हिन्दुस्तान के 'दिल' की फिल्मी दास्तान - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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रविवार, 16 जुलाई 2017

हिन्दुस्तान के 'दिल' की फिल्मी दास्तान

लोकेशन प्लस / मध्य प्रदेश
'रिवॉल्वर रानी' में कंगना रानाउत
गौतम सिद्धार्थ*
हिंदुस्तान का दिल, मध्य प्रदेश। हिंदुस्तानी नक्शे पर एक ऐसा प्रांत है, जो पर्यटन के लिहाज से कई प्रदेशों से बहुत आगे है। वजह बिलकुल साफ़ है, एक तो इस प्रांत की सीमायें छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से घिरी हुई हैं और दूसरी, पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण जाते समय आप इस प्रांत की सीमा को बिना छूये, बहुत मुश्किल से ही निकल सकते हैं। क्योंकि ये झारखंड, उड़ीसा, बंगाल और तेलंगाना से भी नज़दीक है, तो वहां के लोगों को भी मध्य प्रदेश में पर्यटन के लिये आने में आसानी होती है। इसलिये ही इसे हिंदुस्तान का दिल कहते हैं।

सांस्कृतिक धरोहरों की भूमि

देश की कुछ गिनी चुनी जगहों में से मध्य प्रदेश एक ऐसी जगह है, जो वाईल्ड लाईफ़ सेंचुरी से भी भरपूर है। इसे बाघों का राज्य भी कहा जाता है। यहां भीमबैठका नाम की जगह है, जहां पहाड़ों पर आदि मानव की बनाई हुई कलाकृतियां आज तक सुरक्षित रखी गई हैं। और खजुराहों के मंदिरों को कौन नहीं जानता। ये कलाकृतियां विश्व की धरोहर हैं। जबलपुर के भेड़ाघाट में संगमरमर के खूबसूरत पहाड़ हैं। यहां उदयगिरी की गुफाएं भी हैं, जहां 500 ई.पू. की वो मूर्तियां हैं, जो मौर्य और गुप्तकाल की हैं।

सांची का विश्व प्रसिद्ध बौद्ध स्तूप

मध्य प्रदेश एक ऐसी जगह है, जहां सांची में बौद्ध धर्म का प्रसिद्ध स्तूप है, तो दतिया में जैन धर्म के तीर्थंकरों के सैकड़ों मंदिर मिल जाते हैं। वहीं उज्जैन का महाकाल मंदिर है, जिसे मोक्ष का दरवाज़ा भी कहा जाता है। साथ में है, एक और ज्योतिर्लिग, जिसका नाम ओंकारेश्वर है। बुरहानपुर में सिख्खों का एक गुरुद्वारा है, जिसे गुरुद्वरा बारी संगतकहा जाता है, यहां हाथ से लिखा हुआ गुरू ग्रंथ साहिब रखा हुआ है। माना जाता है कि यहां गुरू नानक देव जी आये थे, और गुरू गोविंद सिंह जी की हस्तलिपि भी यहां मौजूद है।  
मध्य प्रदेश की एक मुख्य नदी है नर्मदा; उसकी खास बात है कि वह पूर्व से पश्चिम की तरफ़ बहती है। ये नदी देश की सबसे लम्बी नदियों में से एक है।
पूरा प्रदेश ही क़िलों और नदी के घाटों से भरा पड़ा है। मांडू का क़िला, मुहब्बत की मिसाल कहा जाता है, और महेश्वर के घाटों की सुंदर छटा देखते ही बनती है। 

भेड़ाघाट : जहां 'अशोका' और 'मोहनजोदारो' की  भी शूटिंग्स हुई

फिल्मों की शूटिंग्स के लिए है अहम

आईये अब हम इस प्रदेश को फिल्मों से जोड़ने की कोशिश करते हैं। वैसे राजस्थान एक ऐसा राज्य रहा है, जहां फिल्मों के लिहाज से सबसे ज्यादा शूटिंग्स हुई हैं। लेकिन मध्य प्रदेश भी उससे किसी हालत में कम नहीं है। उसकी वजह है, यहां पर फैला हुआ अथाह प्राकृतिक सौंदर्य, जिसकी हल्की सी झांकी आपको अब तक मिल ही गई होगी।
मध्य प्रदेश में फिल्मों की शूटिंग की शुरुआत 1952 से मानी जाती है, उस समय यहां जो फिल्म शूट हुई थी, उस फिल्म का नाम था, ‘आन। जिसके मुख्य कलाकार थे-दिलीप कुमार और निम्मी। लेकिन नादिरा ने इस फिल्म से अपनी पहचान बनाई थी, और साथ ही साथ इस फिल्म से दिलीप कुमार ने अपनी ट्रेजडी किंग की इमेज को भी तोड़ने की कोशिश की थी। क्योंकि उन्होंने इस फिल्म में कॉमेडी के साथ-साथ तलवारबाज़ी के स्टंट भी किये थे। ये हिंदुस्तान की पहली टेक्नीकलर फिल्म थी। इस फिल्म ने उस समय 1.5 करोड़ का रिकॉर्ड बिजनेस किया था। 1955 में श्री 420’  ने इस रिकॉर्ड को 2 करोड़ से तोड़ा था।

