सुपरहीरो के ज़माने में शाहरुख खान क्यों बने ‘ज़ीरो’? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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रविवार, 4 नवंबर 2018

सुपरहीरो के ज़माने में शाहरुख खान क्यों बने ‘ज़ीरो’?

बौना युवक बऊआ सिंह के किरदार में शाहरुख खान 


*संजीव श्रीवास्तव
सलमान खान की फिल्म रेस3 के रिलीज होने से पहले ईदी के तौर पर टीज़र, दिवाली की रौनक के इंतजार के बीच अमिताभ-आमिर की फिल्म ठग्स ऑफ हिंदुस्तान के रिलीज से पहले ट्रेलर का तोहफा और क्रिसमस की छुट्टियों से पहले पूरी फिल्म का उपहार; यकीन मानिये हिंदी सिनेमा के इतिहास में प्रचार प्रसार की ऐसी रणनीति शायद ही कभी देखने को मिली।
इतना ही नहीं फिल्म जब 21 दिसंबर को रिलीज होगी तो सामने होगी बड़े दिनों की छुट्टियां और नये साल के सैर सपाटे का पूरा हफ्ता। यानी जीरो को चलाने और जीरो के हीरो को दौड़ाने के लिए मिलेगा तकरीबन दो हफ्ता। इसके बाद रिकॉर्ड कमाई की तुलना की जायेगी कि साल के अंत में रिलीज हुई आमिर की दंगल, सलमान की टाइगर जिंदा है के मुकाबले शाहरुख की जीरो ने कितनी कमाई की? शायद ये किसी बड़े प्रोजेक्ट के बिज़नेस और उसके रिटर्न के लिए ये रणनीतियां जरूरी भी हो जाती है क्योंकि छोटे प्रोजेक्ट को छोटा प्रोजेक्ट कम कॉम्पटीशन देता है।
 
'ज़ीरो' के कलाकार-अनुष्का, शाहरुख और कैटरीना
फिल्म का नाम ज़ीरो क्यों?

बहरहाल बात करते हैं ज़ीरो स्टेट ऑफ माइंड की।
एक ग्रांड कॉमर्शियल फिल्म के टाइटल ज़ीरो को समझना सबके वश की बात नहीं लगती। फिल्म का नाम आम जीवन के फलसफे का मजबूत धरातल लिये हुये है। अब तक के संकेतों के मुताबिक 'ज़ीरो' बताता है कि किसी भी इंसान में पूर्णता नहीं होती। अधूरापन सबमें होता है। जैसे कि इस फिल्म में शाहरुख अगर बौना हैं तो अनुष्का दिव्यांग, वहीं कैटरीना की कमजोरी उसकी भावुकता है। शाहरुख के किरदार का मानना है कि इंसान क़द से बौना हो सकता है लेकिन अक्ल या समझ बूझ से भी बौना हो यह जरूरी नहीं। वह बौना होकर भी परिपक्व सोच का हो सकता है। उसी तरह अनुष्का की भी यही फीलिंग है कि उसकी दिव्यांगता उसकी मूल पहचान नहीं है। जबकि कैटरीना पूरी फिल्म में अपनी विशेष कमजोरी यानी कोमल भावुकता पर विजय पाने की कोशिश करती हुई दिखाई देगी। यानी सबके जीवन में 'जीरो' गोकि शून्य है और अपनी ख्वाहिशों को पाने के लिए जिंदगी जीने की कोशिश इस शून्यता को भरने का उद्यम है। देखना है कि इस फलसफे को फिल्म में इन कलाकारों ने कितनी शिद्दत से जीया है।
 
प्रमोशन के दौरान सलमान की गोद में जा बैठे शाहरुख
शाहरुख ने ज़ीरो क्यों की?

इस सवाल का जवाब शाहरुख सीधे सीधे भले ही ना दें क्योंकि इसका सीधा और तीखा जवाब यही है कि शाहरुख के पास इसके सिवा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं था। ज़ीरो पहले सलमान खान को ऑफर हुई थी लेकिन सलमान ने व्यस्तता का हवाला देते हुए  इस किरदार को निभाने से इनकार कर दिया था। लेकिन सचाई तो यही है कि सलमान ने इसे अपनी इमेज के उलट माना। ट्यूबलाइट में मंदबुद्धि का किरदार निभाकर सलमान झटका खा चुके थे। अब इस तरह का कोई और एक्सपेरिमेंट सलमान कत्तई नहीं करना चाहेंगे जिसमें उनके किरदार का एकल दबदबा न हो। सलमान अब वही फिल्म करेंगे जिसमें उनकी छवि सुपरहीरो वाली होगी। ज़ीरो बनने का तो सवाल ही नहीं उठता था। हां, यह फिल्म अगर आमिर को मिलती तो शायद वो विचार कर सकते थे, क्योंकि आमिर में एक्सपेरिमेंट की चुनौती मोल लेने का साहस सबसे ज्यादा है। लेकिन आमिर के पास ठग्स ऑफ हिन्दुस्तान और महाभारत के चलते बाहर के प्रोजेक्ट में काम करने का वक्त नहीं। जबकि शाहरुख खान के पास वक्त ही वक्त था। चेन्नई एक्सप्रेस के बाद  शाहरुख खान के खाते में कोई ब्लॉकबस्टर नहीं है। हाल के सालों में अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वियों मसलन आमिर और सलमान से रेस में वो पिछड़ चुके हैं। लिहाजा उन्हें इनके सामने बौना बनने में कोई झिझक नहीं। शाहरुख खुद भी कह चुके हैं कि यह फिल्म उन्होंने सलमान और कैटरीना की मार्फत मिली है। लेकिन इसका यह मतलब कत्तई नहीं कि सलमान और आमिर के आगे सलमान ने बौना बनकर अपनी हीनता दिखाई है। 
संजीव श्रीवास्तव

वास्तव में यह एक समझदार और पूर्ण कलाकार का बड़प्पन है जो चुनौतीपूर्ण किरदार को पूरे दमखम से निभाने के लिए तैयार हुआ है। फिल्म तो बाद में आयेगी लेकिन ट्रेलर ने ही साबित कर दिया कि शाहरुख खुद को रेस में बनाये रखने के लिए अब भी कितने तत्पर हैं।
(*लेखक पिक्चर प्लस के संपादक हैं। दिल्ली में निवास।

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