बॉलीवुड का अपना शौचालय - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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मंगलवार, 8 अगस्त 2017

बॉलीवुड का अपना शौचालय

कब्जियत, खट्टा डकार, शौच और शौचालय विषय पर बनने लगी फिल्में
'टॉयलेट एक प्रेम कथा' के विभिन्न दृश्य
-संजीव श्रीवास्तव
जिस देश पर सालों तक शासन किया उसी देश के बारे में अंग्रेज कहते रहे हैं कि इंडिया इज़ ए संडास कंट्री। क्योंकि अंग्रेजों ने देखा था कि यहां बहुत से लोग खुले में शौच करते हैं। लेकिन इससे बड़ा परिवर्तन और क्या होगा कि अब बॉलीवुडिया सिल्वर स्क्रीन का भी अपना शौचालय बनने लगा है, जहां सुंदरता, मादकता और कायनात की काया का अपना विशेष आग्रह रहा है।    
यह सोच में बड़े बदलाव की निशानी है। अलक्षित यानी अलहदा विषय भी व्यावसायिक सिनेमा के विषय हो सकते हैं-साहसी सिनेकार अब इस क्षेत्र में भी प्रयोग करने लगे हैं। अलहदा विषयों मसलन स्पर्म पर विकी डोनर' तो मासिक धर्म पर 'फुल्लू'  का भी अब यहां निर्माण होता है। लेकिन बॉलीवुडिया फिल्मों की कहानी इतना भी आगे सोचने लग जायेगी किसने कल्पना की थी। कभी सोचा न था कि अब यहां कब्जियत, खट्टा डकार, शौच और शौचालय जैसे विषय पर फिल्म की पूरी कहानी लिखी जायेगी। जाहिर है कि यह आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेतक है।
अक्षय कुमार की नवीनतम फिल्म टॉयलेट एक प्रेम कथा की मुहिम की पृष्ठभूमि पर ना भी जायें तो भी इसे सरोकारी विषय की फिल्म की संज्ञा तो दी ही जा सकती है। इस फिल्म की कहानी जानने के बाद मुझे झारखंड प्रदेश के दुमका की एक दर्दनाक कहानी की याद आ रही है, जहां एक युवती ने घर में शौचालय बनाने की उसकी मांग पूरी नहीं होने पर खुदकुशी कर ली थी। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार तथा सुदूर के सामाजिक-सांस्कृतिक चिंतकों को भी सन्न कर दिया था। भला ऐसी भी घटना हो सकती है, आज तक किसी ने सोचा ही नहीं। जहां खुले में शौच जाने की खुलेआम सी एक मजबूर परंपरा कायम हो गई हो, वहां कोई युवती घर में पहले विद्रोह करती है और जब उसकी मांग पूरी नहीं होती तो जिंदगी, परिवार और समाज को एक सबक देकर दुनिया से रुख़सत हो जाती है। 

अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर 
शौचायल नहीं होने की दर्द भरी कहानी इतनी ही नहीं है। कई गांवों की ऐसी ही कहानियां मीडिया में सुर्खियां बन चुकी हैं, जहां ससुराल में शौचालय नहीं होने पर लड़कियों ने विवाह करने से इनकार कर दिया। ये लड़कियां विद्या बालन के विज्ञापन की प्रोटेगोनिस्ट प्रियंका भारती से कम नहीं, जिन्हें अपनी इज्जत अपने लगन से ज्यादा प्यारी लगी। तो जाहिर है जिस समाज में सोच में इतना बड़ा बदलाव आ गया तो सिनेमा उससे कैसे अछूता रह सकता था।
कल तक जिस बॉलीवुडिया सिनेमा में पेशाब करने के सीन को भी जुगुप्सापरक और हास्यबोधक समझा गया, वहां पहले तो पीकू जैसी फिल्म में शौच करने के तरीके की विस्तृत व्याख्या की गई वहीं टॉयलेट एक प्रेम कथा में गांव में शौचालय बनाने के लिए नायक को क्रांतिवीर बनना पड़ता है। फिल्म में पेशाब करने के सीन की चर्चा के दौरान मुझे अस्सी के दशक की एक फिल्म की याद आ रही है-वह कुमार गौरव की पहली फिल्म थी-लव स्टोरी। कुमार गौरव और विजयता पंडित को एक ही हथकड़ी लगी है। दोनों कैदखाने से भाग जाते हैं। दोनों को अपने-अपने सारे काम एक ही साथ करने की मजबूरी बन जाती है। इसी बीच रास्ते में कुमार गौरव विजयता पंडित को रोकता है और हाथ की सबसे छोटी उंगली दिखाते हुये दूसरी तरफ घूम जाता है। विजयता शरमाती हुई, झिझकती हुई दूसरी तरफ घूम जाती है। इस दृश्य में फिल्मकार की सोच महज हास्य पैदा करने तक सीमित थी लेकिन यथार्थ में यह परिस्थिति उलट जाये तो? जाहिर है उस दिशा में अब तक किसी सिनेकार ने सोचा ही नहीं। क्योंकि वहां अश्लील हो जाने अथवा बेवजह कलात्मक हो जाने का जोखिम था। जबकि उस जोखिम से समाज दो-चार तो होता है लेकिन उसका भार वहन करने की हिम्मत करना एक गर्व की बात है। इसीलिये स्लम और संडास के दृश्य दिखाती फिल्म 'स्लमडॉग मिलेनियर' और फिर बुजुर्गावस्था में कब्जियत की समस्या को लेकर बनी फिल्म पीकूजब आती है तो हास्यबोध कराती हुई भी इस गंभीर समस्या की ओर गंभीरता से इशारा कर जाती है। घर में टॉयलेट कैसा होना चाहिये। हमें अपने पेट को ठीक रखने और पेट के बहाने पूरे शरीर व सेहत को चुस्त दुरुस्त करने तथा आहार को सुपाच्य बनाने के लिए हमें कैसे खाना-चबाना चाहिये, यह भी उस फिल्म में बखूबी बताया गया था। और लोगों ने बड़े ही चाव से देखा था।
फिल्म 'पीकू' का एक दृश्य
टॉयलेट एक प्रेम कथाजितनी घर के अंदर की कहानी है, उतनी ही घर के बाहर पूरे समाज की सेहत की कहानी है। अक्षय कुमार निष्चय ही ऐसे विषय की फिल्म को लेकर आने के लिए बधाई के पात्र हैं। इस फिल्म का निर्देशन श्रीनारायण सिंह ने किया है लेकिन इसके तीन निर्माताओं में एक खुद अक्षय कुमार भी हैं। अक्षय कुमार की मानें तो इसकी कहानी वास्तविक घटना पर आधारित है जहां एक नवविहातिता ने ससुराल में टॉयलेट नहीं होने पर ससुराल छोड़ दी थी। अक्षय कुमार ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा है कि इस फिल्म में कोई एक्टर उनके मुख्य किरदार का रोल करने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद उन्हें खुद ही मैदान में उतरना पड़ा। इस फिल्म की कथा और संदेश इतना प्रचारित हो गया कि यूपी सरकार ने सबसे पहले इसे टैक्स फ्री करने का ऐलान कर दिया और उत्तर प्रदेश में खुले में शौच को खत्म करने हेतु चलाये जा रहे अभियान के लिए अक्षय कुमार को ब्रांड एम्बेस्डर भी घोषित कर दिया। गौरतलब है कि इस फिल्म को देश में सफाई अभियान के प्रचार का हिस्सा के तौर पर भी समर्थन मिल रहा है।

