‘रूट’ से बदलेगा भोजपुरी सिनेमा का रुख़ - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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मंगलवार, 12 दिसंबर 2017

‘रूट’ से बदलेगा भोजपुरी सिनेमा का रुख़

भोजपुरी की पहली कला फिल्म मानी जा रही है रूट
 
 
क्षेत्रीय फ़िल्‍म इंडस्‍ट्री में व्यावसायिकता का चलन ज्‍यादा है। और बात जब भोजपुरी सिनेमा की शुरू होती है तो यह चलन कुछ ज्यादा ही नजर आता है।  बावजूद इसके कुछ रीजनल फिल्‍ममेकर्स कला फिल्‍में भी बनाने का साहस रखते हैं। मराठी में ऐसी कोशिशें खूब होती हैं। अब भोजपुरी में आशीष मिश्रा ने एक लीक से हटकर फिल्म बनाई है, जिसका नाम है-रूट। इस फिल्‍म को अभी हाल ही छठे दिल्‍ली इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में बेस्‍ट रीजनल सिनेमा का अवॉर्ड भी दिया गया है। इससे पहले रूट को शान-ए-अवध:लखनऊ दस्‍तक में भी बेस्‍ट रीजनल फिल्‍म के लिए चुना गया था और अब दरभंगा फिल्‍म फेस्टिवल में यह फिल्‍म दस्‍तक देने वाली है।
पेंटिंग्स के शौकीन आशीष मिश्रा ने इस फिल्‍म को उन युवाओं को ध्‍यान में रखकर बनाया है, जो भोजपुरी पृष्ठभूमि से आते हैं, मगर कॉमर्शियल भोजपुरी सिनेमा में दिखाई देने वाली फूहड़ता के चलते वे फिल्‍म नहीं देखते हैं। वैसे बोल्‍ड मोंक पिक्‍चर्स के बैनर तले बनी फिल्‍म रूट भोजपुरी की पहली समानांतर फिल्‍म है, जोकि गंभीर विषय पर बनी है। इस फिल्‍म की एक और खासियत यह है कि फिल्‍म की भाषा भोजपुरी है, मगर पूरी फिल्‍म बैंगलोर में बनी है।  


फिल्‍म की कहानी दो यूथ की है, जिसमें वे एक-दूसरे से प्‍यार करते हैं। मगर किसी वजह से स्थिति ऐसी बनती है कि वे एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं। फिर दोनों की मुलाकात अचानक बैंगलोर में होती है। फिल्‍म का क्‍लाइमेक्‍स दिल को छू लेने वाला है। फिल्‍म में नमित तिवारी और रुचि मिश्रा ने काबिले तारीफ अभिनय किया है। रूचि मिश्रा की यह पहली फिल्‍म है।
आशीष मिश्रा वाराणसी के रहने वाले हैं, हालांकि  उनका जन्‍म मुंबई में हुआ। रूटके बारे में उनका है कि उन्‍होंने नए फ्लेवर और नए बैकग्राउंड स्‍कोर के साथ इस फिल्‍म को बनाया है। वे बताते हैं भोजपुरी उन्‍हें बचपन से आ‍कर्षित करती है और उनके घर में भोजपुरी भाषा खूब बोली जाती है लिहाजा भोजपुरी से उनका लगाव हो गया। फिर सोशल मीडिया पर भोजपुरी फिल्‍मों के बारे बहुत कुछ पढ़ा लिखा। आशीष का कहना है–‘क्‍योंकि भोजपुरी से मुझे लगाव रहा है और भोजपुरी सिनेमा के बारे में जानकर मुझे बुरा लगा तो मैंने उसे कोसने की जगह एक ऐसी लकीर खींचने की ठानी, जो लोगों को प्रेरित कर सके।  
रूटमें एक ग़ज़ल भी है, जिसे अनुराग मोहन ने गाया है। इसे लोगों ने काफी पसंद किया है। वहीं, मराठी संगीतकार ओमकार गोखले ने फिल्‍म में संगीत दिया है। बता दें कि आशीष फिल्‍म रूटके लेखक, निर्देशक और प्रोड्यूसर भी हैं। इससे पहले वो 1984 के दंगे पर आधारित फिल्‍म लुकाछिपी’, स्‍कूल में कम मार्क्‍स आने पर स्‍टूडेंड के बारे में सुसाइड से पहले की हालत पर आधारित बिफोर द लास्‍ट डेथजैसी सराहानीय फिल्‍में बना चुके हैं।
-कल्पना कुमारी

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