आइये समझें कौन बन सकता है इंडियन आइडल 10 का विनर? - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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सोमवार, 17 दिसंबर 2018

आइये समझें कौन बन सकता है इंडियन आइडल 10 का विनर?

फोटो- ट्वीटर से साभार


*संजीव श्रीवास्तव
इस सवाल का जवाब जल्द सबके सामने होगा। लेकिन कुतूहल सबके भीतर है कि पांचों प्रतियोगियों में से किसके सिर विनर का ताज सजेगा यानी कि किसके हाथ में होगी विजेता ट्रॉफी?
सबसे पहले बताते हैं- पांचों प्रतियोगी गायकों के नाम - विभोर पाराशर, अंकुश भारद्वाज, नीलांजना रे, नितिन कुमार और सलमान अली। खास बात यह कि इन पांचों गायकों की आवाज़ और अंदाज काफी आकर्षक हैं और प्रतिभा संपन्न भी। इनमें से किसी की भी गायिकी को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। पांचों में संगीत की संगत का पूरा असर दिखता है और वे जज़्बात से लबरेज हैं। तो सवाल फिर वही है कि इनमें से कौन हो सकता है विनर? इसे समझने के लिए आइये इन पांचों के पेस और पिच पर गौर फरमाते हैं।

विभोर पाराशर : -
इंडियन आइडल 10 में विभोर पाराशर एक ऐसा गायक है जिसमें विविधताएं हैं। वह रॉक अंदाज में गाता है। शुरुआत से ही अपनी कला को उत्तरोत्तर विकसित करता आया है। वह परफॉर्मर की तरह गाता है। इंडियन आइडल के इतिहास में झांककर देखें तो हमेशा यहां अच्छे सिंगर होने के साथ साथ जिसमें रॉक परफॉर्मर होने की भी झलक दिखती है और जो इंटरटेनिंग फैक्टर से लैस होता है-वही हमेशा विनर होता आया है। इंडियन आइडल की परंपरा के मुताबिक विभोर में विजेता वाली क्वालिटी है। लेकिन विभोर की एक कमजोरी है कि वह जिस भी गायक के गीत को गाता है, वह उसकी नकल करता हुआ सा प्रतीत होता है। यानी वह सीधे सीधे कॉपी कर देता है। गायिकी में उसकी खुद की छाप नज़र नहीं आती। संभव है विनर बनने में उसकी यह कमजोरी कहीं बड़ी चूक न साबित हो।

अंकुश भारद्वाज :-
इस शो में सलमान अली के बाद दूसरा कोई गायक है जो दर्शकों की सबसे अधिक सहानुभूति को बटोर रहा है। यद्यपि उसकी गायिकी में भी कम दम नहीं है। वह बहुत सधे हुए अंदाज में गाता है। पिच लो रहता है लेकिन उसकी आवाज़ दिल तक पहुंचती है। वह स्टेज पर अपने हाव भाव से समां भी बांध देता है। स्टाइलिश और रॉक फ्लेवर उसकी पर्सनाल्टी की भी खासियत है जो विभोर में है। इसलिए वह विभोर का सबसे नजदीकी प्रतियोगी है। इन तमाम खासियतों के साथ ही अंकुश में एक कमजोरी है-वो यह कि वह सोनू निगम शैली से बाहर निकल नहीं पा रहा। हां, समझा जा सकता है कि वह सोनू का बड़ा फैन होगा लेकिन कोई भी प्रतियोगिता किसी की नकल करके या किसी का फैन बनकर या उसके नक्शेकदम का फॉलोअर बन कर नहीं जीती जा सकती। अंकुश में भी विभोर की तरह उसकी गायिकी में निजी पहचान की बुनियाद नहीं है।

नितिन कुमार :-
जिस तरह अंकुश विभोर को कड़ी प्रतियोगिता दे रहा है उसी तरह नितिन अंकुश का बड़ा वोटकटवा साबित हो रहा है। आप कहेंगे मैंने  चुनावी राजनीति वाली भाषा में बात कर दी। ये भला कैसे हो सकता है। नितिन अंकुश का वोटकटवा कैसे बन सकता है? उसका जवाब ये है कि अंकुश और नितिन दोनों ही हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। एक शिमला का तो दूसरा ऊना का। हां, यह सच है कि पिछले एपिसोडों में नितिन के मुकाबले अंकुश को काफी ज्यादा वोट मिलते रहे लेकिन जरा सोचिये दोनों के वोट अगर एक ही जगह पड़ते तो क्या अंजाम होता? इंडियन आइडल के इतिहास में झांककर देखें तो कला और प्रतिभा के साथ साथ क्षेत्राधारित वोट शेयर ने अपना खूब करिश्मा दिखाया है। लेकिन बात जहां तक नितिन की गायिकी की करें तो उसमें मुझे प्लेबैक सिंगर बनने की क्षमता दूसरों की अपेक्षा कमतर नज़र आती है। बेशक नितिन भजन और लोक गायिकी बहुत अच्छी कर सकता है।

