बुंदेलखंड की धधकती धरती की एक और सुलगती कहानी है फिल्म ‘तिल्ली’ - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

सोमवार, 25 दिसंबर 2017

बुंदेलखंड की धधकती धरती की एक और सुलगती कहानी है फिल्म ‘तिल्ली’

किसानों की समस्या को बुनियादी तौर पर उठाने का प्रयास 
 
तिल्ली की भूमिका में  बाल कलाकार रिज़वान शेख
संसद में बुंदेलखंड के किसानों का दर्द रणनीतिकारों को परेशान करे ना करे सिल्वर स्क्रीन पर सुनहरे सपने रचने वालों को यहां की समस्या की फिक्र जरूर होने लगी है। बुंदेलखंड की प्यासी-सूखी धरती, अन्न-पानी को मोहताज किसानों का जीवन अब सिनेमा की कहानी बनने लगा है। हिन्दी फीचर फिल्म तिल्ली का ट्रेलर देखने पर कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है। कुदरत के कहर से किसानों की मौत का सिलसिला यहां थम ही नहीं रहा है। ना धरती पर हरियाली, ना आसमान में काले बादल। ना घर में अनाज, ना पेट में दाने। 
फिल्म की कहानी एक मासूम और डाकिये के साथ-साथ आगे बढ़ती है। बारह साल के एक बच्चे के नजरिये से किसान और परिवेश की समस्या को सामने रखा गया है। बच्चा आपदा पीड़ित किसान का बेटा है, उसका नाम ही तिल्ली है। इस किरदार को रिजवान शेख ने निभाया है।
कहानी वास्तविक सी लगती है। गरीबी से तंग आकर गांव के कई बच्चों के पिता फांसी लगा लेते हैं तो इस बच्चे को भी भय होता है कहीं उसका पिता भी खुदकुशी ना कर ले! इसलिए वह सारी रस्सियों की जला देता है यहां तक कि पेड़ों पर लगे झूले को भी। पढ़ाई में फिसड्डी और घर से लापरवाह रहने वाला तिल्ली पिता के प्रति भावुक हो जाता है। फिल्म में डाकिये की भूमिका निभाई है लोकप्रिय अभिनेता अतुल श्रीवास्तव ने। फिल्म में अन्य मंझे हुये जाने-माने कलाकार रघुवीर यादव और नीरज पांडे भी दमदार किरदार में नजर आते हैं।

डाकिये की भूमिका में अतुल श्रीवास्तव
अतुल श्रीवास्तव का कहना है- मेरा किरदार डाकिया का है लेकिन यह कहानी का सूत्रधार है, बल्कि कहना चाहिये कि यह डाकिया देश के किसानों की समस्या का सूत्रधार है।
यह फिल्म चंडीगढ़ के बीटीएम प्रोडक्शन ने बनाई गई है। निर्देशन किया है पंजाबी फिल्मों निर्देशक सागर शर्मा ने, जोकि हिंदी में पहली फिल्म लेकर आ रहे हैं।
तिल्ली का मतलब माचिस की तीली भी होता है। कहने का आशय यह कि बुंदेलखंड में धरती पर तीली सुलग रही है। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो ये तीली कहीं जंगल में आग की तरह पूरे परिवेश को ही न ध्वस्त कर दे!  
फिल्म में लोकप्रिय गायक कैलाश खेर ने भी गीत गाया है। कैलाश खेर का इस फिल्म के बारे में कहना है—किसान की समस्या पर आधारित यह फिल्म काफी महत्वपूर्ण इसलिये भी है कि इसमें पिता-पुत्र का कनेक्शन दिखाया गया है जोकि हम सबको भावुक बनाता है। इसी आशय का मैंने एक गीत भी गाया है। यह फिल्म अच्छी नीयत और बेहतर सोच के साथ बनी है इसलिये ग्लैमर के बिना भी यह लोगों को पसंद आयेगी।
आपदा पीड़ित किसान की भूमिका में रघुवीर यादव 
गौरतलब है कि बुंदेलखंड के किसानों की समस्या पर हाल ही में एक फिल्म कड़वी हवा आई है। इसमें भी किसानों की आत्महत्या का मुद्दा जोर शोर से उठाया गया है। हालांकि कड़वी हवा क्लाइमेट चेंज को फोकस करते हुये किसान समस्या उठाती है। देखना होगा तिल्ली कड़वी हवा से कितना भिन्न प्रभाव उत्पन्न करती है?
-संजीव श्रीवास्तव
संपर्कpictureplus2016@gmail.com


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad