“चंद पैसों के लिए भोजपुरी सिनेमा को अश्लीलता से दूर रखना चाहिये” - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

“चंद पैसों के लिए भोजपुरी सिनेमा को अश्लीलता से दूर रखना चाहिये”

इंटरव्यू ऑन लोकेशन

भोजपुरी सिनेमा की नई पहचान अर्चना सिंह

'डमरू' फिल्म  का एक दृश्य, अभिनेत्री याशिका कपूर और अभिनेता पदम सिंह के साथ  अभिनेत्री अर्चना सिंह

यूपी/बिहार के छोटे शहर से निकली कोई लड़की हो और वह भोजपुरी फिल्मों में एक्टिंग करे-तो समझ लीजिये उसके आगे किस स्तर की मानसिकता को हर दम झेलने की चुनौती रहती होगी। लेकिन इस सोच-विचार को धता बताते हुये अभिनेत्री अर्चना सिंह ने भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी एक अहम पहचान बनाई है। अर्चना सिंह इन दिनों वाराणसी में अपनी अगली फिल्म डमरू की शूटिंग्स को लेकर व्यस्त हैं। बाबा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बन रही इस फिल्म के निर्माता हैं प्रदीप शर्मा, निर्देशक हैं रजनीश मिश्रा, अभिनेता हैं खेसारी लाल और अभिनेत्री हैं याशिका कपूर। इस फिल्म में अर्चना सिंह ठकुराइन की भूमिका निभा रही हैं। इसी मौके पर अर्चना सिंह से पत्रकार संतोष राय ने बात की, 
पेश हैं खास अंश...

शूटिंग्स के दौरान अर्चना सिंह

संतोष राय - शुरुआती समय में अगर लोगों को सफलता नहीं मिलती तो बहुत निराश हो जाते हैं पर आपके साथ तो गजब का संयोग रहा पहले पढ़ाई, फिर शादी, फिर बच्चे इन सबके बाद फिल्मों में करियर। इसके पीछे आपका जुनून था या महज संयोग?

अर्चना सिंह - सही बात है जब इंसान कोई काम शुरू करता है जो कि उसका पहला लक्ष्य था, उसे शुरू करने के बाद जब  सफलता नहीं मिलती है तो निराशा जरूर होती है। लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ, यह ऊपर वाले की कृपा थी। ऊपरवाले की दया थी मुझपर। मेरा जुनून था इसे संयोग नहीं कहा जा सकता। शादी से पहले मेरे मन में था कि अपने आपको बड़े पर्दे पर देखना है। मेरी दिली इच्छा थी कि फिल्मों में काम करूं। बिहार में जन्म, यहां का पालन पोषण होना और प्रोफेसर की बेटी होना; कुल मिलाकर यहां का परिवेश इजाजत नहीं दे रहा था उस समय कि आगे बढ़कर कोई ऐसा कदम उठाऊं। कहीं ना कहीं मेरे मन में भय था कि शादी के बाद मुझे काम नहीं करने दिया जाएगा! मैंने अपनी इच्छा को दबाकर रखा। शादी के बाद हसबैंड के सहयोग से ही मैंने फिल्मों में काम किया।

संतोष राय - पिता प्रोफेसर, पति डॉक्टर। इसके अलावा यूपी-बिहार के लोगों की लड़कियों को लेकर अलग सोच। यहां के लोग फिल्मों और उसमें काम करने वाले लोगों को दोयम दर्जे का मानते हैं, बावजूद इसके आप फिल्मों में आईं क्या परिवार में कभी कोई विरोध नहीं हुआ, कोई परेशानी नहीं हुई?

अर्चना सिंह - मेरा जन्म एक पढ़े लिखे परिवार में हुआ। बिहार के लोगों की मानसिकता ऐसी है कि आज भी गांवों तक में लोग फिल्मों में काम करने को लेकर अच्छा नहीं मानते। मेरी फैमिली के लोग जो पुराने ख्याल के हैं इस काम को अच्छा नहीं मानते। कई बार मेरे पिताजी और मेरे हसबैंड को इसकी शिकायत भी करते हैं। पर मुझे खुशी है कि मेरे हसबैंड ने फिल्मों में काम करने को लेकर कभी नहीं रोका। मेरा मानना है कि एक्टिंग एक कला है और किसी भी कला को अपनाकर इंसान आगे बढ़ सकता है। रहा सवाल बुराइयों का तो ऐसा कोई क्षेत्र नहीं रहा जहां बुराइयां ना हों। इंसान खुद में अगर अच्छा हो, खुद ठीक रहे, उसकी मानसिकता अच्छी है तो वह जरूर अच्छा काम करेगा। और अच्छा दिखेगा भी। मुझे लगता है कि मेरे करियर में बनस्थली विद्यापीठ का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान है। क्योंकि मेरे अंदर जो शक्ति है, वो कहीं ना कहीं कहीं मुझे लगता है मैं विद्यापीठ से लेकर ही आई थी।  

शॉट्स की तैयारी, अर्चना सिंह और याशिका कपूर

संतोष राय - पहली फिल्म आपको कैसे मिली? सुना है बहुत ही रोचक प्रसंग है पिक्चर प्लस के पाठकों को जरा बताएं।

