पोलिटिक्स के लिए फिल्मी 'ठाकरे' ! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 26 जनवरी 2019

पोलिटिक्स के लिए फिल्मी 'ठाकरे' !

फिल्म समीक्षा
ठाकरे
निर्देशक अभिजित पान्से
कलाकार - नवाजुद्दीन सिद्दीकी, अमृता राव आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
इस फिल्म को दो तरीके से देखा जाना चाहिए। एक तो शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के बॉयोपिक के रूप में। सवाल है कि ठाकरे की बायोपिक क्यों बनाई गई है? यह ध्यान में रखना चाहिए कि इस फिल्म के निर्माता के रूप में शिवसेना के नेता संजय राउत और उनके परिवार को सदस्यों के नाम हैं। इसलिए यह फिल्म शिवेसना की योजना के तहत बनी है। योजना क्या है?  अनुमान लगाया जा सकता है। और यह कि लोकसभा चुनाव के पहले शिवसेना महाराष्ट्र की जनता को यह दिखाना चाहती है कि महाराष्ट्र में मराठी मानुस की आवाज सबसे पहले बाल ठाकरे उठाई। और सिर्फ मराठी मानुस का समर्थक ही नहीं। बल्कि हिंदुओं का रक्षक भी। फिल्म शुरू है होती है बाबरी मस्जिद के विध्वंस का जिम्मेदार मानते हुए बाल ठाकरे को अदालत बुलाए जाने से। उसके बाद पूरी फिल्म फ्लैशबैक में चलती है, जिसमें कार्टूनिस्ट ठाकरे का नेता ठाकरे के रूप में उदय होता है।
क्या शिवसेना यह भी दिखाना चाहती है कि हिंदुत्व की असली झंडाबरदार भी  वही हैसीधे सीधे तो नहीं लेकिन परोक्ष रूप से यह फिल्म बीजेपी को एक चुनौती है। 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के वक्त भी ठाकरे ने कहा था यह विध्वंस शैवसैनिकों ने किया था। हाल में उद्धव ठाकरे भी राम मंदिर बनाने की मांग को लेकर अयोध्या गए थे।


दूसरे स्तर पर इसे नवाजुद्दीन सिद्दीकी की अच्छी भूमिका के रूप में देखी जाएगी। ठाकरे के व्यक्तित्व को उन्होंने झाड़ पोंछ कर पेश किया है। ठाकरे की पत्नी मीना ठाकरे की भूमिका में अमृता राव एक साधारण गृहिणी लगी हैं। ज्यादातर फिल्मों में कोई न कोई खलनायक होता है। इस फिल्म में कौन? इसमें पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई खलनायक की तरह लगते हैं। क्या इसलिए कि देसाई गुजराती थे? या  कहीं गुजराती के नाम पर निशाना कोई और है?
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क – 9873196343

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