अमिताभ बच्चन और प्रकाश झा 'आरक्षण' की शूटिंग्स के दौरान
नया दौर’ (1957) की शूटिंग भी मध्य प्रदेश में की गई थी। इस फिल्म से जुड़ी एक कहानी है कि पहले इसमें मधुबाला काम कर रही थीं। मुम्बई में उन्होंने 10 दिन की शूटिंग भी कर ली थी। लेकिन जब बी.आर.चोपड़ा यूनिट के साथ भोपाल निकलने वाले थे, तो मधुबाला के पिता ने मधुबाला को वहां जाने से मना कर दिया। क्योंकि उन्हें शक़ था कि दिलीप कुमार के प्रेम में मुब्तिला उनकी बेटी को, दिलीप कुमार से रोमांस करने का ज्यादा वक़्त मिल जायेगा,जिससे हो सकता है, मधुबाला फिल्म इंडस्ट्री ही छोड़ दे और उनकी कमाई का ज़रिया खत्म हो जाये। उस समय तक आऊटडोर लोकेशन की अहमियत, फिल्म वालों को समझ में आने लगी थी।

कई अहम फिल्मों की शूटिंग्स एमपी में हुई

मुझे जीने दो’ (1963) और प्राण जाये पर वचन ना जाये’ (1974) जैसी फिल्मों की शूटिंग्स चम्बल में हुई, जिसे सुनील दत्त ने बनाया था।
1977 में गुलज़ार की किनाराफिल्म आई जो मांडू में शूट की गई। इस फिल्म में,एक तरफ़ जहां रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी को बेहद खूबसूरती से बताया गया, वहीं, यहां की खूबसूरती को भी कैमरे में भरपूर समेटा गया। 
इसके बाद उन दो फिल्मों का ज़िक्र करना ज़रूरी है जिसने मध्य प्रदेश की लोकेशन्स की कॉमर्शियल स्तर पर ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई। वो थी डकैत’ (1987) और दूसरी बैंडिट क्वीन’ (1994)। इन फिल्मों की विषय वस्तु भी मध्य प्रदेश की पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई थी, इसलिये मध्य प्रदेश को समझने का इनसे बेहतर माध्यम और कुछ नहीं हो सकता था।
इस बीच कई फिल्में मध्य प्रदेश में बनती रही, जैसे सलमान की प्यार किया तो डरना क्या’ (1998) और गुलज़ार की हु तु तू’ (1999)। अब फिल्मकारों ने सिर्फ़ मध्य प्रदेश के परिवेश की कहानियों के अलावा कई और कहानियों के लिये भी लोकेशन खोजने शुरू किये। जिसमें खास थी शाहरुख खान की अशोका। इसे पचमढ़ी और महेश्वर की लोकेशन पर शूट किया गया, जिसने इन जगहों को एक भव्यता प्रदान की।

'आन' के एक दश्य में दिलीप कुमार व नादिरा
अब हम मक़बूल’ (2003), ‘हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी’ (2003) ‘युवा’ (2004) और पीपली लाईव’ (2010) जैसी कई फिल्में, जो मध्य प्रदेश में शूट हुईं, को छोड़ते हुए राजनीति’ (2011) पर आते हैं। इस फिल्म में दिग्गज कलाकारों की भरमार थी। जिसे प्रकाश झा ने निर्देशित किया था। इन्होंने एयरपोर्ट से लेकर हाईवे तक पूरे मॉडर्न भोपाल को शूट किया था। प्रकाश झा की अगली फिल्म आरक्षण’ (2012) भी भोपाल के IES campus में शूट हुई। उसी तरह चक्रव्यूह’ (2012), ‘सत्याग्रह’ (2013) भी भोपाल में शूट की गई। इस तरह से देखा जाये तो प्रकाश झा ने 2010 से 2013 तक मध्य प्रदेश में ही डेरा डाल दिया था।
2012 से 2014 के बीच में हिंदी सिनेमा की कई बड़ी फिल्में मध्य प्रदेश में शूट हुई, जैसे पान सिंह तोमर’ (2012) ‘यमला पगला दिवाना 2’ (2013) ‘रिवॉल्वर रानी’ (2013) ‘यंगिस्तान’ (2014)
2015 में मध्य प्रदेश में दो बड़ी फिल्मों की शूटिंग्स हुईं। पहली थी गंगाजल 2’, ये भी प्रकाश झा की फिल्म थी। जबकि आरक्षणकी शूटिंग के दरम्यान उनके एक सेट को वहां के प्रशासन ने तोड़ दिया था। दूसरी फिल्म थी बाजीराव मस्तानी’, इसकी शूटिंग्स भी मध्य प्रदेश के कई इलाकों में हुई थी।


विश्व प्रसिद्ध जैन समाज मंदिर

सिलसिला जारी है

2016 में मोहेनजोदाड़ोऔर नीरजाकी शूटिंग्स भी मध्य प्रदेश में हुई।
अब आता है 2017 में। अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैनकी शूटिंग भी महेश्वर में हुई है।
ये तो रहा, फिल्मों का लेखा जोखा। लेकिन मध्य प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है, जिसे हम चित्रों और फिल्मों में देखकर उतना मज़ा नहीं ले सकते, जितना उस जगह मौजूद रह कर लिया जा सकता है। जिसके लिये लोगों का कहना है कि अगर आप नर्मदा नदी के उदगम से अंत तक जायें, तो आदिकाल से अब तक के सारे प्राकृतिक वातावरण का अनुभव ले सकेंगे। 
(सभी फोटो: गूगल इमेज से साभार)
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*(लेखक-फिल्म पटकथाकार तथा फिल्म निर्देशक हैं। मुंबई में निवास। उनके इस लेख को कहीं भी प्रकाशित करने हेतु पूर्वानुमति आवश्यक है। ईमेल करें: pictureplus2016@gmail.com)

6 टिप्‍पणियां:

  1. भेड़ा घाट की फोटो मोहनजोदारो की है।

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  2. Gautamji rajnikant ki bhi ek film ki shooting madhyapradesh me hi hui thi jisme unke opposite jeenat amaan hain, film ka nam hai " Daku haseena" . shoot shivpuri jile ki narwar nam ki tahsil me hua tha. Narwar me ek kila hai Jo " longest fort of Asia" hai.

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