'कालाकांडी', '1921' और 'मुक्काबाज' तीनों फिल्में मिलकर भी 'टाइगर जिंदा है' को परास्त नहीं कर सकीं... - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

'कालाकांडी', '1921' और 'मुक्काबाज' तीनों फिल्में मिलकर भी 'टाइगर जिंदा है' को परास्त नहीं कर सकीं...


तीन हफ्ते बाद भी बॉक्स ऑफिस पर टाइगर...’ ही दहाड़ रहा है। इस बीच कई फिल्में रिलीज हुईं लेकिन सलमान के टाइगर... की राह का रोड़ा बनने में नाकाम ही रहीं। सलमान का जलवा बरकरार है।
 कालाकांडी
अक्षत वर्मा रामगोपाल वर्मा नहीं हैं कि उनका फ्लॉप भी चर्चा हासिल कर लेगा। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि साल 2011 में डेल्ही बेली जैसी सफल फिल्म की कहानी लिखने वाले अक्षत वर्मा ने कालाकांडी के तौर पर एक प्रयोगवादी फिल्म बनाने का प्रयास किया है। फिल्म का बैकग्राउंड मुंबई महानगर है इसके चलते फिल्म के ज्यादातर पात्र हिन्दी के साथ-साथ अधिकाधिक अंग्रेजी में भी बोलते हैं। लिहाजा आम दर्शकों से फिल्म कट जाती है। लेकिन अपने जॉनर में फिल्म की भाषा उचित है। सैफ अली खान, विजय राज तथा दीपक डोबरियाल ने बेहतर अभिनय किया है।
1921
इस फिल्म को विक्रम भट्ट ने लिखा है, निर्देशित और प्रोड्यूस भी किया है। विक्रम भट्ट के बारे में जाना जाता है कि वो हॉरर को मॉडर्न तरीके से प्रस्तुत करने में माहिर हैं। लेकिन '1921' में हॉरर को वो नया लुक नहीं दे पाये हैं। ना तो 'राज़' की तरह प्रेम कहानी और ना ही गीत-संगीत। फिल्म में करण कुंद्रा और ज़रीन खान का रोमांस थोड़ा बहुत पसंद आ सकता है लेकिन डरावने दृश्य बनाने में विक्रम भट्ट इस बार चूक गये हैं। दृश्यों के रेट्रो बनाने के बजाय डार्क बनाते चले गये हैं।
मुक्काबाज
इन दोनों फिल्मों से अलग है मुक्काबाज। इस फिल्म को अनुराग कश्यप ने निर्देशित किया है। लेकिन फिल्म देखने पर अनुराग की शैली और भाषा नदारद है। ना तो डार्क किरदार है और ना ही अपराध की अंधेरी गलियां। यहां बरेली की बर्फी नहीं है बल्कि बरेली का बॉक्सर है। एक खिलाड़ी की जिंदगी के उतार-चढ़ाव को दिखाया गया है। जिसके बहाने राजनीतिक प्रभाव और उससे जुड़े किरदारों को भी दिखाया गया है। फिल्म की कहानी की पृष्ठभूमि उत्तर प्रदेश की है लिहाजा यहां राजनीति के साथ-साथ जात-पात को भी दिखाया गया है। फिल्म में बॉक्सर के रूप में विनीत कुमार सिंह और राजनेता के रूप में जिम्मी शेरगिल ने तारीफ के योग्य काम किया है।
कुल मिलाकर कमजोर कहानी और बेजा प्रयोग के चलते ये तीनों ही फिल्में दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने में नाकाम साबित हो रही हैं। ऐसे में बॉक्स ऑफिस फिलहाल टाइगर जिंदा है के हवाले ही है। टाइगर का ये नशा तब उतरेगा जब अगले हफ्ते पदमावत और पैडमैन रिलीज होगी।
-कल्पना कुमारी
Email: pictureplus2016@gmail.com

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