'भूमि' की पृष्ठभूमि में यूपीवाला रेप कांड ! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शुक्रवार, 22 सितंबर 2017

'भूमि' की पृष्ठभूमि में यूपीवाला रेप कांड !

संजय दत्त के कमबैक की प्रमोशनल फिल्म है भूमि

संजय दत्त का एक्शन और अदिति राव हैदरी की भावुकता 'भूमि' में

फिल्म : भूमि  
निर्देशक: ओमंग कुमार
सितारे: संजय दत्त, अदिति राव हैदरी, शरद केलकर, शेखर सुमन
पिक्चर प्लस रेटिंग: 2.5 स्टार

'भूमि' में अदिति राव हैदरी 
भूमि फिल्म देखते हुये आपके जेहन में एक सवाल उठना चाहिये कि बलात्कार की कहानी दिखाने के लिए उत्तरप्रदेश की जमीन को क्यों चुना गया ? क्या किसी और प्रदेश की पृष्ठभूमि क्यों नहीं दिखाई जा सकती थी?  सवाल जरा बारीक है। हाल के सालों में उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि की के ताल्लुक रखती हुई जितनी भी फिल्में रिलीज हुईं उनमें पात्र यूपी के हुये, स्थानीय संस्कृति और लोक रिवाज को भी बखूबी दिखाया गया, वहां के बदलते समाज, बदलती व्यवस्था कहानी का आधार रही। लेकिन भूमि की पृष्ठभूमि में बलात्कार की कहानी का क्या आशय है? हालांकि पूरी फिल्म में इस आशय को कहीं भी व्याख्यायित नहीं किया गया है उस तरह से जिस तरह पिंक में इस सामाजिक अपराध को एक स्थानीयता के जस्टीफिकेशन का संकेत दिया गया था।
भूमि की कहानी उत्तर प्रदेश की आगरा की है। अरुण सचदेव यानी संजय दत्त जूतों की दुकान चलाता है। उसकी एक बेटी है भूमि यानी अदिति राव हैदरी। दोनों की अपनी आबाद दुनिया है। पिता अपनी बेटी की शादी की तैयारियां कर रहा है। लड़का भी देख चुका है लेकिन एक दिन जब पिता को पता चलता कि गांव के ही धौली यानी शरद केलकर और उसके तीन साथियों ने उसकी बेटी के साथ रेप किया है तो उसके भीतर बदले की आग सुलग उठती है। फिल्म में इस घटना के माध्यम से सामाजिक सोच को भी दिखाने का प्रयास किया गया है।  

'भूमि' का एक भावुक दृश्य
हालांकि बॉलीवुड में इस विषय पर तमाम फिल्में बन चुकी हैं। हाल ही में रवीना टंडन की मातृऔर श्रीदेवी की मॉम भी आ चुकी है।  संजय दत्त खुद भी साल 2002 में पिता जैसी फिल्म  कर चुके हैं जिसकी कहानी इस विषय से मिलती जुलती है। लिहाजा कहानी या स्क्रीन प्ले के नाम पर यह फिल्म बहुत निराश करती है।

हां, अगर कुछ देखने लायक है तो वह संजय दत्त का लार्जर दैन लाइफ कमबैक देख सकते हैं। बेटी के रूप में अदिति राव हैदरी ने अच्छा काम किया है। स्क्रीन पर पिता और पुत्री के भावुक रिश्ते को उत्तम तरीके से दिखाया गया है। दर्शकों का मन इन दृश्यों में रमता है। अगर आप संजय दत्त के फैन हैं तो यह फिल्म आपके लिए है वरना कुछ नहीं है। यहां तक कि मैरी कॉमजैसी फिल्‍म बनाने वाले ओमंग कुमार पर भी आपको हैरत होगी कि उन्होंने यह फिल्म क्यों बनाई? लेकिन आर्तर जुरावस्की के असर से कैमरा वर्क प्रभावशाली बन पड़ा है। संजय दत्त का एक्शन और एंगर देखने लायक है। लेकिन एक सवाल जो जेहन में बन जाता है वह यह कि रेप की कहानी के लिए यूपी की पृष्ठभूमि उस तरह क्यों जैसेकि कन्या भ्रूण हत्या से जुड़ी कहानी के लिए कोई हरियाणा की पृष्ठभूमि होती है? इस सवाल का जवाब अगर आपके पास हो तो जरूर दीजियेगा।  

पिक्चर प्लस समीक्षक (Contact - Email: pictureplus2016@gmail.com)

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