'राज़ी' में आलिया को देखकर बजायें कितनी तालियां..? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 12 मई 2018

'राज़ी' में आलिया को देखकर बजायें कितनी तालियां..?


फिल्म समीक्षा
टाईटल - राज़ी
निर्देशक - मेघना गुलज़ार
सितारे - आलिया भट्ट, विकी कौशल, रजित कपूर, शिशिर शर्मा, जयदीप अहलावत, सोनी राजदान
रेटिंग – 3.5 स्टार


*रवीन्द्र त्रिपाठी
बात 1970-71 की है। दिल्ली विश्वविद्यालय में सेहमत नाम की एक कश्मीरी लड़की पढ़ती है। वो बेहद रहमदिल है। पक्षियों से उसे बहुत प्यार है। एक गिलहरी कहीं चलती कार से न कुचल जाए इसके लिए खतरे से खेल जाती है। वो इतनी नाजुक है कि टेटनस की सुई लगावाने से भी डरती है। पर हालात बदलते हैं और उसकी कायापलट हो जाता है। वो भारत की जासूस बनके पाकिस्तान पहुंच जाती है। एक पाकिस्तानी सेना अधिकारी के बेटे से उसका निकाह होता है। भारत-पाकिस्तान युद्ध के पहले दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है और सेहमत खतरों से जुझते हुए भी अपना काम करती रहती है। वो खुफिया जानकारियां भेजती रहती है। भारत के लिए उसके मन में इतना प्यार है कि ये भी नहीं सोचती की वो जो कर रही है उसका अंजाम क्या होगा? पति और देश में वो देश को चुनती है।  पाकिस्तान मे वो दो लोगों की हत्या भी करती है, वरना उसका राजखुल जाता। उसका पति भी भारत की खुफिया एजंसी की उस कार्रवाई में मारा जाता है जो उसके यानी सेहमत को पाकिस्तान से निकालने के लिए की गई थी। अपना काम करने के बाद सेहमत विधवा होकर अपने देश भारत में लौट जाती है।
फिल्म की कहानी
मेघना गुलजार की नई फिल्म `राजी का लब्बोलुवाब यही है। आलिया भट्ट ने इसमें सेहमत नाम की उस लड़की का किरदार निभाया है। वैसे तो ये जासूसी कहानी है  पर फिल्मों मे दिखाई जानीवाली जासूसी कहानियों से काफी अलग। सेहमत कोई जेम्स बांड मार्का जासूस नहीं है। फिल्म में सस्पेंस तो भरपूर है लेकिन वैसे एक्शन इसमें नही हैं जो ज्यादातर थ्रिलर फिल्मों में दिखते हैं। एक घरेलू सामान्य औरत क घर के सदस्यों के लिए पराठे बनाते हुए और टोस्ट सेंकते हुए  किस तरह जासूसी करती है और इसी का किस्सा है ये फिल्म। आलिया भट्ट ने जिस किरदार को निभाया है उसके अपने डर और संकोच है। सेहमत कभी भी पकड़ी जा सकती है। आखिर जिस घर में वो खुफियागिरी कर रही है वो पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल का घर है। उसका राज कभी भी फाश हो सकता है। राज अब खुला तब खुला वाली हालत कई बार पैदा होती है। आलिया ने ऐसी परिस्थिति में फंसी सेहमत के मानसिक तनाव के हर क्षण को जिस तरह सामने लाया है वो उनको एक बेहतरीन अभिनेत्री की कतार में खड़ा कर देता है। इसमें संदेह नहीं कि ये अब तक का आलिया भट्ट का सबसे अच्छा काम है। पूरी फिल्म आलिया या उनके चरित्र पर केंद्रित है। सेहमत के पति इकबाल की भूमिका में विकी कौशल का काम भी अच्छा है। आलिया भट्ट की असली मां सोनी राजदान इसमें सेहमत की मां बनी हैं।


अभिनय और निर्देशन
आलिया भट्ट की शानदार भूमिका के अलावा फिल्म तीन और बातों के लिए उल्लेखनीय है। एक तो भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों को आधारित होने के बावजूद किसी तरह के अंधराष्ट्रवाद को नहीं दिखाती। ये राष्ट्रवाद नहीं बल्कि देशभक्ति को दिखानीवाली फिल्म है। दूसरे ये बड़े ही ताकतवर तरीके से दिखाती है कि मुसिलम भी, खासकर कश्मीरी मुस्लिम भी, सहज रूप से  देशभक्त हो सकते है और भारत के लिए अपनी जान की बाजी लगा सकते हैं। सहमत के पिता भी भारत के लिए पाकिस्तान मे जासूसी करते हैं –ये भी फिल्म मे दिखाया गया है। जयदीप अहलावत ने जिस भारतीय खुफिया अधिकारी की भूमिका निभाई है वो भी मुसलिम है। तीसरे ये फिल्म युद्ध की व्यर्थता और अमानवीयता को सामने लाती है। जंग में मरनवाले ज्यादातर निरीह और निर्दोष होते हैं। ये अक्सर भुला दिया जाता है। फिल्म इसकी याद दिलाती है।
इस नॉवेल पर बनी फिल्म
`राजी हरिंदर सिक्का के उपन्यास कॉलिंग सेहमत पर आधारित है। सिक्का भारतीय नौसेना के अधिकारी रहे हैं और कारगल युद्ध के समय रिटायर सेना के अधिकारी के रूप में हालात का जायजा लेने उस इलाके में गए थे। वहीं उन्होंने एक ऐसी लड़की की जानकारी मिली जो भारत के लिए पाकिस्तान में जासूसी करने गई थी। सेहमत उसका वास्तविक नाम नहीं था। लड़की, जो अब इस दुनिया में नहीं है, भारत आने के बाद लंबे समय तक जीवित रही और उसका बेटा भी भारतीय सेना में था। वो खुद गुमनाम सी रही और भारत पाकिस्तान युद्ध के इतिहास में उसका नाम दर्ज नहीं है। इसीलिए ये फिल्म उन अनाम लोगों की याद में भी है जो भारत-पाक युद के समय मोर्चे पर नहीं थे पर देश के लिए अपने को या तो कुर्बान कर रहे थे या कुर्बान होने को तैयार थे। युद्ध में सिर्फ सैनिक नहीं लड़ता, सिर्फ वही नहीं मरता और लोग भी लड़ते हैं और मरते हैं।
मेघना गुलजार की इस फिल्म को देखने के बाद 2017 में संकल्प रेड्डी के निर्देशन में आई फिल्म `द गाजी अटैक की याद आती है।  उसमें मे ये दिखाया गया था कि 1971 भारत-पाक युद्ध के समय पाकिस्तान ने भारतीय युद्धपोत `आईएनएस विक्रांत को ध्वस्त करने के लिए  गुप्त तरीके से अपने युद्धपोत  `पीएनएस गाजी को भेजा था। `राजी में ये जिक्र आता है कि सेहमत ने ये खुफिया जानकारी भेजी थी कि पाकिस्तान नौसेना के माध्मय से कोई भारत के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने जा रहा है। क्या इस तरह का असल में कोई संदेश उस लड़की  ने भारतीय खुफिया एंजेसी को भेजा था जिसका हरिंदर सिक्का की किताब में उल्लेख है?  अगर हां, तो भारतीय सैन्य इतिहास में इसे दर्ज किया जाना चाहिए। वो देशभक्त कश्मीरी लड़की असल में कौन थी?

*लेखक प्रख्यात कला मर्मज्ञ व समीक्षक हैं। दिल्ली में निवास।
संपर्क - 9873196343

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