नकलचियों का नटवरलाल - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 19 जनवरी 2019

नकलचियों का नटवरलाल


फिल्म समीक्षा
ह्वाई चीट इंडिया
निर्देशक - सौमिक सेन,
कलाकार - इमरान हाशमी, श्रेया धन्वंतरी, स्निग्धदीप चटर्जी
रवींद्र त्रिपाठी*

बहुत सारे लोग अपने बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर बनाना चाहते हैं। इनमें से कुछ ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों को राजस्थान के कोटा जैसी जगहों में भेजकर उनकी कोचिंग कराते हैं। पर कई ऐसे होते हैं जिनके बच्चे मेहनत नहीं करते या नहीं करना चाहते। वे क्या करें? वे उन नटवरलालों के चक्कर में आ जाते हैं जो नकल कराके और पैसे लेकर छात्रों को परीक्षाओं में पास कराते हैं। इमरान हाशमी ने इस फिल्म में उसी तरह के एक नटवरलाल की भूमिका निभाई है। वैसे `राजा नटवरलाल में वे पहले भी इसी तरह के कॉनमैन का रोल निभा चुके हैं।
हाशमी इस फिल्म में रॉकी उर्फ राकेश सिंह नाम के ऐसे शख्स बने हैं जो निगाह रखता है कि कौन बच्चे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बलकर इंजीनीयरिंग की प्रवेश परीक्षा पास करते हैं। फिर ऐसे बच्चों को पैसा खिलाकर और उनके आईडेंटिटी कार्ड बदलकर दौलतमंदों के बच्चों के लिए प्रवेश परीक्षा में बिठाता है। उसका धंधा बढ़ता जाता है। ऐसे लोग तो कभी न कभी पकड़े जाते हैं सो रॉकी भी एक दिन काफी मालमत्ते के साथ पकड़ा जाता है। लेकिन उसका धंधा रुकता नहीं है। जेल की हवा खाकर लौटने के बाद फिर से अपने धंधे में लग जाता है। क्या ये चलता रहेगा?
पिछले कुछ बरसों में देश में ऐसे कई नटवरलालों या कॉनमैनों का उदय हुआ है। `ह्वाई चीट इंडिया इसी गोरखधंधे को सामने लाती है। ये इसकी सफलता है। पर  फिल्म में कई कमजोरियां हैं। एक तो इस तरह के जालसाज को नायक का दर्जा देना मुश्किल हो जाता है इसलिए कुछ दूसरे जुगत भिड़ाने पड़ते हैं। इसीलिए निर्देशक ने रॉकी को गायक बना दिया है ताकि कुछ गाने फिल्म में डाल सके। फिर निर्देशक ऐसे चरित्रों को झाड़ पोंछकर साफ बनाने के लिए कुछ प्रेम प्रसंग डालते हैं जिससे हीरो को रोमांटिक बनाया जा सके। यहीं पर मात खा गए गए हैं निर्देशक सौमिक सेन। एक तो उन्होंने रॉकी को शादीशुदा दिखा दिया है। फिर उसका हल्का एक रोमांटिक पहलू भी दिया है। श्रेया धन्वंतरी के साथ। पर ये ठीक ठाक प्रेम भी नहीं है। इसलिए रोमांस है भी और नहीं भी एक ड्रीम सीक्सेंस वाले गाने से फिल्म रोमांटिक नहीं हो जाती है।
इमराम हाशमी एक चार्मिंग व्यक्तित्व की तरह उभरे तो लेकिन फिल्म का अंत कमजोर है और सारी नाटकीयता की हवा निकाल देता है। और हां, जिनको ये जानने में दिलचस्पी है कि इमरान हाशमी की इस फिल्म में किसिंग सीन हैं या नहीं, उनको बता दिया जाए कि बस एक ही है। इमरान के फैनों को उसी से काम चलाना पड़ेगा।
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क – 9873196343 

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