नीलांजना रे : -
टॉप फाइव में जगह बनाने वाली इंडियन आइडल 10 की एकमात्र फीमेल प्रतियोगी। गोयाकि इससे पहले की फीमेल प्रतियोगियों मसलन अवंती पटेल और रेनु नागर दोनों ही गायिकाएं उत्तम श्रेणी की कलाकार बनने की दक्षता रखती हैं। लेकिन इस बार के शो में पूर्व के शोज़ की परंपरा को तोड़ने का पूरा प्रयास किया गया है। इस बार शो में क्षेत्राधारित वोट शेयर के गणित को काफी पहले ही दरकिनार कर दिया गया था। अवंती पटेल का एलिमिनेशन इस बात का सबूत है वरना उसके लिए महाराष्ट्र और गुजरात मिलकर बड़ा वोट बैंक खड़ा कर सकता था। लेकिन चूंकि अवंती ने अपना प्रदर्शन उत्तरोत्तर विकसित गति में नहीं रखा इसलिए वह रेस से बाहर हो गई। यही वजह रही रेणु नागर की भी। अच्छी आवाज़ की स्वामिनी होकर भी धैर्य और स्थिरता की कमी ने इसे रेस से बाहर कर दिया। इन दोनों के उलट नीलांजना रे ने अपना आत्मविश्वास कभी नहीं खोया। वह हमेशा पहले से बेहतर गाने की मेहनत करती प्रतीत होती है। और यही वजह है कि उसने टॉप फाइव में स्थान बनाया है। कोई हैरत नहीं कि नीलांजना इन पांचों में कोई चौंकाने वाला स्थान प्राप्त कर ले।

सलमान अली :-
यह इस प्रतियोगिता का सबसे चर्चित कलाकार है। पतला, दुबला, गरीब घर का, परिवार के खर्चे का बोझ उठाने वाला-फिर भी संगीत की बारीकियों पर बारीक पकड़। सलमान को नेचुरल आर्टिस्ट की तरह माना जा रहा है। प्रारंभ से अब तक सलमान अली को इस शो का विशेष आकर्षक फैक्टर की तरह प्रस्तुत किया गया। उसे शो की टीआरपी का विशेष एलिमेंट बनाकर भी रखा गया। शो के जज हों या मेहमान-सबने हर एपिसोड में सलमान की दिल खोल कर प्रशंसा की और उसे बहुत आगे तक जाने वाला सिंगर बताया। सलमान की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह किसी भी गायक के गीत को उठाता है तो उसे अपने अंदाज़ का पिच प्रदान करता है। उसके हाई पिच में कलाबाजियां जरूर होती हैं लेकिन वह शायद वैसा कर सकता है इसलिए करता भी है। हाई पिच में कलाबाजियों के आरोप सोनू निगम पर भी लगते रहे हैं तो सोनू ने हमेशा कहा कि वो ऐसा कर सकते हैं इसलिए करते हैं। यही बात और आत्मविश्वास सलमान में भी है। इसके बावजूद सलमान अली की गायिकी में किसी की नकल का कोई असर नहीं है। वह पूरी तरह से ओरिजिनल और नेचुरल है। लेकिन सलमान में एक कमी है जो विभोर की सबसे बड़ी खूबी है, वो यह कि वह स्टेज पर रॉक परफॉर्मर नहीं बन पाता जैसा कि विभोर कर गुजरता है।

अब देखना है इंडियन आइडल 10 की टीम विनर का चयन करने के लिए परंपरागत गणित का आधार बनाती है या कि प्रतिभा की खोज के लिए जिस तरह शुरुआत से ही लीक को तोड़ा गया है, उसका अंत तक निर्वाह किया जाता है ? यानी प्योर सिंगर बनेगा विनर या रॉक परफॉरमर जीतेगा ट्रॉफी? इंतजार कीजिये तेईस दिसंबर का।
*लेखक पिक्चर प्लस के संपादक हैं। दिल्ली में निवास।
संपर्क – pictureplus2016@gmailcom

1 टिप्पणी:

  1. सलमान अली ही सही में इंडियन आइडल है । जितना तो उसी को चाहिए ।

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