‘देवदास’ : कितनी फिल्मों में कितनी बार? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 28 अप्रैल 2018

‘देवदास’ : कितनी फिल्मों में कितनी बार?


भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी बन चुकी है देवदास

सिल्वर स्क्रीन के दो लोकप्रिय 'देवदास'

*अरविंद कुमार
बीसवीँ सदी का पहला साल था –1901 । शरतचंद्र चटोपाध्याय  (1876 – 1838) ने शर्त बदी कि वह उपन्यास लिख सकता है। दो दिन बाद कमरे से निकला तो हाथ में एक पूरा उपन्यास था – नाम था देवदास। यह छपा बहुत साल बाद 1917 में। भारतीय उपमहाद्वीप की लोक संस्कृति को एक नया पात्र मिल गया जो निराश उदास पियक्कड़ी का पर्याय ही बन गया –देवदासियत। लेकिन देवदास पियक्कड़ी से कहीं बहुत अधिक कुछ है। लिखे के एक सौ अठारह साल बाद उसका जादू अब सन् 2018 मेँ दास देव पंदरहवीँ फ़िल्म के रूप मेँ सामने है। यह इससे पहले बने सभी संस्करणों से हट कर राजनीतिक थ्रिलर है। निर्देशक हैँ सुधीर मिश्र। आइए हम देखें देवदास के सब रूपोँ को, जो भारत, पाकिस्तान और बांग्ला देश में बने हैं।
1.  सबसे पहले 1928 मेँ ईस्‍टर्न फ़िल्‍म सिंडिकेट ने एक मूक फ़िल्‍म बनाई थी। इसका निर्देशन नरेशचंद्र मिश्र का था। फ़ोटोग्राफ़ी नीतिन बोस ने की थी। देवदास का अभिनय नरेशचंद्र मिश्र ने ही किया था।
2.  इसके बाद 1935 मेँ न्‍यू थिएटर्स ने प्रमथेश चंद्र बरुआ के निर्देशन मेँ पहली बोलती बांग्ला फ़िल्म बनाई, जिसने देवदास कल्ट को पूरे हिंदोस्तान मेँ पहुंचा दिया। इसमें देवदास की भूमिका स्व. बरुआ ने ही थी। पारो थीँ उनकी पत्नी जमना और चंद्रमुखी थीँ चंद्रवती देवी। उसका प्रिंट न्‍यू थिएटर्स मेँ लगी भयानक आग मेँ मिट गया था।वास्तव मेँ बरुआ ने शरत् बाबू के उपन्यास को सही अर्थ दिया था। यह देख कर शरत् बाबू ने बरुआ से कहा था –लगता है मेरा जन्म देवदास लिखने के लिए हुआ था और तुम्हारा उसे परदे पर नया अर्थ देने के लिए।
बरुआ और जमना-बांग्ला देवदास (1935) में
3.     बांग्ला देवदास की सफलता से उत्साहित होकर न्‍यू थिएटर्स ने हिंदी देवदास (1936) बनाई। निर्देशन प्रथमेशचंद्र बरुआ का ही था। देवदास बने सहगल जो, इस फ़िल्म से महान गायक-अभिनेता बने। पार्वती रही वही जमना और चंद्रमुखी राजकुमारी। उम्र मेँ सहगल जमना से बहुत बड़े थे, लेकिन उनके अभिनय ने यह कमी पूरी कर दी। मेरी निजी राय मेँ यह हिंदी संस्करण देवदास पर अब बनी सभी फ़िल्मोँ से बढ़चढ़ कर है।

देवदास (1936) में के एल सहगल
4.  1936 मेँ न्‍यू थिएटर्स ने ही तमिल संस्‍करण भी बनाया। इसका निर्देशन पी. वी. राव का था देवदास की भूमिका कृष्‍ण आयंगर ने की थी
5.  1937 में न्‍यू थिएटर्स ने ही असमिया भाषा का संस्करण भी बनाया। निर्देशन वही बरुआ का था। लेकिन देवदास बने फणि शर्मा, पारो थी ज़ुबैदा और मोहिनी बनीं चंद्रमुखी। गायक थे भूपेन हज़ारिका और शमशाद बेगम।
6.  1953 में एक बार फिर दक्षिण के दर्शकोँ के सामने देवदासुआई विनोद फिल्‍म्‍स के लिए वेदांतर राघवैया ने इसका निर्देशन किया देवदास की भूमिका ए. नागेश्‍वर राव ने की। साथ में थीं सावित्री और ललिता
7. 1956 मेँ हिंदी मेँ बरुआ की देवदासके कैमरामैन और तब प्रसिद्ध फिल्‍म निर्देशक बिमल रॉय ने देवदासका निर्माण-निर्देशन किया। इसमें देवदास की भूमिका दिलीप कुमार ने की, पारो के रोल में सुचित्रा सेन थीँ और वैजयंतीमाला चंद्रा बनीँ। मुझे याद है तब हर कोई इसके डायलौग बोल रहा था

दिलीप कुमार, वैजयंती माला 'देवदास' (1956) में
8. 1965. पाकिस्तान मेँ 1965 मेँ ख़्वाजा सर्फ़राज के निर्देशन मेँ बनी देवदास। उस मेँ सभी पात्रे के नाम पाकिस्तानी थे, जैसे हबीब और तालिश। कलाकारों के नाम थे शमीम आरा, सुल्तान राही, हबीबुर्रहमान, नय्यर सुलताना, आगा तालिश। संगीत अख़्तर का था।
9. 1974 की तेलुगु देवदासु निर्देशन विजय निर्मल ने किया था.
10. 1979 वाली बांग्ला देबदाश का निर्देशन दिलीप रॉय ने किया। इसमें प्रमुख भूमिकाएं सौमित्र चटर्जी, उत्तम कुमार, सुप्रिया चौधरी और सुमित्रा मुखर्जी ने निभाईं
11. बांग्लादेश मेँ 1982 मेँ बनी देवदास का निर्देशन चाशी नज़रुल इसलाम ने किया। यह वहां बनी पहली रंगीन फ़िल्म थी बुलबुल अहमद देवदास बने, कोबोरी बनीं पार्वती, अनवरा बेगम थीँ चंद्रमुखी, रहमान (चुन्नीलाल), अनवर हुसैन (धर्मदास)। उल्लेखनीय है कि इसमेँ रूना लैला ने भी गाया था
12. 1989 की मलयालम देवदास के निर्देशक थे क्रौसबैल्ट मणि, मुख्य कलाकार: वेणु नागवल्लि, पार्वती, रम्या कृष्ण, मधु, नेडुमुडि वेणु, जगथी श्रीकुमार
13. 2002 मेँ निर्देशक शक्ति सामंत बनाई और निर्देशित की देवदास. प्रसेनजित (देवदास) तापस पाल (चुन्नी लाल), अर्पिता पाल (पार्वती), इंद्राणी हलदर (चंद्रमुखी) थे
देवदास (2002) में शाहरुख खान
14. 2002 मेँ ही हिंदी मेँ संजय लीला भंसाली की बड़े स्केल पर देवदास बनी यह देवदास पर बनी पहली रंगीन फ़िल्म थी शाहरुख ख़ान, माधुरी दीक्षित, ऐश्वर्या राय बच्चन, जैकी श्रौफ, किरण खेर, दीना पाठक, मिलिंद गुणाजी संजय लीला भंसाली की शैली में यह बेहद बड़े स्केल पर बनी फ़िल्म थी मेरी राय में यह बिमल रॉय वाली देवदास के बाद बनी बहुत अच्छी फ़िल्म थी। इसे आधुनिक रंगरूप दिया गया था, न भंसाली के ही बस का था।
15. 2010 में पाकिस्तान मेँ इक़बाल कश्मीरी ने बनाई देवदास। कलाकार थे ज़ारा शेख़, मीरा, नदीम शाह।
16. 1982 के बाद 2013 मेँ चाशी नज़रुल इस्लाम ने एक बार फिर बनाई देवदास। कलाकार: शाकिब ख़ान, मौशुमी और अपु विश्वास।
17. पंजाबी पृष्ठभूमि में डाल कर उसे एक बिल्कुल नए नज़रिए से देखा अनुराग कश्यप ने देव डीमें। यह अपनी तरह की पहली फ़िल्म थी। मुख्य भूमिकाओँ में थे अभय देओल, माही गिल, (पुद्दुचेरी मेँ जन्मी फ़्रांसीसी मूल की) कल्की कोचलीन।
18. पहले इसका नाम था और देवदास’, जो बदल कर दासदेवकर दिया गया है निर्देशक हैँ सुधीर मिश्र यह राजनीतिक थ्रिलर है। देवदास को नशा शराब का नही, सत्ता का है कलाकार हैं अदिति राव हैदरी (चंद्रमुखी), ऋचा चड्ढा (पार्वती) और राहुल भट (देवदास), तथा सौरभ शुक्ला
बरुआ का देवदास
बरुआ ने मूल उपन्यास को जैसे का तैसा नहीँ फ़िल्माया था। उपन्यास के कथानक का मूल तत्व पकड़ा – देवदास और पार्वती की दुःखांत प्रेम कथा। उनका बचपन बिल्कुल नज़रअंदाज़ कर दिया। उपन्यास का अंत भी इस तरह बदल दिया कि यह त्रासदी नायक और नायिका की निजी त्रासदी न रह कर सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश मेँ प्रेमी युगल की संयुक्त त्रासदी बन गई।
पार्वती दुस्साहसी है, समाज की सीमाओँ को तोड़ती है और अंत में परिवार की चहारदीवारी में घुटने को विवश हो जाती है। देवदास कमज़ोर है, समाज की और परिवार की सीमाओं की घुटन तो महसूस करता है, पर उन सीमाओं को तोड़ने के लिए तैयार नहीं है। वह न इधर का है, न उधर का। न पार्वती का हो सकता है, न चंद्रमुखी का रह सकता है। उसकी ज़िंदगी शराब मेँ और आवारगी में निकास देखती है। पर यह भी और इस से भी कोई निकास नहीँ है। निकास है तो अभिशप्त जीवन से मुक्ति मेँ है।यही देखकर शरत् बाबू ने बरुआ से कहा था–“लगता है मेरा जन्म देवदास लिखने के लिए हुआ था और तुम्हारा उसे परदे पर नया अर्थ देने के लिए।

अरविंद कुमार

*लेखक माधुरी पत्रिका के संस्थापक-संपादक हैं। हिंदी थिसारस के प्रणेता। 
गाजियाबाद में निवास। संपर्क-9811127360


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