क्या हर ‘सूरमा’ की सफलता के पीछे किसी ‘प्रेम कहानी’ का हाथ होता है? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 14 जुलाई 2018

क्या हर ‘सूरमा’ की सफलता के पीछे किसी ‘प्रेम कहानी’ का हाथ होता है?


'संजू' के दो हफ्ते बाद क्यों रिलीज हुई 'सूरमा' ?

'सूरमा' में दिलजीत दोसांझ और तापसी पन्नू 

फिल्म समीक्षा
सूरमा
निर्देशक - शाद अली
कलाकार - दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी, विजय राज आदि।
*रवींद्र त्रिपाठी
पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन पर बनी `सूरमा एक प्रेम कहानी भी है और एक हॉकी खिलाड़ी के जीवट का किस्सा भी। इस तरह ये भी एक बॉयोपिक है। आजकल बॉलीवुड में बॉयोपिक फिल्म बनाने का सिलसिला चल पड़ा है। हाल में  आई `संजू ही नहीं  लगभग दो साल पहले, यानी 2016 में, आई `एमएस धोनी एन अनटोल्ड स्टोरी और `अजहर भी बॉयोपिक  थी। पहली क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के जीवन पर तो दूसरी क्रिकेटर अजहरुद्दीन के जीवन पर थी।  पर जैसा कि हिंदी फिल्मों में होता है कोई बॉयोपिक पूरी तरह जीवन की कहानी नहीं होती। उसमें कल्पना का भी समावेश होता है। आखिर हिंदी फिल्मों में गाने भी होने ही चाहिए। गाने को लिए प्रेम कहानी होनी चाहिए और प्रेम कहानी है तभी प्रेम गीत यानी गाने होंगे। संदीप सिंह के जीवन पर आधारित इस फिल्म में एक अहम किरदार हीरो की प्रेमिका भी है और उसके साथ गाने भी है। ये दीगर बात है कि इन गानों को शायद ही कोई याद रखे। पर यहां जो प्रेम दिखाया गया है उसमें सिर्फ कल्पना नहीं है। हकीकत भी है। बहुत हद तक।
फिल्म की कहानी
इसमें संदेह नहीं कि फिल्म एक प्रेरणादायी गाथा है। किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का हौसला देनेवाली। संदीप सिंह का जीवन ही कुछ ऐसा रहा। वे भारत के एक बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी रहे। अक्सर जैसा होता है, खेल और खिलाड़ी का यहां एक दूसरे के प्रति प्रेम बचपन का नहीं है। बचपन में कोच के कड़े अनुशासन की वजह से संदीप सिंह को हॉकी से विराग पैदा हो गया था। लेकिन युवावस्था में उनके जीवन में आई हरप्रीत कौर जो खुद एक हॉकी खिलाड़ी थी। हरप्रीत ही संदीप की जिंदगी में हॉकी का जज्बा पैदा करती है। लेकिन किस्मत देखिए। एक यात्रा के दौरान संदीप को गोली लगती है और वो बुरी तरह घायल हो जाते हैं। फिर उनको लकवा मार देता है। ऐसा खिलाड़ी क्या कभी फिर से हॉकी का स्टिक लेकर मैदान में आ सकता है? लेकिन संदीप सिंह ऐसा करते हैं। यही वो उनकी जिंदगी का वो लम्हा है जहां से एक आदमी के जिद और लगन की जीत का मोड़ आता है।

हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की भूमिका में दिलजीत दोसांझ

अभिनय और निर्देशन
संदीप सिंह की भूमिका दिलजीत दोसांझ ने निभाई है और हरप्रीत की भूमिका तापसी पन्नू ने। अंगद बेदी ने संदीप सिंह के बड़े भाई का किरदार निभाया है और विजय राज ने कोच का। दिलजीत और तापसी की भूमिकाएं अच्छी हैं। हालांकि दिलजीत अपनी भावनाओं को अपने चेहरे पर थोड़ी अधिक गहराई से पेश करते तो बेहतर होता। वे पंजाब और पंजाबी फिल्मों के बड़े स्टार तो हैं। लेकिन हिंदी फिल्मों उनकी बड़ी साथ नहीं है हालांकि कुछ हिंदी फिल्में कर चुके हैं। फिल्म की कमजोरी ये है कि ये थोड़ी चुस्त नहीं है और इसमें एक बोर करनेवाला धीमापन है। गानों की वजह से ये धीमापन कुछ अधिक हो जाता है। अगर इस तथ्य तो नजर अंदाज कर दें तो `सूरमा जज्बा पैदा करनेवाली फिल्म है। दो घंटे और ग्यारह मिनट की इस फिल्म को अगर संपादित कर पौने दो घंटे या एक घंटा पचास मिनट का कर दिया जाता तो ये चुस्त हो जाती।
रेटिंग - 2.5 स्टार
*लेखक प्रख्यात कला मर्मज्ञ और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास।
संपर्क-9873196343

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