अर्चना सिंह - पहली पिक्चर मिलना सचमुच मेरे लिए बहुत रोचक घटना है। जब मैंने पहली बार फेसबुक अकाउंट बनाया। फेसबुक के माध्यम से मेरी बहुत से लोगों से जान पहचान हुई। उसी क्रम में राजेश मिश्रा जी से मेरी जान पहचान हुई। उस समय मैं कोलकाता घूमने गई थी। पटना से साधना सिंह जी का फोन आया। उन्होंने बताया कि वह एक फिल्म बनाना चाहती हैं- साईं मोरे बाबा और उसमें एक किरदार है जो मेरी पर्सनाल्टी से मैच करता है। कोलकाता से वापस आने के बाद मैं उनसे मिलने पटना गई। जब उन्होंने दरवाजा खोला तो सबसे पहला वाक्य उनका यही था कि – यही तो मुझे चाहिए था। उनका यह वाक्य सुनते ही मुझे लगा कि जैसे मेरी किस्तम का दरवाजा खुलने वाला है! वहां मौजूद डायरेक्टर ने कहा – नहीं नहीं, रोल मेरे कैरेक्टर को बिल्कुल सूट नहीं करेंगा। क्योंकि रोल था निगेटिव और जबकि मेरा फेस और स्वभाव बिल्कुल पॉजीटिव फील देने वाला था। साधना जी ने डायरेक्टर की बात काटते हुए कहा कि नहीं नहीं हमें जो चाहिए हम इनसे निकलवा लेंगे। मेरी पहली पिक्चर साईं मोरे बाबा थी और उसमें मेरा बहुत ही दमदार और निगेटिव करेक्टर था। जो मुझे बहुत पसंद आया। काम करके मुझे बहुत मजा आया।

संतोष राय- आपने आधे दर्जन से अधिक भोजपुरी फिल्मों में काम किया है। किस फिल्म का कौन सा रोल आपके जेहन में हमेशा घूमता है और आपको खुशी दे जाता है?

अर्चना सिंह - मैंने बहुत सारी फिल्में की हैं। बहुत सारे किरदार निभाए हैं। एक आर्टिस्ट के लिए यह बोल पाना बहुत मुश्किल होता है कि कौन सा रोल उसके लिए बहुत अच्छा था। क्योंकि कोई भी आर्टिस्ट जिस भी रोल को करता है खूब इंज्वॉय करता है। उसके लिए हर रोल महत्वपूर्ण होता है। वह हर रोल में डूब जाता है। निगेटिव रोल मेरी पहली पसंद है। मुझे ऐसा रोल करने में मजा आता है जो मेरी पर्सनाल्टी से बिल्कुल उलटा हो, जिसे करने में बहुत मेहनत करनी पड़े।  

अभिनेत्री अर्चना सिंह
संतोष राय - भोजपुरी फिल्में या उसके गाने अश्लीलता के आरोप लेकर भी बदनाम हैं। क्या आपको नहीं लगता कुछ भी परोसने से भोजपुरी सिनेमा का नुकसान हो रहा है? भोजपुरी सिनेमा का भविष्य क्या लगता है?

अर्चना सिंह - आज जो फिल्में बन रही हैं अच्छे दर्जे की बन रही है। अच्छे डायरेक्टर बना रहे हैं। अच्छे कलाकार बना रहे हैं। भोजपुरी फिल्म का स्तर बहुत ऊपर उठा है। पूरे परिवार के देखने वाली फिल्में बन रही हैं और लोग देख भी रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा प्रोडक्शन की फिल्म बम बम बोल रहा काशी जिसमें मैंने राजमाता का रोल किया है। बहुत ही सराहनीय रोल है। बहुत ही अच्छी फिल्म है। और यह मल्टीप्लैक्स में भी लगी है। तो कहीं ना कहीं हम कुछ अच्छा कर रहे हैं। पर मुझे अफसोस उन लोगों पर जो भोजपुरी को गंदा बना रहे हैं। चंद पैसों के लिए अश्लीलता परोस रहे हैं। मैं उन लोगों से हाथ जोड़कर बिनती करती हूँ कि थोड़े से पैसों के लिए आप ये काम ना करें। भोजपुरी को बदनाम ना करें। अपनी संस्कृति के साथ खिलवाड़ ना करें। फूहड़ गाने ना बनाएं। मैं दर्शकों से भी विनती करती हूँ कि भोजपुरी में अच्छी फिल्में भी बनती हैं आप अपने परिवार के साथ उन्हें जरूर देखें।

संतोष राय - आपकी आने वाली फिल्में कौन कौन सी हैं? किस फिल्म को लेकर आप ज्यादा उत्सुक हैं? और हाँ, एक जरूरी सवाल यह कि हिंदी सिनेमा की तरफ जाने के बारे आपकी योजना?

अर्चना सिंह - मेरी बहुत सारी फिल्में आई हैं खोइंचा, मजनूँ मोटरवाला, औरत खिलौना नहीं, साईं मोरे बाबा अच्छी फिल्में रही हैं। मेरी आने वाली फिल्में हैं मेहँदी लगाकर रखना और शहंशाह रवि किशन जी के साथ। मैं अपने काम को लेकर बहुत व्यस्त हूं। हिंदी फिल्म की तरफ मैं अपना कदम बढ़ाऊंगी पर थोड़ा टाइम अपने परिवार को देना जरूरी है क्योंकि मेरा बेटा अभी छोटा है।
(साक्षात्कारकर्ता वरिष्ठ पत्रकार हैं। गाजियाबाद में निवास। संपर्क-9821396595)
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