गरबा के लवयात्री – डांडिया वाले दुल्हनिया ले जाएंगे ! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

गरबा के लवयात्री – डांडिया वाले दुल्हनिया ले जाएंगे !

फिल्म समीक्षा
लवयात्री
निर्देशक - अभिराज मीनावाला
कलाकार - आयुष शर्मा, वारीना हुसेन, राम कपूर, रोनित रॉय आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
सुसु यानी सुश्रुत (आय़ुष शर्मा) वडदरा का रहनेवाला एक ऐसा युवक है जिसका मन गरबा में नाचने के अलावा किसी काम में नहीं लगता। पढ़ाई की तो छोड़ ही दीजिए। इसलिए पड़ोस से जिस शिक्षक से वो ट्यूशन लेता है वो आकर मां बाप को ट्यूशन- फी लौटा देता है क्योंकि उनका बेटा तो पढ़ने के लिए आता ही नहीं। पिता के पूछने पर सुसु बोलता है कि पढ़ाई-लिखाई के झंझट में उसे पड़ना ही नहीं क्योंकि उसके जीवन का मकसद तो गरबा एकेडमी खोलना है। सुसु का मिजाज कुछ ऐसा है कि लड़कियां भी उससे नहीं पटतीं। पर उसका मामा (राम कपूर) कहता है कि भांजे, दिल न छोटा कर, एक दिन तुमको किसी से इश्क होगा जरूर। मामा उसका लव-कोच बन जाता है।
और वो एक दिन तब आता है जब गुजराती मूल की पर लंदन में रहनेवाली मिशेल उर्फ मनीषा (वारीना हुसैन) अपने पिता (रोनित रय) के साथ नवरात्र पर वडदरा आती है और जैसे ही गरबा के समारोह में सुसु उसे देखता है उसे महसूस होता कि उसके दि की मलिका मिल गई। लेकिन मलिका ऐसे कैसे मिलेगी? फटाफट कहीं प्रेमिका मिलती है क्या? राह में रोड़े तो आएंगे। सो लंदन में पैसा कमा चुका पिता सुसु से कहता है - तुम्हारी औकात क्या है बेटे कि मेरी मिशेल को पटाने चला है, वो तो पढ़ाई मे काफी तेज है और जल्दी ही उसे लाखों के पैकेज की नौकरी मिलने वाली है। और हां, उसका एक अंग्रेज बॉयफ्रेंड भी है। गुंजराती बंदे सुसु का दिल ही चकनाचूर हो जाता है। मिशेल लंदन चली जाती है। अब एक ही विकल्प है- सुसु भी लंदन जाए। पर लंदन जाना और वहां मिशे से मिलना इतना आसान थोड़े है। क्या मिशेल उसे मिलेगी या वो खाली हाथ और टूटे हुए दिल के साथ अपने वतन लौट जाएगा? क्या मिशेल का पिता `दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के अमरीश पुरी के स्टाईल में आखिर में बोलेगा कि-`जा मिशेल अपनी जिंदगी ले या कुछ और होगा?


`लवयात्री एक सीदी सादी लवस्टोरी है। फिल्म शुरू से आखिर तक गरबा के रंग में रगी है। सलमान खान ने अपने छोटे बहनोई (अर्पिता खान के पति) आय़ुष शर्मा का फिल्मी कैरियर इस फिल्म से शुरू कराया है ये तो सब जानते हैं। लेकिन आय़ुष में सलमान के स्टाईल में बॉडी-शाडी नहीं दिखाया है। बंदा सिर्फ दिल का मारा बना रहता है।
वारीना हुसैन का मुस्कुराहट लिए चेहरा शुरू से लेकर आखिर तक सुकून का एहसास कराता है। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने फिल्म को पेचदार नहीं बनाया है। `लवयात्री युवा वर्ग को लुभाने के मकसद से बनाई गई है।

*लेखक प्रसिद्ध कला समीक्षक और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क - 9873196343

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