‘संजू’ में रणबीर का मेकअप-गेटअप नहीं, संजय दत्त की रूह और रंग को देखना होगा - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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सोमवार, 28 मई 2018

‘संजू’ में रणबीर का मेकअप-गेटअप नहीं, संजय दत्त की रूह और रंग को देखना होगा


सिनेमा की बात अजय ब्रह्मात्मज* के साथ
 

संजू की बॉयोपिक का जो पोस्टर आया है और इससे पहले जो ट्रेलर आया उसे देखकर क्या लगता है कि रणबीर कपूर कितने फिट हो पायेंगे इसमें?

अजय ब्रह्मात्मज –फिल्म अच्छी ही होगी ऐसी सम्भावना है। दरअसल आज के समय में मेकअप करके किसी को भी संजय दत्त बनाया जा सकता है। यहां तक कि आपको भी। उसका बाहरी ढांचा भी दिखाया जा सकता है। लेकिन देखना यह दिलचस्प होगा कि राजकुमार हिरानी संजय की रूह को फिल्म में कितना पकड़ पाते हैं? इसके अलावा उनके चलने-फिरने का स्टाइल आदि को कितनी ईमानदारी से प्रस्तुत कर पाते हैं?

अब तक हमने जो उनके लाइफस्टाइल को देखा, मीडिया में जो उनकी नेगेटिविटी देखी, क्या वही सब फिल्म में भी होगा?
 
अजय ब्रह्मात्मज

अजय ब्रह्मात्मज–अब तक जो उन्होंने जिया वह उनका जीवन था पर अब जो पर्दे पर दिखाया जाएगा उसमें वही सब पुन: दोहराया जाएगा । इसमें संजय दत्त की भूमिका भी अहम है कि कितनी ईमानदारी से उन्होंने अपने जीवन को राजकुमार हिरानी से शेयर किया है और कितनी ईमानदारी से राजकुमार हिरानी उसे पर्दे पर लेकर आते हैं।

खबरें हैं कि संजय दत्त की बॉयोपिक में तथ्य होंगे, अफवाहें नहीं ? तब फिल्म किस तरह पूरी हो पाएगी ?

अजय ब्रह्मात्मज – हिरानी जी ईमानदारी से काम करने वाले आदमी हैं। उम्मीद है यहां भी उन्होंने ईमानदारी से काम किया होगा । ऐसा बिलकुल भी नहीं किया होगा कि उनकी ईमेज बिल्डिंग के लिए कोई चीज बनाई जाए । हिरानी के अंदर सिनेमाई मिट्टी के सभी गुण मौजूद हैं और उनकी फिल्मों के संदेश भी पोजिटिविटी यानी सकारात्मकता लिए हुए होते हैं । बाकि यह तो अनुमान ही लगाया जा सकता है कि तथ्य होंगे अफवाहें नहीं होंगी। हथियार रखने जैसी सच्चाई को तो किसी से छुपाया नहीं जा सकता । साथ ही उनकी कामयाबी और उनके एक बेहतर इंसान बनने की कहानी को देखना दिलचस्प होगा ।
 

आखिरी प्रश्न। एक पिता से पहले पुत्र की बॉयोपिक आना कहां तक उचित है ? जबकि सुनील दत्त भी एक स्थापित कलाकार रहे हैं, उन्होंने भी सामाजिक जीवन जिया है।

अजय ब्रह्मात्मज – देखिए जायज नाजायज सिनेमा में कुछ नहीं होता । ऐसे तो पृथ्वीराज कपूर, दादा साहब फाल्के पर भी फिल्म अब तक बन जानी चाहिए थी । ये तो फिल्म निर्माता, निर्देशकों पर निर्भर करता है कि वे किसे कहानी बनाकर या किसे आधार बनाकर फिल्म प्रस्तुत कर रहे हैं।

प्रस्तुति - तेजस पूनिया
(केद्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान हिन्दी विभाग में छात्र)
संपर्क - +919166373652
             +918802707162
Email - tejaspoonia@gmail.com



(*अजय ब्रह्मात्मज वरिष्ठ फिल्म समीक्षक हैं। इन्होंने सिनेमा पर अनेक पुस्तकें 
लिखी हैं। विश्वविद्यालयों में सिनेमा पर व्याख्यान देते हैं। 
मुंबई में निवास। संपर्क – 9820240504)

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