महानायक का 'जय किसान' ! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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गुरुवार, 22 नवंबर 2018

महानायक का 'जय किसान' !


*संजीव श्रीवास्तव
कुछ समय पहले मैंने लिखा था कि अमिताभ बच्चन इस उम्र में भी इतने सक्रिय रहते हैं तो इससे केवल उनका या उनके परिवार का भला नहीं होता बल्कि उनकी मेहनत और सक्रियता से कइयों के घरों का चूल्हा चौका भी चलता है। कई लोग मुझ पर टूट पड़े-कि नहीं! अमिताभ बच्चन तो बहुत ही स्वाभिमानी जिंदगी जीने के आदि हैं और उन्होंने अपनी जिंदगी में सिवाय खुद के या अपने परिवार के सदस्यों के अलावा किसी और की मदद नहीं की।
यह जबाव मुझे कभी हजम नहीं हुआ। क्योंकि वो अगर अपने ही परिवार के सदस्य की मदद करते तो निश्चय ही अमिताभ सबसे टॉप स्थान पर अपने बेटे अभिषेक को देखना चाहते। लेकिन ऐसा करना ना तो उन्होंने कभी चाहा और ना ही यह संभव था। अमिताभ मानते रहे हैं कि अभिषेक को अपनी मेहनत और प्रतिभा की बदौलत ही अपने योग्य उचित स्थान हासिल करना होगा।
हर साल ग्यारह अक्टूबर को जन्म दिन पर मुंबई में जुहू स्थित जलसा भवन के दरवाजे पर उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ती है। यह सिलसिला कई सालों से चलता आ रहा है। अमिताभ की लोकप्रियता उनके इन्हीं जैसे प्रशंसकों के जोश और जज़्बे की बदौलत रही है। और शायद यही सब देख सुनकर बहुत से लोग यह मान कर चलते रहे हैं कि अमिताभ को अब सामाजिक तौर पर भी आगे आना चाहिये। क्योंकि उन्होंने जिंदगी में काफी काम कर लिया और काफी कमाई भी कर ली।
इन लोगों का ऐसा मानना उनके नजरिये से उचित भी है। हर कोई अपने से महान् और ऊंचे उठे हुए नामचीनों से मदद की अपेक्षा रखता है। ऐसे में अमिताभ से भी मदद की चाह रखना कोई गुनाह नहीं है। लेकिन यह पक्ष भी देखना वाजिब होगा कि अमिताभ ने जिंदगी में जो कुछ भी हासिल किया है वह दिन रात की अटूट मेहनत के बल पर हासिल किया है। सत्तर और अस्सी के दशक में दिन रात की शूटिंग, ‘कुली के दौरान मृत्यु तक का सामना, राजनीति में बदनामी और फिर उसके बाद एबीसीएल के जमाने में दिवालिया होने का दंश; अमिताभ ने अपनी जिंदगी में इतना सबकुछ भी झेला है।
प्रेमचंद अपनी एक कहानी में एक जमींदार किरदार के माध्यम से कहते हैं-जिसका समाज में जैसा ओहदा होता है उसकी जवाबदेही या प्राथमिकता भी उतनी ही बड़ी या छोटी होती है। एक किसान अपनी खेती और परिवार तक सोचता है लेकिन एक जमींदार पूरे सूबे के बारे में हिसाब बैठाता है। ये वही प्रेमचंद थे जोकि अपनी अधिकतम रचनाओं में भारतीय किसान के जीवन के अहम चितेरे के तौर पर भारतीय जनमानस में स्थापित हैं। लेकिन उन्होंने यदा कदा अपनी रचनाओं में जमींदार के सकारात्मक सोच वाले पक्ष को भी उजाकर किया है।  
गोयाकि अमिताभ ना तो किसान हैं और ना ही जमींदार। वह महज एक फिल्म कलाकार हैं। और उनके प्रशंसक व समीक्षक उनकी कला की उत्तमता के चलते उनको बॉलीवुड का बिग बी और महानायक भी कहते हैं।


अमिताभ बच्चन जीवन के अब ऐसे पल में पहुंच गये हैं जहां वो इसी महानायकत्व की सामाजिक भूमिका को भी निभाना चाहते हैं। जवानी के दिनों में उनके द्वारा निभाये गये ज्यादातर किरदार मसीहाई छवि वाले होते थे, आज वास्तविक जिंदगी में अमिताभ उसी तौर पर मसीहा कहलाने के काबिल हो गये हैं।
जैसा कि अमिताभ ने खुद ही दुनिया को बता दिया है कि वो देश के कर्ज के बोझ के दबे किसानों को थोड़ी राहत देना चाहते हैं। उन्होंने इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के 1398 किसानों के 4.05 करोड़ का कर्ज बैंक को अपनी जेब से जमा करा दिया है।  
इतना ही नहीं उन्होंने उत्तर प्रदेश  के 70 किसानों को मुंबई बुलाया है। इन किसानों के लिए उन्होंने ट्रेन की एक पूरी बोगी भी बुक कराई है। अमिताभ 26 नवंबर को इन किसानों से मुलाकात करेंगे और बैंक से मिले कर्ज मुक्ति का पत्र उन्हें सौंपेंगे। 
अमिताभ बच्चन का कहना है कि उन्होंने ये कदम इसलिये उठाया है ताकि देश के अन्नदाता आत्महत्या को मजबूर ना हों।
अमिताभ बच्चन ने इससे पहले महाराष्ट्र के किसानों की भी मदद की थी।
अमिताभ बच्चन ने महाराष्ट्र के 350 किसानों का कर्ज चुकाया था। उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम में फिल्म की शूटिंग के दौरान अखबार में प्रकाशित खबर ने उन्हें द्रवित कर दिया कि महज कुछ हजार रुपये नहीं चुकाने के चलते किसान आत्महत्या कर रहे हैं। देश में कितने नामचीन लोग समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के आधार पर सामाजिक भूमिका निभाने के लिए आगे आते हैं? इसके अलावा उन्होंने 44 शहीदों के परिवारों को भी आर्थिक मदद दी थी। अमिताभ कहते हैं, ‘‘अपने देश के लिए शहीद होने वाले जवानों के परिवार के लिए कुछ करने से मुझे संतुष्टि मिलती है। आखिरकार वे हमारे लिए अपना जीवन कुर्बान करते हैं।’’
अमिताभ बच्चन की इस जय जवान जय किसान मुहिम को आज हर कोई सलाम कर रहा है।
लेकिन अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा है कि यह उनकी तरफ से किया गया छोटा सा प्रयास है। देश के कुछ और समर्थ लोग अगर इस दिशा में आगे कदम बढ़ाएं तो देश में किसानों की आत्महत्या को रोका जा सकता है।
आपको बता दें कि अमिताभ अगर इस उम्र में सक्रिय हैं तो इससे कई सारे उनके निजी स्टाफों के परिवार का भी भरण पोषण होता है। अमिताभ बच्चन के आवास, दफ्तर, गतिविधियां आदि को देखते हुए अंदाजा लगा सकते हैं कि उनके स्टाफों की कितनी संख्या होगी! अगर वो खाली बैठ जायेंगे तो इतने सारे स्टाफ के परिवारों का क्या होगा? इसलिए दुआ कीजिये कि आमिताभ ताउम्र सक्रिय रहें और जरूरतमंदों की इसी तरह मदद करते रहे।
*लेखक पिक्चर प्लस के संपादक हैं। Email; pictureplus2016@gmail.com

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