साहब बीवी की दुनिया में गुलाम के बदले अब गैंगस्टर क्यों? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 28 जुलाई 2018

साहब बीवी की दुनिया में गुलाम के बदले अब गैंगस्टर क्यों?


फिल्म समीक्षा
साहब बीवी और गैंगस्टर 3
निर्देशक - तिग्मांशु धूलिया
कलाकार - संजय दत्त, जिमी शेरगिल, माही गिल, चित्रांगदा सिंह, कबीर बेदी, दीपक तिजोरी


*रवींद्र त्रिपाठी
संजय दत्त पर अब उम्र का असर दिखने लगा है। चेहरे पर बुढ़ापे का प्रभाव है। ऐसा शख्स अगर किसी लड़की के साथ फिल्म में नाचते हुए प्रेमगीत गाए तो कुछ अजीब नहीं लगेगा?  ये सवाल भी मन में कुनमुनाएगा कि क्या संजय दत्त के भीतर भी देव आनंद की रूह का प्रवेश हो गया है जो उम्रदराज होने के बावजूद छलिया का किरदार निभाने को बेकरार है? चित्रांगदा सिंह के साथ `साहब बीवी और गैंगस्टर 3 के एक दृश्य में संजय दत्त नाचते और गाते हुए बेमेल जोड़ी की तरह लगते हैं। हालांकि उम्र चित्रांगदा सिंह की भी हो चली है। लेकिन उनके चेहरे पर ताजगी और कांति है। इसलिए सुहानी नाम की कथक नृत्यांगना का जो किरदार उन्होंने निभाया है उसमें आकर्षण है।
फिल्म की कहानी
बहरहाल, सब मिलाकार `साहब बीवी और गैंगस्टर 3 एक ढीली ढाली फिल्म बनके रह गई है। मध्यांतर के पहले ये बेहद धीमी गति से चलती है और उसके बाद अचानक बहुत तेज हो जाती है और इसी कारण इसमें असंतुलन भी है। हां, फिल्म की कहानी में एक नया तत्व आ गया है और वह है रूसी रूले का। रूसी रूले का प्राणघातक खेल है और इसमें दो प्रतिद्वंदी रिवॉल्वर के छह खांचे में से तीन में गोलियां भर के एक खुद पर चलाते हैं। किस खांचे भी गोली है इसका अनुमान मुश्किल है। इसलिए एक का मरना तय है। लंदन में बरसों से रह रहा उदय प्रताप सिंह (संजय दत्त) इस खेल में माहिर है और अपने कई प्रतिद्वंद्वियों को ऊपर भेज चुका है। भारत लौटने के बाद उसकी आखिरी बाजी साहब यानी आदित्य प्रताप सिंह (जिमी शेरगिल) के साथ होनी है। आदित्य प्रताप सिंह अपनी तरह का शख्स है जो इस खेल की बारीकी को समझता है हालांकि इस खेल का खिलाड़ी वह कभी नहीं रहा है। लेकिन उसकी षडयंत्रकारी और शराबी बीवी माधवी सिंह (माही गिल) उसे फंसाने के लिए अपनी चाल चलती है। क्या उसकी चाल सफल होगी? आदित्य मारा जाएगा या उदय सिंह?
आदित्य के परिवार में उसकी षडयंत्रकारी बीवी है तो उदय के परिवार में उसके षडयंत्रकारी पिता और भाई जिनकी भूमिकाएं क्रमश: कबीर बेदी और दीपक तिजोरी ने निभाई है। दोनों परिवार पुराने रजवाड़ों से जुड़े हैं और ऊपरी तामझाम के अलावा उनके पास कुछ बचा नहीं है। आदित्य की अपनी राजनैतिक पार्टी है और पत्नी सांसद है। लेकिन आदित्य उसे हटाकर खुद सांसद बनने की फिराक है। क्या ऐसा होगा? इसका जवाब तो `साहिब बीवी और गैंगस्टर श्रृंखला की अगली फिल्म में ही मिलेगा क्योंकि जिस तरह फिल्म का अंत किया गया है उससे तो यही लगता है कि बीवी अपने पति का घर छोड़ने के बाद भी अपनी चालें चलती रहेगी और साहब अपनी।
अभिनय और निर्देशन
वैसे माही गिल के चेहरे पर भी उम्र ने दस्तक दे दी है। क्या अगली फिल्म में वही बीवी बनेंगी? ये तो निर्देशक तिग्मांशु धूलिया को तय करना है। वैसे उन्होंने सोहा अली खान के चरित्र को इतनी कम जगह क्यों दी? वे सिर्फ तीन दृश्यों में आती है और अंत में गोली खाके मर जाती है? शायद ये इसलिए किया गया है कि साहब को अगली फिल्म मे तीसरी बीवी भी मिल जाए। हालांकि ये कयास है। फिलहाल तो इतना ही कि `साहिब बीवी और गैंगस्टर 3 उस तरह दमदार नहीं है जैसी कि इस श्रृंखला की पहली दो फिल्में थीं। फिल्म में एक संवाद है-`जब नाम के अलावा कुछ ना बचा हो तो नाम को बचा बचा के चलना चाहिए। शायद निर्देशक में इस फिल्म में इसी का खयाल रखा है।
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ह्वेन ओबामा लव्ड ओसामा
निर्देशक - सुधीश कुमार शर्मा
कलाकार - मौसम शर्मा, स्वाती बक्शी, राहुल अवाना, अमृता आचार्य, मोहित बघेल, हेमंत पांडे, मनोज बख्शी, हिमानी शिवपुरी
नाम से भ्रम हो सकता है कि ये अंग्रेजी फिल्म है लेकिन है ये हिंदी में। इसकी एक खासियत ये है कि इसमें ज्यादातर कलाकार, निर्देशक और निर्माता दिल्ली के ही है। ये एक कॉमेडी है जो ओसामा और ओबामा नाम के चरित्रों के साथ खेलती है। फिल्म एक सीमा तक हंसाती है हालांकि हास्य में मौलिकता और नयापन नहीं है। इसमें अमन ओसामा नाम का एक मुसलिम युवा है जो आगरा का रहनेवाला है। संयोग से उसली मुलाकात मैगी ओबामा नाम की एक लड़की से होता है जो ग्रेटर नोएडा के एक नेता सागर ओबामा की बेटी है। अमन ओबामा बचपन से ही नाना पाटेकर का फैन रहा है और जब भी तनाव में होता है नाना के निभाए किसी चरित्र के संवाद बोलने लगता है  जिससे कई ऐसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं जो हंसी का कारण बनती है। उसका एक दोस्त जॉय है जो शाहीन नाम की मुसलिम लड़की से प्रेम करता है। शाहीन का पिता जफर अब्बासी भी ग्रेटर नोएडा का नेता है। क्या अमन और जॉय की अंतर्जातीय शादी हो पाएगी? जाहिर है इसमें अड़चने आएंगी और इन्हीं अड़चनों से जुड़े हास्य को दिखाती ये फिल्म दर्शकों को गुदगुदाती रहती है।
*लेखक प्रख्यात कला मर्मज्ञ और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क-9873196343


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