झूठ से ‘बदला’ लेना हो तो सच जानने के लिए पीछे पड़ जाएं - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

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शनिवार, 9 मार्च 2019

झूठ से ‘बदला’ लेना हो तो सच जानने के लिए पीछे पड़ जाएं


फिल्म समीक्षा
बदला
निर्देशक - सुजॉय घोष
कलाकार - अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू, अमृता सिंह, मानव कौल आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
वकील का काम है अपने मुवक्किल की पैरवी करना। लेकिन वो पैरवी कैसे कर सकता है अगर वो सच न जाने। वैसे तो अक्सर यह मान लिया जाता है कि  मुवक्किल अपने वकील को सच ही बताता है। लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है कि मुवक्किल उसे सच न बताए। फिर वकील क्या करे? यानी मुवक्किल से सच कैसे उगलवाए? जो यह जानना चाहते हैं, उनको अमिताभ बच्चन और तापसी पन्नू की फिल्म `बदला देखनी चाहिए।
`बदला’ स्पानी फिल्म `द इनविजिबल गेस्टका हिंदी रूपांतर है। जिन्होंने यह देखी होगी (ये नेटफ्लिक्श पर भी है) वे बदला देखने के पहले कहानी जान चुके होंगे। उसका क्लाइमेक्स भी। फिर भी उनके मन में पूरी फिल्म के दौरान यह सवाल खदबताता रहेगा कि आखिर इसके निर्देशक सुजॉय घोष उन जाने हुए किस्से को हिंदी में किस तरह दिखाया है। और यह कहने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए कि पहले से कहानी जानते हुए भी बदला को देखने का अपना रोमांच है। खास कर अमिताभ बच्चन के अभिनय को देखना। `पिंक से अलग तरह के वकील लगे हैं अमिताभ। और तापसी पन्नू ने भी ऐसा किरदार निभाया कि आखिर में पता चलाता है कि एक बेहद मासूम सी दिखने वाली यह औरत किस तरह तथ्यों को अपने मनमाने ढंग से तोड़ती मरोड़ती रही। उनका काम भी शानदार है।
जैसा कि नाम से ही लगता है कि `बदलाप्रतिशोध की कहानी है। एक विवाहिता औरत नैना ((तापसी पन्नू) अपनी प्रेमी अर्जुन (टोनी ल्यूक) के साथ छुट्टी मनाने गई है। पति को यह मालूम नहीं। नैना और अर्जुन छुट्टी मनाने के बाद जब वापस लौट रहे होते हैं तभी रास्ते मे एक हादसा होता है। गाड़ी चलाते वक्त नैना  गलती से एक दूसरे कार को टक्कर मारती है। दूसरी कार चला रहे युवक को चोट लगती है। बिना यह जाने कि होश में है या बेहोश, नैना उसे गाड़ी समेत एक तालाब में डुबा देती है। उधर अर्जुन नैना को बचाने के लिए उसका कार लेकर जाने की कोशिश करता है। गाड़ी खराब हो जाती है। उसे रानी (अमृता सिंह) और उसके पति निर्मल (तनवीर गानी) की मदद मिलती है। जब अर्जुन उनके घर जाता है तो उसे मालूम होता कि जिस लड़के की दुर्घटना हुई है तो वो रानी और निर्मल का बेटा है। अब नैना और अर्जुन क्या करें क्योंकि तहकीकात शुरू हो जाती है। फिर एक और दुर्घटना घटती है। एक होटल में अर्जुन की मौत हो जाती और वहीं नैना भी घायल अवस्था में मिलती है। किसने की अर्जुन की हत्या? पुलिस नैना पर शक करती है। उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इस खतरे से बचने के लिए नैना बादल गुप्ता  (अमिताभ बच्चन) नाम के बड़े वकील की सेवा लेती है। लेकिन बादल को पूरा सच चाहिए तभी वो नैना को बचा सकता है। और सच जानने के लिए हुई यह पूरी पूछताछ का नाम है फिल्म `बदला। सच धीरे धीरे खुलता है। और जब खुलता है सबको सन्न कर देता है।
फिल्म मे फ्लैशबैक तकनीक का काफी इस्तेमाल हुआ है। कुछ दृश्यों को बार बार दिखाया गया है और इस कारण दर्शक के सामने एक ही वाकये के अलग अलग पहलू खुलते हैं। अंत में पता चलता है कि जिसे शुरू में मासूम समझा जा रहा था वही सबसे शातिर है।
वकील को कई बार अपने मुवक्किल से भी जिरह करनी पड़ती है और अमिताभ बच्चन ने इसमे वही किया है। अमृता सिंह का किरदार छोटा है लेकिन अहम है। काश उनको कुछ और सीन मिले होते। निर्देशक सुजॉय घोष ने इस फिल्म में  महाभारत की कथा का बेहतरीन उपयोग किया है। निर्देशक ने महाभारत के माध्यम से ही बताया है कि कहानी सुनानेवाला (या सुनानेवाली) क्या चाहता है। इससे भी वास्तकिवकता बदल जाती है। आखिर महाभारत के युद्ध के दौरान संजय ने जो कहानी धृतराष्ट्र को बतायी थी वो संजय का देखा हुआ था, धृतराष्ट्र का नहीं। जो संजय ने कहा वो धृतराष्ट्र न माना। बादल गुप्ता नैना से एक जगह कहता है – समझ लीजिए आप संजय हैं और मैं धृतराष्ट्र, अब बताइए हुआ क्या था। और बताने के क्रम में सच खुलता जाता है। फिल्म में कोई गाना नहीं है। उसकी जरूरत भी नहीं थी। इसी कारण फिल्म कसी भी हुई है।
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क – 9873196343

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