका बड़ा सहयोग मिलता था। आशा जी, हेमा जी, रेखा जी, मौसमी जी सबने बहुत सहयोग किया। प्रोड्यूसर पैसे देने में कभी कभार देरी करते थे तो ये कहती थीं पहले लीना जी को पेमेंट कर दो फिर मैं शूटिंग्स के लिए तैयार होऊंगी। इस तरह उनके कहने पर मुझे तुरंत पैसे मिल जाते थे। कई बार रेखा जी स्टोरी सुनने के दौरान ही मुझे भी बुलाती थीं ताकि काम में परफेक्शन आए।

संजीव श्रीवास्तव - रेखा जी के नेचर के बारे में क्या कहना चाहेंगी।    
उनके नेचर का क्या कहना, वो तो बहुत ही अच्छा है। मुझे हमेशा उनके साथ बिताये दिनों की याद हमेशा रहेगी। वो बहुत ही ग्रेट हिरोइन हैं। (फोटो सौजन्य : लीना दारू)
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(यह इंटरव्यू हमारी फिल्म पत्रिका 'पिक्चर प्लस' के अक्टूबर-नवंबर 2016 के अंक में प्रकाशित हो चुका है। इसे पुनर्प्रकाशन के लिए पूर्वानुमति आवश्यक है। 
संपर्क Email: pictureplus2016@gmail.com)    

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