'एक दो तीन...' में जैकलीन ; सोने के नाम पर पीतल बेचने की कोशिश - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शुक्रवार, 23 मार्च 2018

'एक दो तीन...' में जैकलीन ; सोने के नाम पर पीतल बेचने की कोशिश

माधुरी की मोहकता Vs जैकलीन का जिस्म

सिनेमा की बात
*अजय ब्रह्मात्मज / संजीव श्रीवास्तव
 
'तेजाब' फिल्म के गीत 'एक दो तीन...' के रीमेक पर उठे विवाद
संजीव श्रीवास्तव : ‘तेज़ाब फिल्म के मशहूर गीत एक दो तीन... के रीमिक्स वर्जन पर उठे विवाद को कितना जायज़ मानते हैं आप ? क्या हमें इस मुद्दे पर थोड़ा उदार होकर नहीं सोचना चाहिए?
अजय ब्रह्मात्मज : बहुत अच्छा सवाल किया है आपने। लेकिन एक दो तीन...गाने के नए वर्जन को देखकर बड़ा झटका लगता है। दरअसल पहले वाले गीत में माधुरी दीक्षित के अंदाज, उसकी अदाएं और ठुमकों से हम इतने प्रभावित रहे हैं कि उसके मुकाबले अगर कोई कमजोर अदाकारा उसी चीज़ को कमजोर तरीके से दुहराने लगती है तो मन में एक विचार आता है कि ऐसा नहीं चाहिए। हमारे दिमाग में माधुरी की जो छवि बनी हुई है, उस छवि को इस गाने से झटका लगता है। माधुरी के प्रशंसक इसे कभी पसंद नहीं कर सकते। हां, यह सही है कि गानों के री-मेक बहुत हुए हैं लेकिन फिल्मी पर्दे पर अदाओं की इस तरह हू-ब-हू नकल नहीं की गई।

संजीव श्रीवास्तव : लेकिन फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े सितारे मसलन सलमान खान या अनिल कपूर तो इस गाने पर जैकलिन की परफॉर्मेंस को काफी पसंद कर रहे हैं ?
अजय ब्रह्मात्मज : सलमान आदि के समर्थन का कोई मतलब नहीं है। सेलिब्रिटी का समर्थन आई वॉश होता है-ये लोगों को धोखा देने का प्रयास है। कोई फिल्म आती है तो बहुत से फिल्म सेलिब्रिटी उसे बिना देखे ही समर्थन करने लगते हैं। ये बहुत हास्यास्पद है। दरअसल सलमान की रेस3 आ रही है-जिसमें जैकलीन है और साथे में अनिल कपूर भी हैं। ...तो इस वजह से रेस3 की पूरी टीम दोनों जैकलीन के साथ है।
 
'बागी 2' में जैकलीन ने किया 'एक दो तीन...' गीत पर परफॉर्मेंस
संजीव श्रीवास्तव : हमलोग फिर से उसी मुद्दे पर लौटते हैं। माधुरी के गीत एक दो तीन…; की तरह ही तमा तमा... गाने का भी री-मेक हुआ था, लेकिन तब तो कोई विवाद नहीं हुआ। हां, ये कहा जा सकता है कि तमा तमा... के री-मेक में आलिया ने अच्छा काम किया था।
अजय ब्रह्मात्मज
अजय ब्रह्मात्मज : नहीं नहीं देखिए...मैं हू-ब-हू एक्शन दुहराने की बात कर रहा हूं। जो कि ऐसा पहले नहीं हुआ था। अगर एक दो तीन...के री-मेक में देखें तो जैकलीन ने माधुरी के स्टेप्स ही नहीं उसके कॉस्ट्यूम को भी अपनाया है। फिल्मों में ऐसा नहीं हुआ। जब आप दोनों को एक साथ देखते हैं तो दोनों में अंतर साफ दिखता है जो कि बड़े झटके के समान है। मालूम होता है सोने के नाम पर पीतल को बेचा जा रहा है। आजकल नयेपन के नाम पर पुराने गीतों में शब्दों के हेर फेर कर या नये इंस्ट्रूमेंट्स के इस्तेमाल कर कल्ट गीतों के सौंदर्य को बिगाड़ने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। ऐसा नहीं होना चाहिए। पुराने गीत हम आज भी सुनते हैं। उनका रीमिक्स करने की क्या जरूरत है।

