मिलिये ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ और ‘छइयां छइयां’ की गायिका सपना अवस्थी से... - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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मंगलवार, 8 मई 2018

मिलिये ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ और ‘छइयां छइयां’ की गायिका सपना अवस्थी से...

प्ले बैक सिंगर सपना अवस्थी से संजय सिन्हा की बातचीत

संस्कृत में एमए करने के बाद सपना अवस्थी शास्त्रीय संगीत की तालीम लेने दिल्ली आ गईं, मगर रंगमंच से जुड़ गईं। उन्होंने अपने पति कार्तिक के साथ मिलकर एक थिएटर ग्रुप बनाया। इस दौरान सपना ने टीवी के पहले सोप-ऑपेरा 'हम लोग' में अभिनय भी किया। बाद में वह मुंबई चली आईं और यहीं उनकी मखमली और खनकदार आवाज़ को एक नई पहचान मिली। उन्होंने नदीम श्रवण से लेकर रहमान जैसे शीर्षस्थ संगीतकारों के लिए गाया। अपने कैरियर में कई सुपर-डुपर और हिट  गीतों  का रिकॉर्ड दर्ज़ करवाने वाली प्ले बैक सिंगर सपना अवस्थी से मुंबई के अंधेरी (वेस्ट) स्थित उनके आवास पर विस्तार से हुई बातचीत के मुख्य अंश-
 
गायिका सपना अवस्थी
-दिल्ली से मुंबई जाकर कितना संघर्ष करना पड़ा आपको?
मुंबई में मुझे ज़्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। मेरी आवाज़ को सभी ने सराहा और मुझे काम मिलता गया। दिल्ली की तसरः मुंबई में भी मैं थिएटर कर सकती थी, लेकिन इससे मेरी गायिकी की रफ़्तार में बाधा आ सकती थी, लिहाज़ा मैंने पूरा ध्यान अपनी गायिकी पर ही दिया।

-आपने अपने अब तक के कैरियर में कई हिट गाने दिए। मसलन-'परदेसी-परदेसी जाना नहीं...' छइयां-छइयां ....' आदि। आज भी ये गीत चाव से सुने जाते हैं। इस मुकाम पर पहुंचकर कैसा अनुभव कर रहीं हैं?
बेशक अच्छा महसूस करती हूं। इस सफलता के लिए मैं अपने संगीतकारों  और  संगीतप्रेमी प्रशंसकों को भी धन्यवाद कहना चाहती हूं। अगर इनका सहयोग नहीं मिलता तो ये गाने सुपर-डुपर हिट नहीं होते। इंडस्ट्री में भी सभी ने मुझे सहयोग किया। संगीतकार चित्रगुप्त के बेटे मिलिंद की सगाई में मेरी मुलाक़ात गीतकार समीर से हुई और फिर समीर ने मेरी पहचान फिल्मकार शेखर कपूर से कराई। समीर जी ने मेरी आवाज़ की काफी तारीफ़ कर दी थी, लिहाज़ा मुझे पहला ब्रेक फिल्म 'दुश्मनी' में मिला, लेकिन मेरी पहली रिलीज़ फिल्म थी 'इक्का राजा रानी'इस फिल्म में मेरा गाया गाना हिट हो गया,फिर तो मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। संगीतकार नदीम-श्रवण ने मेरी आवाज़ को बहुत दूर तक पहुंचा दिया। सबसे ज़्यादा लोकप्रियता मुझे फिल्म 'राजा हिन्दुस्तानी' के गीत 'परदेसी-परदेसी  जाना नहीं....' से मिली। कुल मिलाकर मैं अपनी इस सफलता से संतुष्ट हूं। इस कामयाबी के पीछे मेरे पति कार्तिक अवस्थी का भी बहुत बड़ा हाथ है।

-आपको ऐसा नहीं लगता कि मैलॉडी गीतों का दौर ख़त्म सा हो गया है?
ख़त्म तो नहीं हुआ है, हां इसमें कमी ज़रूर आई है। आज भी कुछ संगीतकार और गायिकाएं अच्छा काम कर रहे हैं। मैलॉडी के बिना तो संगीत एकदम अधूरा है।

-आपके बाद कई गायिकाओं ने फिल्म इंडस्ट्री में क़दम रखा। उनमें से किसे पसंद करती हैं आप?
श्रेया घोषाल अच्छा गा रहीं हैं। उनकी आवाज़ में जादू है।

 
गायिका सपना अवस्थी के साथ संजय सिन्हा
-अब तक आपने कितने गाने गाए हैं?
मैंने अब तक लगभग सौ फिल्मों में 125  गाने गाए हैं, मगर अलबमों को जोड़ दें तो गानों की संख्या 500  से ऊपर चली जाएगी। शुरू-शुरू में मेरे गाने आज के आइटम सांग्स जैसे थे। उस समय मेरे गानों की काफी आलोचना भी हुई, लेकिन आज वैसे ही गाने हिट हो रहे हैं और लोगों को पसंद आ रहे हैं। मुझे ख़ुशी है कि संगीतकार एआर रहमान के संगीत निर्देशन में मैंने 'छइयां-छइयां ...' गाया था, जो  आइटम में ऑल टाइम हिट माना जाता है। रहमान साहब ने मुझे गुलज़ार साहब से मिलवाया था। गुलज़ार साहब ने सीरियल 'मिर्ज़ा ग़ालिब' में मुझसे गवाया था। उनको मेरी आवाज़ काफी पसंद आ गई थी।

-आप तो मूल रूप से लखनऊ की रहने वाली हैं। लखनऊ से दिल्ली और फिर मुंबई। लखनऊ को भूल तो नहीं गईं आप?
(हंसते हुए) नहीं-नहीं, जब भी समय मिलता है, लखनऊ जाती हूं। लखनऊ में मेरा घर है और लखनऊ से मेरा दिल का रिश्ता है। दिल्ली ससुराल है, इसलिए समय मिलने पर दोनों जगह जाती हूं। बाकी समय शो के लिए देश-विदेश में घूमती रहती हूं। भारत में होने वाले फेस्टिवलों में भी जाने का सिलसिला जारी रहता है।

-फुर्सत के पलों में क्या करती हैं?
मैं पढ़ती काफी हूं। लिखने का शौक नहीं रहा है। पति देव लिखते हैं। उनकी कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। हर रोज़ रेयाज़ करती हूं।

-नई गायिकाओं को क्या टिप्स देना चाहेंगी?
यही कि शॉर्टकट के चक्कर में न पड़ें। पूरी मेहनत और लगन से आगे बढ़ें।

(संजय सिन्हा वरिष्ठ पत्रकार और अभिनेता भी हैं।
संपर्क- 9800184662 / 9832757050


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