‘इंदु’ और विवाद का केंद्रविन्दु - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 22 जुलाई 2017

‘इंदु’ और विवाद का केंद्रविन्दु

'आंधी' से 'इंदु सरकार' तक

'इंदु सरकार' का एक पोस्टर

-संजीव श्रीवास्तव 
कांग्रेस अपनी हर आचोलना बर्दाश्त कर सकती है लेकिन 1975 के आपातकाल की पृष्ठभूमि में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की चर्चा और चित्रण को बर्दाश्त नहीं कर सकती। मामला मधुर भंडारकर की फिल्म इंदु सरकार से एक बार फिर गरमा गया है। कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने इस फिल्म की कहानी और पृष्ठभूमि को कांग्रेस पार्टी और स्व. श्रीमती इंदिरा की छवि को खराब करने की साजिश करार दिया और फिल्म की रिलीज को टलवाने तक के अभियान में जुट गई। मधुर भंडारकर को कांग्रेस पार्टी की चेतावनी ही क्यों उधर सेंसर बोर्ड से भी झटका लग चुका है। बोर्ड ने फिल्म से राजनीतिक शब्दावलियों को निकालने का निर्देश दिया।  खुद मधुर के शब्दों में इससे फिल्म बनाने का उनका मकसद ही खत्म हो गया।

मधुर की सफाई नाकाफी : कांग्रेसी हैं रोष में

हालांकि मधुर भंडारकर सफाई दे चुके हैं यह फिल्म ना तो कांग्रेस पार्टी और ना ही श्रीमती इंदिरा गांधी की छवि पर केंद्रित है, इसमें महज आपातकाल का बैकड्रॉप दिखाया गया है। लेकिन मधुर की ये दलील काग्रेस पार्टी के नेताओं को रास नहीं आई। पार्टी ने वर्तमान राजनीतिक परिवेश में इस फिल्म के निर्माण की मंशा पर सवाल उठाया है। कांग्रेस को आशंका इस बात की भी है कि इस फिल्म में ना केवल इंदिरा गांधी की छवि बल्कि संजय गांधी के चरित्र का भी गलत चित्रण किया गया होगा। मीडिया में फिल्म की कहानी का जो सार सामने आया है और प्रचार के लिए जो प्रोमो दिखाये जा रहे हैं, उससे इस आशंका को बल मिलता है कि फिल्म में संजय गांधी एक आक्रामक मुद्रा में दिखाई दे सकते हैं। आक्रामकता वैसी जो आमतौर पर मसाला फिल्मों में खलनायकों की होती है।  

इंदिरा की छवि पर पहले भी हुये हैं विवाद

श्रीमती इंदिरा गांधी के चरित्र चित्रण की आशंका को लेकर फिल्म के इतिहास में पहले भी विवाद हो चुके हैं। सन् 1975 में  बनी आंधी फिल्म बहुत से फिल्नप्रेमियों को याद होगी। इस फिल्म का निर्माण जे. ओमप्रकाश ने किया था, गुलजार ने निर्देशित किया था और इसके लेखक थे हिन्दी के कथाकार कमलेश्वर। फिल्म बन कर तैयार हो गई। पोस्टर बाजार में दीवारों पर चिपका दिये गये। लेकिन पोस्टर पर महिला कलाकार सुचित्रा सेन की तस्वीर को जब लोगों ने देखा तो उन्हें उस तस्वीर में इंदिरा गांधी की छवि नजर आई। फिर क्या था। सवाल उठने लगे कि क्या आंधी इंदिरा गांधी के जीवन पर बनी फिल्म है? विवादों के बीच फिल्म पर प्रतिबंध लगा दिया गया। खुद इंदिरा गांधी ने कमलेश्वर जी को मिलने के लिए बुलाया और फिल्म की कहानी तथा किरदार के बारे में समझने का प्रयास किया। और जब इंदिरा गांधी उनके जवाब से संतुष्ट हो गईं तो इसके बाद आंधी को रिलीज कर दिया गया।...लेकिन सालों साल तक यह चर्चा आम रही कि क्या आंधी इंदिरा गांधी के जीवन पर बनी फिल्म है? इस सवाल का जवाब मैंने भी एक बार कमलेश्वर जी से पूछा तो उन्होंने उद्घाटित किया कि आंधी उनके उपन्यास काली आंधी की कहानी पर केंद्रित है और काली आंधी बिहार की दिग्गज कांग्रेस नेता रहीं तारकेश्वरी सिन्हा के राजनीतिक और दांपत्य जीवन के उतार-चढ़ाव से प्रेरित है। आंधी या काली आंधी में इंदिरा गांधी के जीवन से दूर-दूर तक कोई लेना –देना नहीं है। यह महज संयोग था कि 1975 में आपातकाल लगा और 1975 में ही आंधी रिलीज होती है। यहां तक कि पोस्टर पर सुत्रित्रा सेन का जो लुक है, वह लुक भी तारकेश्वरी सिन्हा के लुक के समान है न कि इंदिरा गांधी के।
 
फिल्म 'आंधी' का एक दृश्य

अगर आज इंदिरा होतीं !

सोचता हूं आज अगर इंदिरा गांधी होतीं क्या तब भी इंदु सरकार फिल्म का इतना ही विरोध होता ? यों आंधी फिल्म का विरोध तमाम कांग्रेसी नेताओं ने कम नहीं किया था लेकिन खुद जब इंदिरा गांधी ने तसल्ली पाई तब जाकर फिल्म का लोगों ने विरोध करना बंद कर दिया।
...जाहिर है इंदु सरकार से कांग्रेस को डरने की जरूरत नहीं है। सवाल है आपातकाल किसी फिल्म का बैकड्रॉप क्यों नहीं हो सकता, गर उस बैकड्रॉप में आम जनता को दुश्वारियों का सामना करना पड़ा रहा हो।

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4 टिप्‍पणियां:

  1. ज्ञानवर्धक और रोचक है. लिखते रहे.

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  2. रणवीर सिंह का नया वीडियो खून भरी मांग उनके साथ हीरोइन हैं फराह खान
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