'मंटो' मेरा तीसरा बच्चा - नंदिता दास - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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गुरुवार, 12 अप्रैल 2018

'मंटो' मेरा तीसरा बच्चा - नंदिता दास


मंटो न सिर्फ हिन्दुस्तान और न पाकिस्तान के,
वे तो दक्षिण एशिया के सर्वश्रेष्ठ लेखक हैं - रुश्दी
 

साहित्य और सिनेमा के संगम की ये एक और मिसाल है।
अभिनेत्री से निर्देशक बनी नंदिता दास ने फिराक के बाद एक और  बॉयोपिक फिल्म बनाई जिसका लब्बोलुआब एक अदीब की जिंदगी है। जिसकी सबसे बड़ी उपलब्धि फिलहाल ये है कि ऊर्दू के मशहूर रियलिस्टिक लेखक सआदत हसन मंटो के जीवन पर बनी इस फिल्म मंटो का चयन कान फिल्म महोत्सव के एक प्रतिष्ठित वर्ग अन सर्टन रिगार्डके लिए किया गया है। अन सर्टन रिगार्डका मतलब एक विशेष झलक है। इसमें ऐसी फिल्में शामिल की जाती है जिसमें कहानी गैरपारंपरिक तरीके से कही गई हो।
इस उद्घोषणा के बाद नंदिता दास ने खुशी जाहिर की और ट्विटर पर लिखा कि हम कान फिल्म महोत्सव में! मंटो का चयन इसके आधिकारिक वर्ग-अन सर्टन रिगार्ड्स में किया गया है। यह खबर इस फिल्म के सभी सदस्यों को रोमांचित कर देने वाली है। गौरतलब है कि अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने मंटो का किरदार निभाया है। जिन्होंने भी ट्वीट किया कि ''और यह संभव है कि सआदत हसन मर जाए और मंटो जिंदा रहे। इसकी सूचना देते हुए खुशी हो रही है कि मंटो का चयन कान फिल्म महोत्सव, 2018  के अन सर्टन रिगार्ड सेक्शनमें हुआ है।''
 मंटो पर ही फिल्म क्यों?
यह बताना जरूरी है कि यह फिल्म लेखक मंटो के 1946 से 1950 तक के जीवन पर केंद्रित है। बतौर लेखक और आज़ादख्याल जिंदगी जीने वाले मंटो जितना पाकिस्तान में मशहूर रहे हैं, उतने ही हिंदुस्तान में। नंदिता दास इस फिल्म की स्क्रीप्ट पर साल 2012 से 2016 तक काम करती रही। पिछले साल उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था ‘‘निश्चित तौर पर यह मेरी जिंदगी के सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं में से एक है। जब मैंने फिराककी थी तो मैंने सोचा था कि यह काफी चुनौतीपूर्ण है। तब मेरा एक बच्चा था और मैंने सोचा कि ठीक है...लोग गर्भधारण के बारे में ज्यादा नहीं बताते। लेकिन खुशियां और चुनौतियां हमेशा एक साथ आती हैं...इसलिए मंटोइस विचार से मेरा तीसरा बच्चा है और दूसरी फिल्म है।’’ फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दिकी के साथ रसिका दुग्गल हैं जो उनकी पत्नी साफिया की भूमिका में हैं। 
नंदिता आगे कहती हैं कि साल 2008 में जब मैं बतौर निर्देशक अपनी पहली फ़िल्म 'फ़िराक़' कर रही थी, तभी मैंने सोच लिया था कि मंटो की कहानियों पर एक फ़िल्म बनाऊंगी। लेकिन जैसे-जैसे मैं मंटो को पढ़ती गई, उन्हें जानती गई तो लगा कि उनकी ख़ुद की ज़िंदगी इतनी दिलचस्प है कि उन पर फ़िल्म बन सकती है।


मंटो के लिए नवाज़ुद्दीन क्यों?
इस सवाल के जवाब में नंदिता का कहना है-मुझे मालूम है कि लोग यह पूछेंगे कि मैंने नवाज़ को ही क्यों चुना। नवाज़ुद्दीन को ही इस रोल में लेने के कई कारण थे, लेकिन उससे पहले आपको मंटो को समझना पड़ेगा। बतौर निर्देशक मेरा मंटो बेबाक है, आज़ाद है। वो जैसा कहना चाहता है वैसा ही कहता है। मंटो के किरदार में रेंज भी बहुत हैं। वो एक संजीदा इंसान हैं जिसमें कई भाव हैं, वो चालाक हैं। गुस्से वाले हैं। मज़ाक करते हैं। डरे हुए हैं और ऐसे में उन्हें परदे पर ज़िंदा करने के लिए एक ऐसे शख़्स की ज़रुरत थी जो इतनी शख़्सियतों को जी सके। और नवाज़ में वो हुनर है।
गौरतलब है कि मंटो ने तक़रीबन 300 कहानियां लिखी हैं। उनकी चर्चित कहानियों में है-टोबा टेक सिंह, बू, ठंडा गोश्त, सरकंडों के पीछे असाइनमेंट, लाइसेंस आदि। उनकी कई रचनाओं पर विवाद भी हुए हैं। उन्होंने बंटवारे के दर्द पर कलम चलाई है तो वेश्याओं के नर्क जीवन का जीवंत चित्रण भी किया है। बेबाक भाषा और शब्दावली को लेकर उनके लेखन पर कई बार अश्लीलता के आरोप भी लगे हैं लेकिन उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की और बेफिक्र अपनी सोच के मुताबिक लिखते रहे।  
संजीव श्रीवास्तव 
Email : pictureplus2016@gmail.com

2 टिप्‍पणियां:

  1. मंटो लेखक हैं आदमी हैं फकीर है पर लकीर के नहीं। ऐसे में नंदिता दास और नवाज मिलकर जो करेंगे काबिले-तारीफ ही नही काबिले-गौर होगा।

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