जब अंधा हो अंधे क़त्ल का चश्मदीद गवाह तो कहानी में 'धुंध' लाजिमी है - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 6 अक्तूबर 2018

जब अंधा हो अंधे क़त्ल का चश्मदीद गवाह तो कहानी में 'धुंध' लाजिमी है


अंधाधुन
निर्देशक - श्रीराम राघवन
कलाकार - आयुष्मान खुराना, राधिका आप्टे, तब्बू, अश्विनी कालेसकर, अनिल धवन, छाया कदम आदि।  


*रवींद्र त्रिपाठी
अगर अंत के भूलभुलैये को छोड़ दें तो `अंधाधुन एक अच्छी सस्पेंस थ्रिलर है और लगभग हर पांच मिनट के बाद दर्शक को झटका दे देती है। यानी `आगे क्या होगा?’ या `अच्छा ये मोड़ भी कहानी में है?’ वाली बातें इसमें हैं। फिल्म में आयुष्मान खुराना में आकाश नाम के एक ऐसे युवा शख्स का किरदार निभाया है जो पियानो बजाता है लेकिन देख नहीं सकता। हालांकि जिसे अंधापन कहते हैं उसे लेकर फिल्म में रहस्य है। बहरहाल इस रहस्य को यहीं छोड़ दें और आगे बढ़ें तो आकाश पुराने जमाने के एक फिल्मी कलाकार प्रमोद सिन्हा (जिसकी भूमिका कई साल पहले के बॉलीवुड कलाकार अनिल धवन, जो वरुण धवन के चाचा भी हैं)  की हत्या का चश्मदीद गवाह भी है। हालांकि जो देख नहीं सकता वो चश्मदीद गवाह कैसे हो सकता है? बहरहाल, यही तो पहेली है।
जहां तक हत्या का मामला है वो सिर्फ प्रमोद नाम के कलाकार तक नहीं रकती। आगे भी होती है। और उसका भी चश्मदीद गवाह आकाश ही है। इन हत्याओं के पीछे प्रमोद सिन्हा की पत्नी सिमी (तब्बू) की क्या भूमिका है?  क्या आकाश की हत्या के भी प्रयास होंगे? क्या वो बच पाएगा? क्या वो कभी देख पाएगा? गुत्थियां कई हैं।
अंधाधुन `हत्यारा कौन?’ की फिल्म नहीं है। क्योंकि हत्या किसने की ये तो साफ है। हत्या या हत्याओं के बाद क्या होता है ये इसकी फिल्म है। फिल्म में एक आकाश खुराना और राधिका आप्टे के बीच एक छोटी सी प्रेम कहानी भी आती है। लेकिन वो आगे चलकर दब गई है और दोनों के बीच का सारा मामला एक रात का फसाना बन के रह गया है। फिल्म में गाने तो बहुत अच्छे नहीं हैं फिर भी संगीत की भूमिका अहम है। जब प्रमोद सिन्हा-सिमी के घर पर आकाश ये महसूस कर लेता है कि उस घर मे हत्या हो चुकी है तो सिमी के इस संकेत पर कि `अब बस करो, वो रूकता नहीं, पियानो बजाता रहता है। इस कारण एक तनाव पैदा होता है जो आकाश के चेहरे पर भी है और सिमी की आंखों में भी। और पूरे घर में भी।


आयुष्मान खुराना और तब्बू की भूमिकाएं जानदार है। तब्बू की भूमिका शेक्सपीयर के नाटक मेकबेथ के लेडी मेकबेथ की तरह है जो अपनी महत्वाकांक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है। धूर्त और खूंखार औरत के रोल में वह आकर्षण-विकर्षण के साथ पैदा करती हैं। आयुष्मान का चरित्र भी कई दौर से गुजरता है। उसमें भोलापन भी है और चालाकी भी। अंत मे वो भोला साबित होगा या चालाक?`अंधाधुन एक फ्रांसीसी फिल्म से प्रभावित है। निर्देशक राघवन सस्पेंस फिल्में बनाने में माहिर हैं। उनके नाम के आगे एक और अच्छी फिल्म जुड़ गई है।
*लेखक प्रसिद्ध कला समीक्षक और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क - 9873196343

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