'पहाड़गंज' जिसे फिल्मकार ने क्राइम की पाठशाला समझा! - PICTURE PLUS Film Magazine पिक्चर प्लस फिल्म पत्रिका

नवीनतम

शनिवार, 13 अप्रैल 2019

'पहाड़गंज' जिसे फिल्मकार ने क्राइम की पाठशाला समझा!


फिल्म समीक्षा
पहाड़गंज (1 ½*)
निर्देशक - राकेश रंजन कुमार
कलाकार - लोरेना फ्रांको, ब्रिजेश जयराजन, नीत चौधरी, राजीव गौड़ सिंह, करण सोनी आदि।


*रवींद्र त्रिपाठी
इस फिल्म को देखते हुए और देखने के बाद यह सवाल मनमें कौंधता रहता है कि आखिर यह फिल्म क्या सोच कर बनाई गई है? यह ना तो ठीक से अपराध कथा बन सकी है और ना सामाजिक हकीकत को बयान करती है। हां, इतना जरूर हुआ कि दिल्ली के पहाड़गंज इलाके के प्रति यह उत्सुकता पैदा करती है। लेकिन वो भी सतही तरीके से। शायद निर्देशक की सोच रही कि मुंबई की धारावी झोपडपट्टी जैसा एक इलाका दिल्ली में भी दिखाए। यानी पहाड़गंज को। लेकिन वो कोशिश विफल रही है। पहाड़गंज नई दिल्ली का वो इलाका है जो रेलवे स्टेशन के पास है और जहा कई होटल हैं और जहां के बारे मे यह धारणा है कि वहां कई तरह के अवैध धंधे होते हैं- जैसे स्मगलिंग, वेश्यावृत्ति और नशे का कारोबार आदि। लेकिन फिल्म यह सब ठीक से दिखा नहीं पाती। हालांकि ये सारे मसले इसमें हैं लेकिन टुकड़ों टुकड़ों में। कोई मुकम्मल तस्वीर नहीं बनती है।
इसमे मुख्य रूप से दो लोगों की कहानियां हैं। एक तो है स्पेन से एक आई लडकी लौरा (लोरेना फ्रांको) जो अपने बॉयफ्रेंड रॉबर्ट को ढूंढने भारत आई है। रॉबर्ट पहाड़गंज में हैं पर कहां यह लौरा को मालूम नही नहीं। रॉबर्ट भी नशे के कारोबार में है। दूसरा किस्सा है गौतम मेनन (ब्रिजेश जयराजन) का जो एक बॉस्केटबॉल का कोच है लेकिन उसकी टीम इसलिए हारती है कि जितेंद्र तोमर (करण सोनी) नाम का एक नेता पुत्र ऐसा चाहता है। तोमर ने गौतम के भाई की हत्या कराई थी। कहानी आगे बढ़ती हैं बाद में तोमर की हत्या हो जाती है। किसने की या करवाई ये हत्या, इसी पर पूरी फिल्म टिकी है। पर दिक्कत ये है कि ये दोनों कहानियां आखिर तक ठीक से मिल नही पाती। निर्देशक ने एक विदेशी हीरोइन  यानी स्पानी लड़की को लेकर यह फिल्म शायद इसलिए बनाई कि इसमें कुछ नए किस्म का ग्लैमर हो। पर यह प्रयास बेकार ही रहा। फिल्म में एक जगह लोरा के साथ एक बाबा बलात्कार भी करता है और पुलिस केस भी दर्ज नहीं करती है। यानी पहाड़गंज एक अराजक जगह है। निर्देशक ने यह भी दिखाने की कोशिश की है कि पहाड़गंज में किशोर या कम उम्र के लड़के अपराधी बनने की राह पर हैं। वे फिल्मी हीरो अजय देवगन के स्टाइल में हत्या करते हैं या गोलियां दागते हैं। कुल मिलाकर निर्देशक ने इस फिल्म को चूं चूं का मुरब्बा बना दिया है।
*लेखक जाने माने कला और फिल्म समीक्षक हैं।
दिल्ली में निवास। संपर्क 9873196343

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad