सारा अली खान को देखकर करीना कपूर का डेब्यू याद आता है! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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रविवार, 9 दिसंबर 2018

सारा अली खान को देखकर करीना कपूर का डेब्यू याद आता है!



*संजीव श्रीवास्तव 
केदारनाथ फिल्म देखने के बाद बहुत से लोग इसकी कहानी, पृष्ठभूमि, लोकेशन और मजहब से जुड़ी बातें कर रहे हैं लेकिन मैं यहां केवल इस फिल्म के दो सितारों यानी सारा अली खान और सुशांत सिंह राजपूत की बात करुंगा।

बात सबसे पहले सारा अली खान की। 

फिल्म आने से पहले ही सारा अली अपने गेटअप और लुक को लेकर मीडिया में सुर्खियां बटोर चुकी हैं, लेकिन उन सुर्खियों में उसकी अभिनय क्षमता का कहीं कोई योगदान नहीं था। वे चर्चाएं केवल उसकी तस्वीरों के आधार पर थीं।
लेकिन जब फिल्म आ गई तो उसकी एक्टिंग और स्क्रीन पर उभरते उसके अक्स की चर्चा सबकी जुबान पर है।
जिन्होंने भी केदारनाथ देखी, उन्हें उस फिल्म में सबसे ज्यादा अगर कोई चीज़ पसंद आई तो वो निश्चय ही सारा अली खान है। कहानी कमजोर, निर्देशन कमजोर, गाने कमजोर, संगीत औसत। लेकिन इस बीच सबसे अधिक जिसने चर्चा बटोरी वो है सारा अली खान।
करीना की जगह लेगी सारा?
केदारनाथ देखकर मुझे करीना कपूर की पहली फिल्म रिफ्यूजी यूं ही नहीं या आई। जब रिफ्यूजी आई थी तो उस वक्त भी सबकी जुबान पर करीना का डेब्यू ही चर्चा का विषय था। क्योंकि केदारनाथ की तरह ही रिफ्यूजी के बाकी आयाम भी औसत ही थे। कहानी, निर्देशन, गीत-संगीत सबकुछ कमजोर। लेकिन करीना की पर्सनाल्टी, उसकी अभिनय क्षमता, सुंदरता सब दर्शकों को भा गई थी। अब केदारनाथ देखकर भी मन में वही भाव पैदा होता है जो तब करीना को देखकर हुआ था। करीना ने तब कहा भी था कि बचपन से ही कैमरे के आगे जिंदगी जीने की सारी कला को देखते आ रही हूं लिहाजा कैमरे के आगे किसी नये कलाकार की तरह झिझकना कैसा ! केदारनाथ में जब नाचते गाते, हंसते मुस्कराते, रोते बिलखते और दौड़ते भागते हुए सारा अली को देखते हैं तो ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि उसने इससे पहले कैमरे का सामना नहीं किया। बहुत सहज अंदाज में वह अभ्यस्त आत्मविश्वास को जीती हुई नजर आती है। रिफ्यूजी के बाद करीना को जल्द ही कई फिल्में मिलने लगीं। यही हाल सारा का है, उसकी कई फिल्में फ्लोर पर हैं।

सुशांत सिंह और सारा अली 'केदारनाथ' में
सुशांत सिंह राजपूत को क्या करना चाहिये?
केदारनाथ सुशांत सिंह राजपूत की डेब्यू फिल्म नहीं है। वह तकरीबन एक दशक से इंडस्ट्री में है। सुशांत अच्छा अभिनय करने के बाद भी इस फिल्म में अपने लिए चर्चा योग्य स्पेस बना नहीं पाते। यह कमजोरी सुशांत की नहीं है। यह कमजोरी बॉलीवुड की प्रचलित ग्रुमिंग और प्रोजेक्शन की लॉबिंग की है। सुशांत इससे पहले क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी की बॉयोपिक पर सफलतापूर्वक काम कर चुके हैं। उससे भी पहले सुशांत छोटे पर पर्दे पर अच्छी पारी खेल चुके हैं। लेकिन सुशांत के लिए धोनी की तरह फिल्म नहीं मिल सकी जो उसके भीतर किरदार को जीने की ललक को निखार सके। सुशांत को निर्माता निर्देशक की तरफ से उस तरह की फिल्म ऑफर नहीं हुई जैसे कि रणवीर सिंह के लिए संजय लीला भंसाली की तरफ से हुई। यानी सुशांत को ग्रुम या प्रोजेक्ट नहीं किया गया। वरना रणवीर, रणबीर, वरुण धवन की पंक्ति के बीच एक और सितारा बॉलीवुड को मिलता।
ऐसे में सुशांत सिंह के लिए अलग रास्ता बनाने की जरूरत है। सुशांत के लिए अगर रणवीर, रणबीर और वरुण की तरह फिल्म नहीं लिखी जा रही है तो वह राजकुमार राव या कि नवाजुद्दीन सिद्दीकी वाले किरदार की तरफ ध्यान देना ज्यादा शुरू करे। हालांकि केदारनाथ में सुशांत का किरदार सहानुभूति पाने वाला किरदार है लेकिन सारा की सुंदरता, मासूमियत, मादकता और अदाओं के आगे सबकुछ कमजोर और औसत हो जाता है।
सारा अली खान में काफी संभावनाएं हैं जिसकी बॉलीवुड को खासी जरूरत भी है। जैसे कि ऐश्वर्या राय के समक्ष करीना ने अपनी सक्रिय और सफल उपस्थिति बनाई उसी तरह आज की तारीख की चर्चित अभिनेत्रियों में सारा का एक सार्थक हस्तक्षेप होने वाला है।
*लेखक पिक्चर प्लस के संपादक हैं।
संपर्क - Email : pictureplus2016@gmal.com

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