छोटे शहर का एक बौना भी पहुंच सकता है मंगल पर, यही है 'ज़ीरो' का मंत्र - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 22 दिसंबर 2018

छोटे शहर का एक बौना भी पहुंच सकता है मंगल पर, यही है 'ज़ीरो' का मंत्र


फिल्म समीक्षा
जीरो
निर्देशक - आनंद एल राय
कलाकार- शाहरूख खान, अनुष्का शर्मा, कैटरीना कैफ, तिग्मांशु धुलिया, अभय देओल आदि।
*रवींद्र त्रिपाठी
एक है बउआ सिंह (शाहरूख खान)। मेरठ में रहता है। कद है चार फुट छह इंच। आम बोलचाल में जिसे बौना कहते है वो है बउआ। बड़ा शरारती है। उसे शोहदा भी कह सकते हैं। पिता (तिग्मांशु धूलिया) से भी सम्मान से बात नहीं करता। घर के पैसे लुटाता है। बालकनी पर खड़े होकर हवा में उड़ा उड़ा के। और घर पर ज्यादातर चारखाने वाले अंडरवियर और बनियान में रहता है। लेकिन है वो बड़ा इंटरटेनिंग। कई लोगों के रिक्शा पर बिठाकर सिनेमा दिखाने ले जाता है। वो अड़तीस का हो चुका है लेकिन शादी नहीं हुई है। लेकिन अपने लिए लड़की खोजता रहता है।


और इसी खोजबीन के दौरान एक दिन बउआ टकरा जाता है आफिया (अनुष्का शर्मा) से। अनुष्का सेलिब्रल पाल्सी से ग्रस्त है। यानी मष्तिकाघात से। ((हालांकि इस बीमारी का फिल्म में उल्लेख नहीं है। सिर्फ संकेत है।) वो ह्वील चेयर पर रहती है। लेकिन वैज्ञानिक है और अमेरिका में अंतरिक्ष कार्यक्रम से जुड़ी है। बउआ पहले तो उसका मजाक उड़ाता है लेकिन फिर उससे पटाने में लग जाता है। वो पट भी जाती है। बउआ के पिता दोनों की शादी कर देना चाहते हैं। शादी तय भी हो जाती है। घोड़ी पर सवार बउहा आफिया के यहां बारात लेके पहुंच भी जाता है।
लेकिन ये क्या? ऐन शादी के वक्त बउआ को पता चलता है कि उसे बबिता कुमारी (कैटरीना कैफ) के साथ एक डांस कंपटीशन में उसे नाचने का मौका मिल सकता है। बउता तो मेरठ के आम शोहदों की तऱफ बबिता का फैन है। उसको तो ये सुनहरा मौका है। बस वो शादी की शेरवानी उतारता है और अंडरवियर और बनियान पहने भाग खड़ा होता है। उधर बबिता की अलग कहानी है। वो बउआ को अपने करीब आने का मौका देती है लेकिन उसके बाद धक्के मारकर बाहर निकाल देती है। उसके बाद बउआ क्या करता है? ये पूछिए मत। विश्वास नहीं होगा। सच में। वो अमरीका जाता है और वहां से रॉकेट पर सवार होकर सीधे मंगल ग्रह पर पहुंच जाता है। भरोसा नहीं हुआ न? पर ऐसा ही होता है।
इसमें शक नहीं कि `जीरो एक मनोरंजक फिल्म है। ये जम के हंसाती है। अपने संवादों से और दृश्यों से। शाहरूख के अपने अंदाज भी इसमें हैं। इसमें कैटरीना कैफ पर फिल्माया गया आईटम नंबर भी धांसू है। कुछ पुराने गाने भी इसमें शामिल किए गए हैं। इसका जज्बाती पहलू भी दिल को छूने वाला है। इसमें दो विकलांग हैं- बउआ और आफिया। बउआ तो गैरजिम्मेदार है लेकिन आफिया एक संजीदा औरत है। दोनों अपनी अपनी तरह की अपूर्णता लिए हुए है। हालांकि फिल्म में ये एक नैतिक पहलू जरूर उभरता है कि बतौर वैज्ञानिक आफिया बउआ को मंगल ग्रह पर क्यों भेजती है? हालांकि पहले एक चिंपांजी को भेजा जाना था। लेकिन चिंपांजी की हरकतों की वजह से बउआ को भेजा जाता है। इस तरह तो एक आदमी भी वैज्ञानिक प्रयोग का शिकार हो जाता है।


खैर, आखिर तक आते आते आफिया के दिल में बउआ को लेकर मिश्रित भावनाएं है। एक स्तर पर वो उसे नापसंद भी करती है और दूसरे स्तर पर उसके दिल में बउआ के लिए प्यार भी बचा हुआ है। प्रतिशोध और प्यार – दोनों उसके दिल में है। वैसे आफिया यानी अनुष्का शर्मा का चरित्र दिवंगत वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंस से प्रेरित लगता है। अलग से ये भी कहना प़ड़ेगा कि अनुष्का का अभिनय भी  दिल को छूने वाला है। शाहरूख भी एक अरसे के बाद जमे हैं। फिल्म में उनकी शोखी और उनके भीतर निहित ऊर्जा भरपूर दिखती है।
फिल्म को देखकर आपको शाहरूख खान की एक पुरानी फिल्म ``ओम शांति ओम की याद आ सकती है। उसमें कई फिल्मी हस्तियां एक गाने में दिखाई दी थीं। `जीरोमें शाहरूख खान की पुरानी फिल्मों की कई हीरोइनें हैं- जूही चावला, काजोल, रानी मुखर्जी, करीना कपूर, दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट आदि। पता नहीं माधुरी दीक्षित और और ऐश्वर्या राय क्यों नहीं है। पुरुष सितारों में अकेले सलमान खान हैं।
फिल्म में वीएफएक्स तकनीक से शाहरूख खान की लंबाई और चौड़ाई कम कर दी गई है। निर्देशक आनंद एल राय ने इस तकनीक से दो काम किए हैं। एक तो शाहरूख का मेकओवर कर दिया है यानी उनको नए सांचे में ढाल दिया है। दूसरे शारीरिक अपूर्णता वाले मसले को फिल्म का विषय बना दिया है।`जीरोअपेक्षाकृत छोटे शहरों के मिजाज को भी सामने लाती है। इसमे मेरठ के कई अक्स मौजूद हैं।
*लेखक प्रसिद्ध कला और फिल्म समीक्षक हैं। दिल्ली में निवास।
संपर्क - 9873196343



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