क्या होगा जब दो लड़ाकू बहनों का बलमा भी आपस में भाई हो? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 29 सितंबर 2018

क्या होगा जब दो लड़ाकू बहनों का बलमा भी आपस में भाई हो?


फिल्म समीक्षा
पटाखा
निर्देशक- विशाल भारद्वाज
कलाकार - सान्या मल्होत्रा, राधिका मदान, सुनील ग्रोवर, विजय राज आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
हिंदी के मशहूर कहानीकार और राजस्थान निवासी चरण सिंह पथिक की कहानी `दो बहनें पर आधारित विशाल भारद्वाज की ये फिल्म देसी मिजाज की हंसी और पारिवारिक माहौल पर नहीं है। एक छोटी कहानी को विशाल ने जिस ढंग से विस्तार दिया है वह एक सृनात्मकता की मिसाल भी हैं।
फिल्म की कहानी
कहानी दो बहनों की हैं। ये हैं चंपा कुमारी यानी बड़की (राधिका मदान) और गेंदा कुमारी यानी छोटकी (सान्या मल्होत्रा)। दोनों बहनें बचपन से ही आपस में खूब लड़ती आई हैं। इतनी कि उनके झगड़े को देखने को सारा स्कूल या पूरा गांव इकट्ठा हो जाता है। मां है नहीं सो सारी जिम्मेदारी पिता की है। ऐसे में पिता क्या करे? खैर वो इस रोज रोज के टंटे से तंग आकर तय करता है कि कम से कम एक बेटी की शादी तो फटाफट कर दे। गांव के ही एक पैसे वाले नौजवान पटेल (सानंद वर्मा) से वह बड़ी लड़की की शादी तय कर देता है। इस बात से अनजान कि बड़की किसी लड़के के साथ इश्क कर रही है। और ऐन शादी के पहले लड़की प्रेमी के साथ घर छोड़कर चली जाती है। अब पिता करे? पटेल कहता है कि कोई हर्ज नहीं छोटकी से शादी कर दो। तैयारी शुरू होती है। पर छोटकी का भी किसी लड़के से इश्क चल रहा  है और शादी की रात ही वो उसके साथ चली जाती है। अब तो दोनों की लड़ाई नहीं होगी। अजी नहीं, दोनों के झगड़ो की अभी भी संभावना है क्योंकि जिन दोनों लड़कों के साथ उन्होंने शादी की है वे दोनों भाई भाई हैं। अब आगे क्या होगा? जो भी होता, मनोरंजक होता है।


निर्देशन और अभिनय
सुनील ग्रोवर ने जिस डिपर नाम के किरदार को निभाया है वो रंगमंच में प्रचलित सूत्रधार से मिलता जुलता है। ऐसा सूत्रधार जो बीच बीच में आकर दोनों बहनों को आपसे में लड़वाता भी है और सुलह भी कराता है। कभी वो लॉटरी बेचता तो कभी ककड़ी। चूंकि संगीत विशाल की फिल्मों का एक अहम हिस्सा होता रहा है इसलिए यहां भी ऐसा हुआ है। कम के कम इस फिल्म का एक गाना (`बलमा के बोल वाला) लोकप्रिय होगा। राधिका मदान और सान्या मल्होत्रा ने गांव की लड़कियों और औरतों की भूमिका में जो विश्वसनीयता दिखाई है वह याद रखने लायक है। दोनों के किरदार बचपन से शुरू होते हैं और फिर दोनों क्रमश: एक एक बच्ची की मां भी बन जाती हैं। पर दोनों के मिजाज में बदलाव नहीं आता। पर इसके लिए निर्देशक की भी तारीफ करनी होगी।
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क- 9873196343

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