इस फिल्मी 'परिवारवाद' को देखा तो ऐसा लगा...! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 30 जून 2018

इस फिल्मी 'परिवारवाद' को देखा तो ऐसा लगा...!


आने वाली इस फिल्म के टीज़र को देखा तो ऐसा लगा!

-गौतम सिद्धार्थ

ये एक फैमिली फैमिली फिल्म है। वास्तव में ये फैमिली फैमिली फिल्म है। नहीं? आप मतलब नहीं समझे। इस फिल्म के प्रोड्यूसर कौन है? वो है, विधु विनोद चोपड़ा। अब इस फिल्म की डायरेक्टर कौन है? वो हैं, शैली चोपड़ा। ये शैली जी की पहली फिल्म है, और वो विधु विनोद चोपड़ा की बहन है। तो ये रही पहली फैमिली। अब, इस फिल्म की हिरोईन कौन हैं? सोनम कपूर। उनके बाप कौन बने हैं? अनिल कपूर। दोनों कौन हैं? बाप बेटी, और फिल्म में भी बाप बेटी ही बने हैं। ये है दूसरी फैमिली।

'इक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' की छवियां
अब इसकी कुछ और बातें, इस फिल्म का नाम 1942 अ लव स्टोरी के एक गाने से लिया गया  है जो विनोद चोपड़ा की ही फिल्म थी।
एक बार कंगना ने कहा था कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री भी राजनीति की तरह परिवारवाद से घिरी है। नये लोगों को चांस बहुत कम मिलता है। उसका ताज़ा उदाहरण यही है। इसमें राजकुमार राव भी है, पर उसको ज्यादा अहमियत नहीं दी जा रही है। इसमें जूही चावला भी है। पर उनको भी महत्व नहीं दिया जा रहा है। वजह साफ़ है कि फिल्म इंड्स्ट्री में इतना फैमिली फैमिली है कि बाक़ी पानी कम चाय है।
(लेखक स्क्रीन राइटर हैं। मुंबई में रहते हैं।)

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