फिल्म 'गुटरूं गुटरगूं' का पोस्टर
लेकिन इसी क्रम में करीब करीब ऐसी ही कहानी पर पिछले साल की फिल्म गुटरूं गुटरगूंकी चर्चा भी जरूरी है। अक्षय कुमार बड़े स्टार हैं तो जाहिर है उनकी फिल्म का प्रमोशन और रिलीज एक बड़े समारोह यानी इवेंट के समान है। लेकिन कम बजट में अस्मिता शर्मा द्वारा निर्मित व अभिनित गुटरूं गुटरगूंइस समस्या की हिन्दी की पहली फिल्म मानी जाती है। इस फिल्म में बिहार के जहानाबाद के एक गांव में महिलाओं के शौचालय जाने संबंधी सार्वजनिक समस्याओं को दिखाया गया था। पिछले साल इस फिल्म की चर्चा काफी हुई थी। और बिहार तथा राजस्थान में इसे टैक्स फ्री किया गया था। हाल में जब टॉयलेट एक प्रेम कथा की कहानी सामने आई तो गुटरूं गुटरगूंके निर्माताओं ने विषय व कहानी चोरी का मुद्दा उठाया, और कॉपीराइट उल्लंघन का विवाद भी हुआ। दरअसल प्रेम एक ऐसा विषय है जिसके कई आयाम हो सकते हैं। टॉयलेट एक प्रेम कथा में प्रेम कहानी के जरिये इस समस्या को हास्य व्यंग्य शैली में दिखाया गया है जबकि गुटरूं गुटरगूं की कहानी में सामाजिक फलक यथार्थवादी शैली में चित्रित है। जैसे कि ओ माई गॉड आने के बाद अगर पीके आती है तो वहां भी थीम की समानता चाहे तो चर्चा का विषय बन सकती थी। थीम की ऐसी समानताएं बॉलीवुड के लिए आम बात हैं।  
बहरहाल अब वह विवाद का मुद्दा खत्म हो चुका है और असली मुद्दा जहां सोच वहां शौचालय का बन गया है। लिहाजा समाज में स्वच्छता और बॉलीवुड में मौलिकता अगर बढ़ावा देना है तो ऐसे ही साहसी बदलाव अपेक्षित हैं। वरना बॉलीवुड का अपना शौचालय कभी बन नहीं पायेगा और ना ही सिनेकारों का कभी पाचन ठीक हो सकेगा। ज्यादातर खुले में ही कब्जियत के शिकार रहेंगे। वहीं अंग्रेजों को भी यह नहीं कहना पड़ेगा कि इंडिया इज़ ए स्टिल संडास कंट्री।‘ ###
  
(कॉपीराइट नियम के मुताबिक इस लेख को कहीं भी प्रकाशित करने के लिए पूर्वानुमति आवश्यक है। मेल करें-pictureplus2016@gmail.com)

2 टिप्‍पणियां:

  1. "रणवीर सिंह का नया वीडियो खून भरी मांग उनके साथ हीरोइन हैं फराह खान
    "
    "गोविंदा के इल्‍जामों पर वरुण धवन ने साधी चुप्‍पी कहा मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है
    "
    मामी ने दिखाया स्वर्ग का दरवाजा (Mammi Ne Dikhaya Swarga Ka Darwaja)
    "देश के सबसे अमीर अंबानी परिवार के बारे में ये सब नहीं जानते होंगे आप
    "
    इस महाराजा ने बनाया था क्रिकेट और पटियाला पैग का अनोखा कॉकटेल
    "आखिर क्यों ये लड़की रोज लगाती है शमशान घाट के चक्कर
    "
    "शादी से एक सप्ताह पहले मां बेटे के कमरे में गई तो पैरों तले खिसक गई जमीन
    "
    Antarvasna युवकों की आम यौन समस्यायें
    "इस तरह के कपड़े पहनना दरिद्रता को न्योता देता है
    "
    सलमान की खास दोस्त यूलिया ने किया एक और गाना रिकॉर्ड
    "वैलेंटाइन डे पर बेडरूम में बस रखें ये खास चीज और फिर देखें कमाल
    "






























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  2. रणवीर सिंह का नया वीडियो खून भरी मांग उनके साथ हीरोइन हैं फराह खान
    गोविंदा के इल्‍जामों पर वरुण धवन ने साधी चुप्‍पी कहा मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है
    मामी ने दिखाया स्वर्ग का दरवाजा (Mammi Ne Dikhaya Swarga Ka Darwaja)
    देश के सबसे अमीर अंबानी परिवार के बारे में ये सब नहीं जानते होंगे आप
    इस महाराजा ने बनाया था क्रिकेट और पटियाला पैग का अनोखा कॉकटेल
    आखिर क्यों ये लड़की रोज लगाती है शमशान घाट के चक्कर
    शादी से एक सप्ताह पहले मां बेटे के कमरे में गई तो पैरों तले खिसक गई जमीन
    Antarvasna युवकों की आम यौन समस्यायें
    इस तरह के कपड़े पहनना दरिद्रता को न्योता देता है
    सलमान की खास दोस्त यूलिया ने किया एक और गाना रिकॉर्ड
    वैलेंटाइन डे पर बेडरूम में बस रखें ये खास चीज और फिर देखें कमाल

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