हिंसा से लथपथ...आगजनी के पथ पर एक और ‘सत्यमेव जयते’ - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 18 अगस्त 2018

हिंसा से लथपथ...आगजनी के पथ पर एक और ‘सत्यमेव जयते’

फिल्म समीक्षा
सत्यमेव जयते
निर्देशक - मिलाप झवेरी
कलाकार - जॉन अब्राहम, मनोज वाजपेयी, आयशा शर्मा, अमृता खानविलकर, नोरा फतेही

'सत्यमेव जयते' फिल्म के एक दृश्य में जॉन अब्राहम

*रवींद्र त्रिपाठी
इस फिल्म को देखने के बाद ये तो बिना संदेह कहा जा सकता है फिल्मों में अतार्किक हिंसा और खून खराबे का जमाना गया नहीं है। और हिंसा भी ऐसी वैसी नही। भ्रष्ट अधिकारियों को आग में जिंदा जलाकर मार देने की। वो भी पुलिस अधिकारियों को। जो फिल्मों में भरपूर हिंसा देखने के आदी है उनके लिए इसमें काफी कुछ है।
फिल्म की कहानी
जॉन अब्राहम ने इसमें वीर नाम के एक ऐसे शख्स का किरदार निभाया है जो  वैसे तो कलाकार है लेकिन बदले की भावना से भरा हुआ है। और बदले की वो भावना इसलिए पैदा हुई है क्योंकि इसके पिता के साथ बेइंसाफी हुई थी। बदला लेने के लिए क्या करता है? वो चुन चुन कर, जी हां चुन चुन कर भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों पर घी या केरोसिन तेल डालकर आग में `ओम नमो स्वाहा करता जाता है। उधर पुलिस और प्रशासन परेशान कि कातिल कौन? इसकी तलाश की जिम्मेदारी सौंपी जाती है डीसीपी शिवांश राठौड़ (मनोज वाजपेयी) को। क्या वो `कातिल कौन?’ नाम की पहेली हल कर पाएगा?


निर्देशन और अभिनय
फिल्म में जबरदस्त हिंसा के साथ साथ जबरदस्त डायलागबाजी है और दर्शकों को तालियां बजाने के लिए मजबूर कर देती है। नोरा फतेही वाला `दिलबर वाला आइटम सौंग भी दमदार है। जॉन अब्राहम और मनोज वाजपेयी अपनी अपनी भूमिकाओं में जमे हैं। आयशा शर्मा की भूमिका में कुछ खास नहीं है। वैसे भी जिस फिल्म में अतिशय हिंसा होती है उनमें अभिनेत्रियों को इसलिए होना होता है कि दर्शकों को ये न लगे कि फिल्म में छड़े ही छड़े हैं।
*लेखक प्रख्यात कला मर्मज्ञ और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क - 9873196343  

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