ठहाके की पूरी गारंटी 'टोटल धमाल' - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

शनिवार, 23 फ़रवरी 2019

ठहाके की पूरी गारंटी 'टोटल धमाल'


फिल्म समीक्षा
फिल्म - टोटल धमाल रेटिंग (2 और ½ *)
निर्देशक - इंद्र कुमार
कलाकार - अजय देवगन, अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, अरशद वारसी, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा, रितेश देशमुख, महेश मांजरेकर, बोमन ईरानी आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
एक गुरिल्ला है और एक उसका बच्चा है। गुरिल्ला के बच्चे को बचाने के लिए लल्लन (रितेश देशमुख) उसके सामने रखा जहरीला खाना हटा देता है। लेकिन गुरिल्ला ये समझ नही पाता कि लल्लन ऐसा क्यों कर रहा है। वो समझता है कि उसके बच्चे के सामने से खाना छीन लिया गया है। इसलिए वो लल्लन का हाथ मरोड़ देता है और ऐसा मरोड़ता है कलाई और हथेली मुड़ जाती हैं। लल्लन रोने लगता है। लेकिन हिंदी फिल्म का गुरिल्ला है इसलिए ज्यादा देर तक नासमझ नहीं रह सकता। इसी करण थोड़ी देर के बाद वो लल्लन की कलाई फिर से ऐसे मोड़ता है कि वो ठीक हो जाता है। इतनी देर में दर्शकों को हंसने का मौका मिल गया।
ऐसा ही एक दूसरा सीन है राधे (अजय देवगन) अपने सहयोगी जॉन (संजय मिश्रा) के साथ एक कार चुराकर भागता है और बोलनेवाले जीपीएस के सहारे गाड़ी चलाता है। जीपीएस बताता है कि अगर बाएं से मुड़े तो 300 मीटर की दूरी कम हो सकती है। राधे जीपीएस के दिशा निर्देश का पालन करते हुए आगे बढ़ता है तो पाता है आगे एक बड़ा तालाब है जिसमें पानी भरा है। राधे जीपीएस से पूछता है कि ऐसा क्यों हुआ तो उसे जवाब मिलता है कि अगर वो तैर कर इस तालाब को पार कर ले तो 300 मीटर कम जो जाएगा न। हंस गए न इस बात पर? इस तरह के कई और दृश्य इस फिल्म में हैं। ये सब हंसाने वाले हैं। इनके ही कारण `टोटल धमाल एक भरपूर कॉमेडी है। जम कर हंसाती है।
हां इसका `धमाल श्रृंखला की दूसरी फिल्मों से कोई लेना देना नहीं है। यह एक स्वतंत्र फिल्म है। इसमें मुख्य रूप से चार जोड़ियां हैं। एक तो अजय देवगन और संजय मिश्रा की है। दोनों छोटे मोटे चोर हैं और दूसरे के माल पर हाथ साफ करते हैं। दूसरी जोड़ी अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की है। यह इस फिल्म में ऐसे पति पत्नी बने हैं जो शादी के सत्रह साल बाद तलाक चाहते हैं और अदालत में भी आपस में इस तरह झगड़ते हैं कि जज परेशान होकर कहता है- आप दोनों के तलाक की अर्जी स्वीकार। तीसरी जोड़ी अरशद वारसी और जावेद जाफरी की है। यह दोनों भाई भाई हैं और इनमें एक (वारसी) बेहद चालाक है और दूसरा (जाफरी) मासूम। इसीलिए मासूम भाई रेगिस्तान में धंसते एक चालाक भाई को बचाने के लिए रस्सी की जगह सांप फेंकता है और कहता है कि सामने की रस्सी पर कपड़े सूख रहे हैं इसलिए उसे नहीं फेंका। और चौथी जोड़ी रितश देशमुख  और पितोवाश त्रिपाठी है। ये दोनों भी छोटे मोटे बदमाश हैं। लल्लन के रूप में रितेश हमेशा शत्रुघ्न सिन्हा की तरह बिहारी शैली में संवाद बोलते हैं। ये चारों जोड़ियां दो सूटकेशों में बंद पचास करोड़ खोजने निकलती हैं जो एक चिड़ियाघर में छुपाई गई हैं। इस तलाश में ही किस किस तरह के वाकये होते हैं यही इसमें दिखाया गया है। ये पैसे पुलिस अधिकारी (बोमन ईरामी) के हैं जिसमें नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार से कमाए हैं।
क्या ये आठों लोग उस पैसे को पा पाएंगे? और पाएंगे भी उनमें किस तरह इसका बंटवारा होगा यही इस फिल्म की कहानी है। पर मूल जोर कहानी पर नहीं है कॉमिक सिचुएशन पर है और वो भरपूर मात्रा में है। हालांकि आखिर में फिल्म में जानवर और मनुष्य के प्रेम का मामला भी जोड़ा गया है ताकि इसमें थोड़ा आदर्शवाद का तड़का लगाया जा सके। वो तड़का भी फिल्म थोड़ी संजीदगी लाता है लेकिन हास्य को कम नहीं करता।
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क – 9873196343 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad