यूपी के किस बाहुबली नेता के घर छापेमारी की साहसी कथा है फिल्म 'रेड'? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

शनिवार, 17 मार्च 2018

यूपी के किस बाहुबली नेता के घर छापेमारी की साहसी कथा है फिल्म 'रेड'?


फिल्म समीक्षा
 
अजय देवगन इससे पहले भी कई फिल्मों में जांबाज़ और कड़क अफ़सर के रोल में दिख चुके हैं, लेकिन कितनी अलग है यह भूमिका, पढ़िए इस समीक्षा में...


टाइटल - रेड
निर्देशक - राजकुमार गुप्ता
सितारे - अजय देवगन, इलियाना डिक्रूज, सौरभ शुक्ला, पुष्पा सिंह
रेटिंग – 2.5 स्टार
अजय देवगन 'रेड' फिल्म में
*रवींद्र त्रिपाठी
जो लोग मसाला फिल्मों के शौकीन हैं और जो अजय देवगन के फैन हैं उनको `रेडअच्छी लग सकती है। ये बात अलग है कि इसमें मसाला उस तरह का नहीं है जैसा अजय देवगन की हालिया फिल्मों में रहा है। जैसे `सिंघम या `सिंघम रिटर्न्स या  अन्य फिल्मों में। हो भी नहीं सकता था क्योंकि रेड नाम की इस फिल्म में वो पुलिस अफसर नहीं बल्कि आयकर अधिकारी बने हैं। ऐसा आयकर अधिकारी जो कालेधान वालों के यहां छापे मारता है और इसीलिए किसी भी पोस्टिंग पर महीने-दो महीने से ज्यादा नहीं टिक पाता। बहुत जल्दी उसकी बदली हो जाती है। किसी नए शहर में।
फिल्म की कहानी  
`अजय देवगन ने इसमें अमय पटनायक नाम के जिस आयकर अधिकारी की भूमिका निभाई है वह लखनऊ के आसपास के एक नेता रामेश्वर सिंह (सौरभ शुक्ला) के यहां छापा मारता है। रामेश्वर सिंह सांसद हैं और राज्य यानी उत्तर प्रदेश के कई विधायक उसके समर्थक हैं। उसकी एक बड़ी हवेली है जिसका नाम ह्वाइट हाउस है। कोई सरकारी कर्मचारी उसके घर में प्रवेश नहीं कर पाता। डर के मारे। अब ऐसे शख्स के यहां छापा मारना तो हिम्मत का काम है। जोखिम का भी। पटनाटक जोखिम मोल लेता है। रामेश्वर सिंह अपने खेल खेलता है। वह पटनायक की पत्नी (इलियाना डिक्रूज) पर कुछ गुंडों के द्वारा हमला भी करवाता है। पटनायक और दफ्तर के साथियों की जान पर भी बन जाती है। लेकिन ये कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी टस से मस नहीं होता। पर रामश्वर भी चाल चलने में माहिर है। तो कौन जीतेगा?  छापा मारनेवाला या जिसके घर पर छापा पड़ा है वह?
अजय देवगन और इलियाना डिक्रूज
अजय देववन की फिल्म होते हुए भी इसमें किसी तरह का एक्शन नहीं है। यानी मारधाड़ बहुत कम है। हां, कुछ गोलियां चलती हैं और भीड़ के हिंसक होने के भी कुछ दृश्य हैं। पर फिल्म मुख्य रूप से दो शख्सियतों के बीच तनाव की है। घाघ रामेश्वर और ईमानदार अफ़सर के बीच। हां, एक रहस्य की कुंजी जरूर है जो जिसका पता आखिर में चलता है कि पटनायक को रामेश्वर सिंह के यहां मौजूद काले धन की जानकारी किसने दी। क्या कोई घर का भेदिया है यानी विभीषण?  विभीषण वाला रहस्य आखिर तक है। दर्शक के जान लेता है लेकिन रामेश्वर ये कभी नहीं जान पाता कि कि उसके घर में कौन विभीषणबाजी कर रहा था (या कर रही थी) और क्यों?
कैसी बनी है फिल्म ?
ये जरूर है कि फिल्म बीच में कुछ धीमी हो जाती है। दर्शक बड़ी देर तक ये सोचता रहता है कि छापा कितनी देर का है। छापे के दृश्यों को कुछ और रोचक बनाया जा सकता था। पर जिन दृश्यों में रामेश्वर या उसकी अम्मा नहीं है वे कुछ कम रोचक हैं। फिल्म में गाने डालने की कोई जरूरत नहीं थी। वो भी रोमांटिक गाने। जब हीरो हीरोइन के बीच रोमांटिक पहलू पर फिल्म का जोर ही कम है तो ऐसे गाने डालने की क्या आवश्यकता जो याद न रहें और फिल्म की गति को भी रोकें। फिर भी अजय देवगन की संजीदा भूमिका और सौरभ शुक्ला के खुर्राट और निर्दयी नेता वाले रोल के कारण `रेड में टकराहट बनी रही है। फिल्म की अभिनेत्री इलियाना डिक्रूज सिर्फ एक भली पत्नी होने तक सीमित रहती है। उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं है। सिवाय इसके कि डरी रहें क्योंकि पति हमेशा बदमाशों से पंगे लेता है।
अजय देवगन और सौरभ शुक्ला
कितनी रीयल है कहानी ?
इस फिल्म के आरंभ में ही कहा गया है कि ये कुछ सच्ची घटनाओं पर आधारित है। और इसमें घटी घटनाओं का जो समय रखा गया है उससे लगता है कि सारा मामला पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल का है। प्रधानमंत्री का जो किरदार है उसकी आकृति और वेशभूषा इंदिरा गांधी से मिलती जुलती है। लेकिन उनका नाम कहीं नहीं है। सिर्फ संकेत है।
 *(लेखक प्रख्यात कला समीक्षक एवं समालोचक हैं। दिल्ली में निवास।
संपर्क – 9873196343)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad