'रांची डायरीज़' में दर्ज हैं छोटे शहरों के स्टगलर्स के सपने - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शुक्रवार, 13 अक्तूबर 2017

'रांची डायरीज़' में दर्ज हैं छोटे शहरों के स्टगलर्स के सपने

 पर्यटन के विकास के लिए झारखंड चला उत्तर प्रदेश की राह,
फिल्म को राज्य सरकार से मिली 1.75 करोड़ की सब्सिडी

फिल्म में 80 फीसदी कलाकार झारखंड के हैं

फिल्म : रांची डायरीज़  
निर्देशक : सात्विक मोहंती  
सितारे: सौंदर्या शर्मा, अनुपम खेर, जिमी शेरगिल,
हिमांश कोहली, ताहा शाह, सतीश कौशिक
पिक्चर प्लस रेटिंग : 2 स्टार

रांची डायरीज़ फिल्म देश भर में हिट हो या ना हो, लेकिन आज की तारीख़ में इस फिल्म के रिलीज होने के कई मायने हैं। अनुपम खेर को पुणे स्थित FTII का अध्यक्ष बनाया गया है और वो इसी फिल्म से बतौर प्रोड्यूसर डेब्यू भी कर रहे हैं।

दूसरी बात कि अनुपम खेर झारखंड फिल्म विकास निगम के अध्यक्ष भी हैं। इस फिल्म की नब्बे फीसदी शूटिंग्स झारखंड में की गई है। स्थानीय कलाकारों को मौका दिया गया है। फिल्म के जरिये झारखंड पर्यटन को बढ़ावा देने के मकसद से फिल्म निर्माण के खर्च में राज्य सरकार द्वारा पौने दो करोड़ की सब्सिडी दी गई है।

पिछले दिनों फिल्म के कलाकारों और प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुबर दास के साथ हुई एक बैठक के बाद अनुपम खेर ने कहा था कि फिल्म निर्माण के माध्यम से झारखंड में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने राज्य सरकार की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड में फिल्म नीति से कलाकारों और फिल्म निर्देशकों को काफी फायदा मिल रहा है।   
 
अनुपम खेर : अभिनय के साथ फिल्म का पहली बार निर्माण भी 
लेकिन एक बड़ा सवाल कि इस फिल्म में आखिर ऐसा क्या था कि अनुपम खेर ने इसे प्रोड्यूस करना चाहा? इसके जवाब में खेर का कहना था कि रांची डायरीज वास्तव में तीन चार लोगों के सपनों की दास्तान है। जब सात्विक मेरे पास स्क्रिप्ट लेकर आये तो उन्होंने बताया कि वे इस पर दो साल काम कर चुके हैं। मुझे स्क्रिप्ट बहुत पसंद आई और सबके किरदार भी अच्छे लगे। मैंने उनसे पूछा कि प्रोड्यूसर कौन हैं,  तो वो बोले कि प्रोड्यूसर तो अभी नहीं है। फिर मैंने और सात्विक ने मिलकर रांची में कुल चालीस दिनों तक अलग-अलग लोकेशन पर शूटिंग्स की। दर्सल यह फिल्म छोटे शहर की कहानी है जोकि मुझे पसंद आई। अक्सर छोटे शहर के लोग ही बड़े सपने देखते हैं।  
इसी दौरान अनुपम खेर ने यह भी कहा कि झारखंड में एक फिल्म सिटी भी होनी चाहिये ताकि यहां आने वाले लोगों को एक बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिल सके। प्रकृति ने यहां बेहतर लोकेशन पहले से दे रखे हैं। स्टूडियो बन जाए तो बहुत ही सहूलियत होगी। खेर ने कहा कि झारखंड में फिल्म उद्योग की भरपूर संभावनाएं हैं। गौरतलब है कि फिल्म में महज बारह कलाकार ही मुंबई के हैं और बाकी अस्सी फीसदी कलाकार झारखंड के हैं।  

कहानी  में क्या है?

सात्विक मोहंती मायफ्रेंड पिंटो और मेरठिया गैंगस्टर्स जैसी फिल्मों में  सहायक निर्देशक रह चुके हैं। इस फिल्म को उन्होंने लिखा भी है और निर्देशन भी किया है।

कहानी रांची की एक गायिका गुड़िया (सौंदर्या) की है जो पॉप गायकी में अपना नाम कमाना चाहती है। बाद में उसे मनीष यानी (हिमांश कोहली) और पिंकू (ताहा शाह) देते हैं, लेकिन ठाकुर भैया (अनुपम खेर) की एंट्री होने के बाद कहानी में कई उतार-चढ़ाव आने लगते हैं। यहां तक कि गुड़िया, मनीष और पिंकू एक बैंक को लूटने का भी प्लान भी बनाते हैं जिसके बाद पुलिस इंस्पेक्टर (जिम्मी शेरगिल) की एंट्री होती है।
 
'रांची डायरीज' की स्टारकास्ट के साथ अनुपम खेर
लेकिन अच्छा प्लाट, शानदार लोकेशन और सकारात्मक मकसद होकर भी फिल्म मनोरंजन करा पाने में सक्षम साबित नहीं होती क्योंकि स्क्रीनप्ले पर मेहनत नहीं की गई है।

बहरहाल रांची डायरीज एक नई उम्मीद की किरण जरूर है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर काम करने वाले कलाकारों को आगे बढ़ने का नया रास्ता दिखेगा। यूपी, एमपी के तर्ज पर अब झारखंड पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां फिल्म निर्माण में वित्तीय छूट दी जा रही है। इससे छोटे शहर में रहकर सपने देखने वालों की राह आसान हो सकती है लेकिन प्रतिभा, मेहनत और रचनात्मकता की कसौटी पर सबको खरा उतरना होता है। रांची डायरीज राष्ट्रीय स्तर पर चले ना चले, स्थानीय कलाकारों में यह नया हौसला तो जरूर भर देगी।

समीक्षक, पिक्चर प्लस (Email:pictureplus2016@gmail.com)

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