TVपुर की TRP का खेल है अजब ग़ज़ब - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

शनिवार, 14 अक्तूबर 2017

TVपुर की TRP का खेल है अजब ग़ज़ब

KBC के कंधे पर चढ़कर SONY टीवी कब तक बना रहेगा नंबर वन?
 
बिग बी और केबीसी के दो कंधों पर सवार होकर सोनी टीवी बना नंबर एक
हमारे टेलीविज़न की हालत उस सांप छछूंदर जैसी हो गई है जिसे निगलते भी नहीं बनता और उगलते भी नहीं बनता।
इस समय देश में राजनीति के प्रोग्राम भी न्यूज चैनेलों पर डेली सोप की तरह चलते रहते है। और साथ ही हमारा सोशल मीडिया भी टेलीविज़न से कम नहीं है।
सबकी एक ही प्रॉब्लम है कि वो हर रोज़ सनसनीखेज खबर कैसे और कहां से लायें?
लोगों के घरों में एक इलेक्ट्रॉनिक पर्दा लगा है।
सबसे पहले बात करते है सीरियलों की। इसी पर्दे पर एक रियलिटी शो आता है बिग बॉस। जिसकी चाहे जो भी टीआरपी हो, पर ऑनलाईन न्यूज़ में उसकी बड़ी धूम है। इसमें हर आदमी फेमस होने के लिए सिर्फ़ गालियां बक रहा है। और उसी जगह KBC है, जिसने खुद को नंबर वन बना रखा है। दूसरी तरफ़ सीरियलमेकर्स यही समझ नहीं पाते कि वो रोज रोज एक ही बात को कितनी बार दोहरायें! तो वो पुराने पात्र को मार के उन्हीं कलाकारों को नये पात्रों की तरह प्रस्तुत कर देते है। अभी अभी एक पुराना चैनल नये रंग में आया है स्टार भारत। वो अपने पांच सीरियलों के साथ मैदान में है, पर उसका भला नहीं हो पा रहा। और एक सोनी टीवी है, जिसको यही गुमान है कि वो भी स्टार प्लस की तरह KBC के सहारे कुछ बन जायेगा। पर हर बार KBC हिट हो जाता है, और चैनल वहीं का वहीं रह जाता है। कभी कभी ज़ी टीवी और
&टीवी, किसी किसी सीरियल को लेकर ज़ोर मारते रहते हैं। पर वो भी एक दो हफ्ते की कहानी बन कर रह जाते हैं। इन सबमें दर्शकों का, अपना सहयोग बहुत भरपूर होता है। क्राइम पर आने वाले सीरियलों की TRP में न्यूज चैनलों ने चोंच मार दी है। और वो भी अब घर के ड्राईंग रूम में अपनी जगह बना चुके हैं।
 
'बिग बॉस' में रोज के लफड़े रोज के झगड़े बढ़ाते हैं TRP
आईये, अब न्यूज चैनलों के सीरियल पर भी एक नज़र डालें। न्यूज चैनलों की गिनती मनोरंजन चैनलों की गिनती से कई गुना ज्यादा है। इसीसे साबित होता है कि अब घरेलू सीरियल मनोरंजन के चैनलों से खिसक कर न्यूज चैनलों पर आने लगे हैं। एक न्यूज चैनल ने धार्मिक चैनलों से होड़ लगा रखी है। वो आजकल पूरे देश में भगवान राम के पदचिन्ह खोज रहा है। तो दूसरा अयोध्या में राम की बनने वाली मूर्ति के पीछे पड़ा है। इस पर एक बड़ी पुरानी कहावत है “सूत ना कपास कोरी में, लठ्ठम लठ्ठा”। जब न्यूज चैनल अपनी 100 या 200 खबरें एक साथ देते हैं, तो बेचारे अपना नंबर पूरा करने के चक्कर में एक ही खबर की चार लाइनें अलग-अलग नंबर डाल कर दे देते हैं। उसके बाद भी नंबर बच जाते हैं, तो गली मुहल्लों की खबर को नेशनल न्यूज की तरह देने लगते हैं, फिर भी नम्बर बच जाते है तो पुरानी खबरें डालने लगते हैं। यानी इनकी भी हालत मनोरंजन चैनल वालों की तरह ही है, कि दिन में एक दो टॉपिक के बाद, कुछ नहीं बचता तो अंट संट बकते रहते हैं। इनका बस चले तो किसी नेता को मार के फिर ज़िंदा भी करने लगें। इन न्यूज चैनलों पर हम फिर कभी विस्तार से बात करेंगे। अभी आगे बढ़ते हैं।
 
ज़ीटीवी की किस्मत 'कुमकुम भाग्य'
अब बारी है सोशल मीडिया की। ये भी सीरियल की घिसी पिटी चाल पर चलता है। एक ही जोक या एक ही मैसेज बार बार गिरता रहता है। इसमें भी लोग ये नहीं देखते हैं कि वो क्या भेज रहे हैं, बस भेजे जा रहे हैं। इस पर सीरियल और न्यूज़, दोनों का ही बाज़ार गर्म रहता है। एक मोदी अंधभक्त है और दूसरा मोदी अंधविरोधी है। इसे राजनैतिक ना मानें, इसे सिर्फ़ उंगली की एक्सरसाइज माने। देश का शहरी युवा बेरोजगार है, उसके पास काम नहीं है, इसीलिये वो मोबाइल में घुसा रहता है। और कभी कभी तो अपनी ज़िंदगी से इतना बेज़ार हो जाता है, कि इसी मोबाइल के चक्कर में सड़क पर लड़-भिड़ कर घायल हो जाता है। आप किसी को बुलाते रहें, लेकिन वो आपकी बात तब तक नहीं सुनता, जब तक वो अपना मैसेज ना भेज ले।

इन सब बातों ने हमें एक ऐसी काल्पनिक दुनिया में पहुंचा दिया है, जहां हमारे लिए ना रिश्तों की अस्लियत माने रखती है, और ना ही आस-पास घटने वाली बातों की सच्चाई का पता चलता है। बस हम बकर-बकर किये जा रहे हैं।

-गौतम सिद्धार्थ (लेखक फिल्म निर्देशक और स्क्रीनराइटर हैं। मुंबई में निवास।)

Email : pictureplus2016@gmail.com

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad