गजेंद्र चौहान FTII से हटने के बाद क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

गजेंद्र चौहान FTII से हटने के बाद क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं?

जल्द ही मेरी तीन फिल्में रिलीज होने वाली है।
अभिनय और सियासत के बीच संतुलन बनान मुझे आता है।
 
अभिनेता और FTII के पूर्व चेयरमैन गजेंद्र चौहान
खास मुलाकात गजेंद्र चौहान का साथ

फिल्म अभिनेता गजेंद्र चौहान को 'महाभारत' सीरियल में 'युद्धिठिर' की भूमिका करके जितनी लोकप्रियता मिली, उससे कहीं ज्यादा चर्चा FTII  का येचरमैन बनके हासिल हुई। अब क्या कर रहे हैं गजेंद्र चौहान, इस बारे में उनसे विस्तार से बात की वरिष्ठ पत्रकार संजय सिन्हा ने

सवाल - भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में आपने लंबा रास्ता तय किया है, इस सफ़र से आज कितना संतुष्ट हैं आप?
जवाब - मैं पूरी तरह संतुष्ट हूं। इस सफ़र ने बहुत कुछ सिखाया है। अच्छे और बुरे, हर तरह के लोग मिले। मैंने सभी से कुछ न कुछ सीखा। मैं अपने आप को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे बहुत कुछ मिला। कुल मिलाकर मैं संतुष्ट हूं।

सवाल - आगे क्या करना चाहते हैं?
जवाब - अभी तो बहुत कुछ करना है। सच तो ये है कि कलाकार कभी संतुष्ट नहीं होता। वह हर पल कुछ नया करना चाहता है और इसी सोच के तहत वह बेहतर कर जाता है। मैं भी कुछ और बेहतर करना चाहता हूं।

सवाल - आप तो राजनीति में भी हैं। एक तरफ राजनीति और दूसरी तरफ अभिनय। कैसे मैनेज कर पाते हैं आप? आमतौर पर इंसान एक क्षेत्र को ही अच्छी तरह संभाल नहीं पाता। अपने इस विशेष 'हुनर' के बारे में जरा बताएं।
जवाब- जी ज़रूर। मैं शुरू से ही 'टाइम मैनेजमेंट' का मुरीद रहा हूं। सख्ती से मैं इसका निर्वाह करता हूं। अगर किसी से शाम के तीन बजे मिलने का अपॉइंटमेंट है तो मेरी कोशिश ये रहती है कि तीन बजे ही उनसे मिलूं। यही वजह है कि राजनीति और एक्टिंग, दोनों को पर्याप्त समय दे पाता हूं। कभी-कभी दुश्वारियां भी होतीं हैं, मगर उसे चुनौती समझकर झेलना पड़ता है। मैं 2004 में ही पॉलिटिक्स में आ गया था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी मुझे राजनीति में लेकर आए। तब से आज तक भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस से सक्रियता से जुड़ा हुआ हूं। आपको बता दूं कि शुरुआत मैंने मेडिकल के क्षेत्र से की थी। मैं सिटी स्कैन ऑपरेशन का विशेषज्ञ भी हूं, लेकिन बाद में मेरा यह 'फेस' लुप्त हो गया। मैं पॉलिटिक्स और एक्टिंग में व्यस्त हो गया। अब इन दोनों क्षेत्रों में ही बेहतर काम करना है।
 
गजेंद्र चौहान के साथ पत्रकार संजय सिन्हा
सवाल - आपको एफटीआईआई  का चेयरमैन भी बनाया गया था। फिर अचानक यह पद आपसे वापस ले लिया गया। कोई टिपण्णी?
जवाब - मैं एक साल दो महीने तक चेयरमैन के पद पर रहा और इस दौरान  मैंने बहुत सारे अच्छे कार्य भी किए। आपको बता दूं कि मैं एक ज़िम्मेदार व्यक्ति हूं। अपनी ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाता हूं। अपने इस किरदार को भी मैंने दिल से निभाया। भविष्य में भी सरकार अगर कोई ज़िम्मेदारी देती है तो मैं बेहतर तरीके से ज़रूर निभाउंगा।

सवाल - संजय लीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावतको लेकर  कुछ कहना चाहेंगे?
जवाब - दरअसल यह फिल्म भावना और कानून के बीच फंसी थी। जीवन में भावनाओं का भी विशेष महत्व होता है। जब समाज किसी चरित्र को मां के रूप में देखता है तो उसे फिल्मों के माध्यम से गलत तरीके से पेश करना गलत है। कानून भी भावनाओं को महत्व देता है। इस फिल्म में भी ऐसा ही कुछ है. फिल्म बनाने से पहले संजय लीला भंसाली को राज घराने से संपर्क करना चाहिए था। अगर उन्होंने पहले ही संपर्क कर लिया होता तो ये नौबत नहीं आती। मैंने भी राजस्थान की संस्कृति को नज़दीक से देखा है। मैंने कई राजस्थानी फिल्मों में भी काम किया है। दरअसल ' घूमर नृत्य' का मतलब है  घूंघट में नृत्य करना। यह नृत्य शैली 19 वीं सदी में चलन में आई, जबकि फिल्म की कहानी 13 वीं सदी की है। उस वक्त घूमर की प्रथा थी ही नहीं। अगर संजय लीला भंसाली पहले ही जानकारी ले लेते तो परेशानी कभी नहीं आती। पहली बार मैंने फिल्म का प्रोमो देखा था। तभी मैंने कह दिया था कि फिल्मकार को राज घराने से मिलना चाहिए। इसके बावजूद राजघराने से संपर्क नहीं किया गया। इतिहास की चीज़ों को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं करना चाहिए। अगर आपकी कहानी इतिहास से सम्बंधित नहीं है तो आप डिसक्लेमर डाल सकते है। आप स्पष्ट  कीजिए कि आपकी कहानी काल्पनिक है,लेकिन गुलाब का नाम गेंदा रखने से वह गेंदा तो नहीं हो जाएगा। बाद में इन्हीं चीज़ों को मैनेज किया गया।  

सवाल - आपने तो सैंकड़ों फ़िल्में की है। टीवी धारावाहिकों में भी काम किया है। इन दिनों अभिनय के क्षेत्र में किस तरह की गतिविधि चल रही है आपकी?
जवाब - मेरी तीन फ़िल्में शीघ्र ही रिलीज़ होने जा रहीं हैं। इन फिल्मों में आप मुझे देख पाएंगे। एक फिल्म 'दंगा-1946' अभी-अभी सेंसर बोर्ड से निकली हैं। जल्दी ही रिलीज़ होगी। इसमें मैंने श्यामा प्रसाद मुख़र्जी का किरदार निभाया हैं। 1946  के दंगे पर आधारित हैं यह फिल्म। दूसरी फिल्म एक बीएसएफ अफसर की कहानी हैं। रिटायरमेंट  के बाद वह सामाजिक कार्य करता हैं। तीसरी फिल्म अर्ध्य पौराणिक हैं। इसकी भी स्टोरी काफी अच्छी हैं। इसके अलावा राजनीति में भी सक्रिय हूं।

सवाल - नवोदित कलाकारों के लिए क्या कहना चाहेंगे?
जवाब - अपने आप को तैयार रखना होगा। मेहनत और लगन के साथ आगे बढ़ना   होगा। इसके बिना सफलता मुश्किल हैं।

संपर्क – pictureplus2016@gmail.com

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