संजीव श्रीवास्तव : लेकिन एक सच ये भी है कि माधुरी का डांस वाला गाना इतने सालों में तीन करोड़ व्यू पा रहा है जबकि जैकलीन का गीत कुछ ही दिनों में दो करोड़ के व्यू को पार कर रहा है।
अजय ब्रह्मात्मज : देखिए ये चीज़ें क्वालिटी को नहीं दर्शाती है। आजकल बहुत सारी चीज़ें खरीदी जा रही हैं। अगर हम अश्लील फिल्म दिखाएं तो शायद उसे सबसे ज्यादा लोग देखने लग जाएं। इसका यह मतलब नहीं कि हम वही दिखाना शुरू कर दें।...तो हमारा मानना है कि व्यू के आंकड़े के आधार पर कोई पैमाना तय नहीं किया जा सकता है।
संजीव श्रीवास्तव

संजीव श्रीवास्तव : मुझे इस संदर्भ में याद आ रहा है कि नई डॉन में करीना कपूर पर हेलेन के गीत को फिल्माया गया था। यहां भी करीना ने हेलेन के स्टेप्स की नकल करने की कोशिश की थी लेकिन वो बारीकी नहीं देखने को मिली जो हेलेन की पर्सनाल्टी पर फबती है।
अजय ब्रह्मात्मज : मैंने कहा न ये नहीं हो सकता। वही तो मैं बार बार कह रहा हूं कि जो क्लासिक है उसकी कॉपी कभी नहीं हो सकती। करीना कभी भी हेलेन को नहीं दुहरा सकती थी। या तो लोग उससे बेहतर करके दिखाएं या अलग करें। लेकिन चूंकि लोग ऐसा नहीं कर पाते इसलिए बस कॉपी करने की कोशिश की जाती है। 

संजीव श्रीवास्तव : मैं इसी बात पर आ रहा था कि फिल्मों के री-मेक के साथ-साथ अब गानों के री-मेक का चलन बहत जोर पकड़ता जा रहा है। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
अजय ब्रह्मात्मज : वही मैं कह रहा हूं कि अब लोग मौलिक काम करने से बचना चाहते हैं। उनमे वैसी प्रतिभा नहीं है। वो उस तरह की रचनात्मक मेहनत नहीं करना चाहते हैं। गाने अच्छे नहीं लिखे जा रहे हैं। निर्देशक भी बेहतर तरीके से सोच नहीं पा रहे हैं। इधर एक सबसे खास बात जो देखने को मिल रही है वो यह कि आज के कई फिल्मकार पुरानी फिल्मों की कहानी में से कहानी निकाल ले रहे हैं, कई सीन उठा ले रहे हैं। गाने जो उठा रहे हैं, वो तो सामने हैं ही। ये एक बहुत आसान रास्ता बन गया है पैसे कमाने का। इससे फिल्मों के स्तर पर बड़ा असर पड़ रहा है।

*(अजय ब्रह्मात्मज वरिष्ठ फिल्म समीक्षक हैं। इन्होंने सिनेमा पर कई पुस्तकें लिखी हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में सिनेमा पर व्याख्यान देते हैं।
मुंबई में निवास। संपर्क-9820240504
संजीव श्रीवास्तव पिक्चर प्लस के संपादक हैं। दिल्ली में निवास।
संपर्क–pictureplus2016@gmail.com)
एक कार्यक्रम के दौरान माधुरी और जैकलीन


1 टिप्पणी:

  1. एक ख़ूबसूरती अौर अभिनय साम्राज्ञी दूजा काम की जुगारन ��

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